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Saturday, February 09, 2008

एक गुंडा ‘राज’ के साये में कई गुंडे ‘राज’ कर रहे हैं

कहावत है चोर-चोर मौसेरे भाई लेकिन, यही कहावत महाराष्ट्र में अंदाज बदल लेती है, यहां पर वही कहावत गुंडा-गुंडा चचा-भतीजा में तब्दील हो जाती है। और, अब तो हाल ये है कि पूरे राज्य के नेता एक दूसरे के भाई-भतीजे नजर आ रहे हैं। क्या पक्ष, क्या विपक्ष। सरकार और सरकार से बाहर किसी में कोई भेदभाव नहीं है। सब एक दूसरे की गुंडई बढ़ाने में मदद कर रहे हैं।

लेकिन, गुंडा ‘राज’ में भी पूरी विनम्रता के दर्शन हो रहे हैं। पुणे में एक समारोह के बाद जब आयोजकों ने राज ठाकरे को वहां आने के लिए धन्यवाद दिया तो, राज ने पूरी विनम्रता से इसका सेहरा श्रीमान राजाधि ‘राज’ प्रदेश के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के सिर पर सजा दिया। राज ने स्वीकारा कि अगर देशमुख साहब ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया होता तो, वो आयोजन में शामिल न हो पाते। वैसे राज ठाकरे पुलिस ‘राज’ मुंबई के पुलिस कमिश्नर डी एन जाधव को उनका प्रशस्ति पत्र सार्वजनिक मंच से देना या तो भूल गए या फिर सरकारी नौकर छोड़कर बख्श दिया।

सेना की शुरुआती तालीम के दिनों से ही गुंडा ‘राज’ शुरू हो गया था। शुरू में बड़े ठाकरे, जिनका मुंबई में किसी भी कीमत पर कोई ‘बाल’ भी बांका नहीं कर सकता, को गुंडा ‘राज’, ठाकरे ‘राज’ का ही हिस्सा लगता था। लगता था सेना बढ़ रही है। भले ही कोई दुश्मन न हो लेकिन, सेना का झंडा फहरा रहा था। किसी किले पर न सही, दादर के शिवसेना भवन पर ही सही। लेकिन, ठाकरे ‘राज’ से बाहर होकर गुंडा ‘राज’ की बातें देश के सबसे बड़े स्वनामधन्य मराठी नेता को 80 साल की उम्र में बुरी लगने लगी हैं।

ठाकरे के परम मित्र बिग बी यानी बॉलीवुड के ‘राज’ अमिताभ बच्चन को गंडा ‘राज’ मुंबई, महाराष्ट्र विरोधी बताने लगा तो, ‘राज’ के जनक, बाल ठाकरे से रहा नहीं गया वो, कह बैठे कि गुंडा ‘राज’ गलत है। नाम नहीं लिया किसी का लेकिन, ‘सामना’ मिलते ही कह दिया गुंडा ‘राज’ गलत है। आखिर मामला बॉलीवुड के राजाधि‘राज’ का था। विनम्र बच्चन की अनुभवी पारखी आंखों ने अभी हफ्ते-दो हफ्ते पहले ही तो पहचाना था कि नया ठाकरे‘राज’ कला की दुनिया में परचम लहराएगा।

गृह‘राज’ संभालने वाले उपमुख्यमंत्री आर आर पाटील एनसीपी से हैं। उन्हें पता है मराठी‘राज’ ठाकरे का हो गया और उत्तर भारतीय ‘राज’ कांग्रेस का तो, मुश्किल हो जाएगी। वो, फिर दहाड़े, ठीक उसी तरह से जैसे 31 दिसंबर की रात दो गुजराती लड़कियों के साथ कुछ मराठी बालकों की छेड़खानी के बाद दहाड़े थे। ये डायलॉग आप लोग भी याद कर लीजिए। आगे कई ऐसे मौके आएंगे जब आप पाटील के मुंह से ये रटा-रटाया डायलॉग सुनेंगे। ‘अपराधी कोई भी हो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। ऐसा सबक सिखाया जाएगा कि आगे से कोई भी ऐसी हरकत करने से डरेगा।’ गृह‘राज’ पाटील साहब ने लगे हाथ ये भी कह दिया कि अमर सिंह बहुत बोलते हैं। उत्तर भारतीयों की पिटाई के लिए जिम्मेदार असर सिंह भी हैं।

वैसे उत्तर प्रदेश के गुंडा ‘राज’ की कमान कुछ महीने पहले ही अमर सिंह और उनके भाई मुलायम सिंह यादव के हाथ से छूटी है। अब हर कोई उन्हें गुंडा लगता है। और, उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक गुंडा ‘राज’ दिखता है। उत्तर प्रदेश में मायावती का गुंडा ‘राज’ तो, महाराष्ट्र में तो, गुंडा ‘राज’ है ही। वैसे अमर सिंह और मुलायम सिंह यादव की सपा ने मुंबई में ‘राज’ के लिए गुंडा ही तलाशा था। अबू आजमी पर दाउद जैसे गुंडों के राजा से संपर्क रखने का आरोप लगते रहे हैं। अब ये बात गुंडा ‘राज’ की पार्टी के लोग भी कह रहे हैं। आजमी ने पहले लाठी भांजी लेकिन, जब सामने मुस्तैदी से ‘राज’ की सेना आ गई तो, दुबक लिए। पिट गए ‘राज’ के ताज में रोड़ा बनने वाले।

‘राज’ करने के लिए बाल ठाकरे को अब उत्तर भारतीयों का भी साथ चाहिए। उद्धव के 'राज' के लिए सेना तो तैयार पहले ही हो चुकी है लेकिन, 'राज' में थोड़ी मुश्किलें आ रही हैं। इसलिए सेना में उत्तर भारतीयों को भी शामिल करने की कोशिश हो रह है। इसके लिए एक बड़े उत्तर भारतीय (अमिताभ बच्चन के लिए ये विशेषण शर्मनाक है) के पक्ष में उतरने से बेहतर भला क्या हो सकता है। उधर, ‘राज’ के लिए देशमुख की कांग्रेस और पाटील की एनसीपी बाल ठाकरे से मराठियों की सेना छीनकर उसका बड़ा हिस्सा ‘राज’ को थमाना चाहती है। ‘राज’ की भी पुरानी आदत सेना साथ लेकर चलने की है। अब शिवाजी की सेना तो मिलने से रही। इसलिए नई सेना बनानी है। सेना में जोश भरना है, सेना को किसी के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार किए बिना सेना मे साहस नहीं आता और इस सबके बिना ‘राज’ नहीं आएगा। यहां तक कि 31 दिसंबर की रात छेड़खानी करने वालों को पहले तो उत्तर भारतीयों की करतूत बता दिया। लेकिन, जब वो मराठी माणुस निकले तो, राज उनके पक्ष में मैदान उतर आए। उत्तर भारतीयों को दुश्मन सेना बताकर ‘राज’ करने की कोशिश जारी है। नारायण राणे, छगन भुजबल भी तो ‘राज’ के इसी फॉर्मूले से अब तक राज कर रहे हैं।

गुंडा ‘राज’ के पक्ष में देशमुख, पाटील, पवार नजर आ रहे हैं तो, ‘राज’ बचाने के लिए बाल ठाकरे, अमिताभ बच्चन, संजय निरुपम और भोजपुरी फिल्मों के कलाकार दिख रहे हैं। और, इन दोनों के ‘राज’ में सैंडविच बन गए हैं। इस गुंडा ‘राज’ में कुछ गरीब उत्तर भारतीयों की रोजी-रोटी पर हमला हुआ। सौ-पचास को लात-जूते मिलीं और 25-50 मराठी माणुस पुलिस रिकॉर्ड में आ गए। अब ये कुछ और नहीं कर पाएंगे। अब ये सिर्फ किसी की सेना में ही काम कर पाएंगे। अब ये सिर्फ झूठी अस्मिता बचाने के बहकावे में आकर बार-बार किसी न किसी के लिए गुंडा ‘राज’ कायम करेंगे। और, इनके बाद की मराठी माणुस की पीढ़ी उत्तर भारतीयों के यहां आने की नहीं, अपने ही बाप-दादाओं के गुंडा ‘राज’ कायम करने की कोशिश करने वाली सेना में शामिल होने का खामियाजा भुगतेगी।

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