Tuesday, October 22, 2013

भारतीयों में गुलामी का हार्डवेयर

प्रेस कांफ्रेंस से पहले बिना तौलिये की ऊंची कुर्सी
हम भारतीयों में गुलामी का सॉफ्टवेयर इनबिल्ट है। यानी इसको सॉफ्टवेयर की जगह गुलामी का हार्डवेयर कहें तो बेहतर होगा। ये गुलामी का हार्डवेयर हम भारतीयों के मानस में ऐसा फिट है कि न चाहते हुए भी हम इसे आसानी से कर जाते हैं। या हमारे शरीर का कंप्यूटर ऑन होते ही हार्डवेयर से गुलामी सबसे पहले अपडेट होती है। देश के वित्त मंत्री सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ समय-समय पर मिलते हैं। जिससे बैंकों की हालत का पता लगे और साथ ही सरकार क्या चाहती है। कौन सी प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं उन्हें बैंकों को बताया जा सके। आम तौर पर ये बैठक विज्ञान भवन में होती है। लेकिन, आज ये बैठक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिल्ली हेडऑफिस में हुई। संसद मार्ग पर स्थित शानदार एसबीआई के ऑफिस में अलग-अलग जगहों पर सरकारी बैंकों को प्रमुखों के साथ वित्त मंत्री की बैठक और बैठक के बीच में वित्त मंत्री की प्रेस वार्ता का कार्यक्रम रखा गया था।

चिदंबरम के आने से ठीक पहले ऊंची कुर्सी पर लगा तौलिया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इमारत कई मंजिलों की है। और 11वीं मंजिल पर पत्रकार वार्ता थी। लेकिन, इस बड़ी इमारत में भी वित्त मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस के लिहाज से छोटी जगह वाला हॉल चुना गया था। एक बजे की प्रेस कांफ्रेस 2 बजे के बाद शुरू हो सकी। ये ऊपर की पूरी घटना मैं सिर्फ संदर्भ के तौर पर लिख रहा हूं। असल बात अब शुरू होती है। 5 कुर्सियां लगाई गईं थीं। वित्त मंत्री, वित्त राज्य मंत्री, वित्त सचिव, सहायक वित्त सचिव और एडिशनल डीजी (पीआईबी)। 5 में एक कुर्सी अलग सबसे ऊंची नजर आ रही थी। जाहिर है वो वित्त मंत्री पी चिदंबरम के लिए रखी गई थी। उस कुर्सी को देखकर हमारे मन में आया कि चिदंबरम ने तो बिल्कुल नहीं कहा रहा होगा कि उनकी कुर्सी सबसे ऊंची रखी जाए। मैंने उस तस्वीर को लिया। तब तक हम भारतीयों की गुलामी और लालफीताशाही के प्रति असल प्रेम वाली तस्वीर आई। स्टेट बैंक के एक अधिकारी ने प्रेस कांफ्रेंस शुरू होने से ठीक पहले  सबसे ऊंची यानी वित्त मंत्री पी चिदंबरम वाली कुर्सी पर सफेद तौलिया लगा दिया। अब बताइए भला। पूरी तरह से वातानुकूलित उस प्रेस वार्ता कक्ष में किस पसीने को सुखाने-पोंछने के लिए उस तौलिये की जरूरत थी। दरअसल ये हमारी गुलामी मानसिकता का शानदार नमूना है जो गाहे बगाहे देखने को मिलता रहता है। 

इस गुलाम मानसिकता को तोड़ने की कोशिश पूर्व वित्त मंत्री और अभी के हमारे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की है। उन्होंने सर्कुलर भेजकर कहा है कि उनके नाम के आगे महामहिम न लगाया जाए। श्री या आदरणीय लगाने में एतराज नहीं।

3 comments:

  1. असल में वित्त मंत्री को केवल उँचाई के आधार पर अपनी कुर्सी पहचानने में दिक्कत हो सकती थी इसलिए उसको तौलिया से चिह्नित कर दिया होगा। अब भारत में है तो अपने को स्पेन तो नहीं समझ सकते न? अंग्रेजों ने हमपर राज किया तो हम कैसे नाशुक्रे हो जाँय? :)

    ReplyDelete
  2. हम इच्छित सम्मान के सारे घट उड़ेल देते हैं।

    ReplyDelete
    Replies
    1. हां, दरअसल यही असल बात है। हम जैसी गुलामी करवाना चाहते हैं वही करते रहते हैं।

      Delete

भारत के नेतृत्व में ही पर्यावरण की चुनौती का समाधान खोजा जा सकता है

हर्ष   वर्धन   त्रिपाठी  @MediaHarshVT पर्यावरण की चुनौती से निपटने के लिए भारत को नेतृत्व देना होगा विकसित होने की क़ीमत सम्...