दो तस्वीरों में दिखता धर्मनिरपेक्षता का सच

असली तस्वीर
नकली तस्वीर
@narendramodi @PMOIndia ध्यान दें। ये दो तस्वीरें हैं। पहली असली तस्वीर है। दूसरी आधुनिक तकनीक का कमाल है। सवाल ये बिल्कुल नहीं है कि इबादत के वक्त मोदी के हाथ बंधे थे या हथेलियां खुली हुईँ थीं। लेकिन, ये खतरनाक सवाल है कि किसको इस तरह के फर्जीवाड़े से फायदा हो रहा है। नरेंद्र मोदी का मैं प्रशंसक इसलिए हूं कि वो जैसे हैं, वैसे रहते, दिखते हैं। और उन्हें छवि में बांधने की कोशिश वो हर बार तोड़ते हैं। अंधभक्तों के लिए भी एक सलाह है कि जिसकी अंधभक्ति रखो, उस पर भरोसा तो रखो। दोनों पक्ष उबल रहे हैं। दरअसल बड़ा छद्म धर्मनिरपेक्ष वर्ग है जिसकी दुकान पुरी तरह से खत्म होती दिख रही है। बहुतायत खत्म हो भी गई है। लालू प्रसाद यादव जब कभी धर्मनिरपेक्षता के लिए जहर पीने, जान देने जैसी बातें करते हैं तो, दरअसल वो वही लक्षण हैं। बड़ा वर्ग है जिसको लगता है कि किसी तरह नरेंद्र मोदी के सिर पर टोपी पहना दो जिससे हिंदू मोदी को दुश्मन मान ले। जिससे फिर ये साबित हो जाए कि सत्ता के लिए धर्मनिरपेक्षता का मतलब यही होता है। जिससे ये साबित हो जाए कि मोदी हिंदू-हिंदू या विकास-विकास बस सत्ता तक के लिए ही चिल्ला रहे थे। जिससे ये भी साबित हो जाए कि नरेंद्र मोदी भारत का सर्वधर्म समभाव वाला ढांचा तोड़कर टोपी पहनकर दिखावा कर रहे हैं। राजनीति खत्म होते उस बड़े वर्ग की मुश्किल यही है कि प्रधानमंत्री के तौर पर भी नरेंद्र मोदी उन्हें वो मौका नहीं दे रहे हैं। जिससे ये साबित हो सके कि मोदी के खाने और दिखाने वाले दांत अलग हैं। ये सारी कवायद वही वर्ग कर रहा है। ये तस्वीरें उसी धर्मनिरपेक्ष ताकतों की साजिश हैं। हिंदू भी इसे समझे और मुसलमान के लिए समझना तो बेहद जरूरी। ज्यादा नुकसान तो ये मुसलमान का ही कर रहे हैं।