Wednesday, October 21, 2015

दलितों की आजादी और उनका विवेक

आजादी और विवेक के हक में ये प्रतिरोध सभा जिन्होंने कराई। उन सबका नाम साफ-साफ दिख रहा है। जिनको इन्होंने सिर्फ दिखावे के लिए शामिल किया। उनका नाम भी नहीं दिख रहा है। कमाल की बात ये भी है कि दलित लेखक मंच का कोई प्रतिनिधि भी यहां पर नहीं था। इतने ही ईमानदार हैं ये। दलितों की आजादी और विवेक के हक में बस इतना ही हैं ये।

कल आजादी और विवेक के हक में प्रेस क्लब में प्रतिरोध सभा थी। शुरुआत में ही प्रेस क्लब के सचिव नदीम ने साफ कह दिया कि मंच हमारा है। हम जैसे चाहेंगे, चलाएंगे। आप लोग सवाल पूछ सकते हैं। लेकिन, विचार नहीं रख सकते। सवाल भी भटके, तो हम आपको तशरीफ ले जाने के लिए कह देंगे। समझ रहे हैं ना ये आजादी और विवेक के हक में प्रतिरोध सभा थी।

अब हिंदुओं को सचमुच चिंतित होने की जरूरत है। क्योंकि, वो हिंदुओं की चिंता कर रहे हैं। भारतीयता की भी। इतने सालों तक उन्होंने मुसलमानों की चिंता की थी। क्या हाल किया मुसलमानों का। बताने की जरूरत है क्या। आज ये सब प्रेस क्लब में हिंदुओं और भारतीयता की चिंता करने जुटे थे।

ये कमाल है कि विरोधियों के लिए संघ,बीजेपी अब तक मुसलमान विरोधी था। बात नहीं बनी, तो अब वो संघ, बीजेपी को हिंदू, भारतीयता विरोधी कहने लगे हैं। कमाल है न कि अब वो हिंदू, भारतीय संस्कृति को बचाने की बात कर रहे हैं। #IntellecualHippocracy

No comments:

Post a Comment

भारत के नेतृत्व में ही पर्यावरण की चुनौती का समाधान खोजा जा सकता है

हर्ष   वर्धन   त्रिपाठी  @MediaHarshVT पर्यावरण की चुनौती से निपटने के लिए भारत को नेतृत्व देना होगा विकसित होने की क़ीमत सम्...