Friday, December 06, 2013

खुशी!

इंदौर के एक लड़के को Google अंकल ने 3 करोड़ रुपये सालाना का प्रस्ताव भेजा है। जाहिर है इतना बड़ा प्रस्ताव आज के युग में कोई क्यों ठुकराएगा। इस लड़के की कोई रिसर्च गूगल के लोगों को जबर्दस्त पसंद आई। बेहद खुश इस लड़के की तस्वीर टीवी न्यूच चैनलों पर चमक रही है। पिता का सिर गर्व से उठा हुआ है। इस तीन करोड़ रुपये की खुशी का अंदाजा लगाना मुश्किल है। क्योंकि, टीवी स्क्रीन पर बगल बैठे पिता की शायद सारी जिंदगी की कमाई तीन करोड़ रुपये हुई हो।

और ये शकल तो नहीं देख पाया मैं। क्योंकि, लाल बत्ती पर ठीक इसके पीछे रुकना पड़ा था। मुझे। लेकिन, इसकी साइकिल की चमक मैं साफ देख रहा था। एक-एक तीली करीने से कपड़े से साफ की गई थी। साइकिल स्टैंड पर लगाकर तेज रफ्तार में घूमते पहिए पर कपड़े को उंगलियों में फंसाकर लगाया होगा तब जाकर पिछली रिम की चमक इतनी जानदार हुई होगी। पूरी साइकिल न दिख रहे चेहरे की चमक और जीवन का उत्साह बयान कर रही थी। बत्ती हरी हुई और पैडल पर दूसरा पांव पड़ा साइकिल तेजी से चौराहा पार कर गई। इसीलिए तो कहा जाता है कि खुशी खरीदी नहीं जा सकती। ऐसे ही मिलती है। कभी पहली नई साइकिल चमकाकर तो कभी 3 करोड़ रुपये सालाना का पैकेज पाकर। खुशी जो है!

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर जानकारी.इसलिए तो कहते हैं कि हिंदुस्तान में प्रतिभाओं की कमी नहीं है.
    नई पोस्ट : आंसुओं के मोल

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (07-12-2013) "याद आती है माँ" “चर्चामंच : चर्चा अंक - 1454” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

    ReplyDelete
  3. सुन्दर जानकारी.

    ReplyDelete
  4. क्‍या तुलनात्‍मक खुशी प्रस्‍तुत की है। पढ़ व देख कर खुशी हुई।

    ReplyDelete

भारत के नेतृत्व में ही पर्यावरण की चुनौती का समाधान खोजा जा सकता है

हर्ष   वर्धन   त्रिपाठी  @MediaHarshVT पर्यावरण की चुनौती से निपटने के लिए भारत को नेतृत्व देना होगा विकसित होने की क़ीमत सम्...