खुशी!

इंदौर के एक लड़के को Google अंकल ने 3 करोड़ रुपये सालाना का प्रस्ताव भेजा है। जाहिर है इतना बड़ा प्रस्ताव आज के युग में कोई क्यों ठुकराएगा। इस लड़के की कोई रिसर्च गूगल के लोगों को जबर्दस्त पसंद आई। बेहद खुश इस लड़के की तस्वीर टीवी न्यूच चैनलों पर चमक रही है। पिता का सिर गर्व से उठा हुआ है। इस तीन करोड़ रुपये की खुशी का अंदाजा लगाना मुश्किल है। क्योंकि, टीवी स्क्रीन पर बगल बैठे पिता की शायद सारी जिंदगी की कमाई तीन करोड़ रुपये हुई हो।

और ये शकल तो नहीं देख पाया मैं। क्योंकि, लाल बत्ती पर ठीक इसके पीछे रुकना पड़ा था। मुझे। लेकिन, इसकी साइकिल की चमक मैं साफ देख रहा था। एक-एक तीली करीने से कपड़े से साफ की गई थी। साइकिल स्टैंड पर लगाकर तेज रफ्तार में घूमते पहिए पर कपड़े को उंगलियों में फंसाकर लगाया होगा तब जाकर पिछली रिम की चमक इतनी जानदार हुई होगी। पूरी साइकिल न दिख रहे चेहरे की चमक और जीवन का उत्साह बयान कर रही थी। बत्ती हरी हुई और पैडल पर दूसरा पांव पड़ा साइकिल तेजी से चौराहा पार कर गई। इसीलिए तो कहा जाता है कि खुशी खरीदी नहीं जा सकती। ऐसे ही मिलती है। कभी पहली नई साइकिल चमकाकर तो कभी 3 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज पाकर। खुशी जो है!