Monday, February 11, 2013

हम हादसे को हराना कब सीखेंगे ?


कुंभ में इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ ने कुंभ के सारे इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन, यहां सच यही है कि कुंभ क्षेत्र यानी गंगा की रेती पर बसा अस्थाई शहर पूरी तरह से इंतजाम से दुरुस्त था। असल गड़बड़ी रेलवे की है। और, इस एक गड़बड़ी ने दुनिया भर से इस नायाब मेले को देखने-समझने आए और इससे अभिभूत लोगों के सामने भारतीय सरकार की बदइंतजामी जाहिर कर दी। इसे बेहतर करने की जरूरत है। कम से कम इसी बहाने अगर रेलवे के देश में कम से कम एक दोहरे ट्रैक की जरूरत पूरी की जा सके। रेल बजट और बजट के महीने का भी संयोग बन रहा है।

2 comments:

  1. सरकार की ऐसी क्या विवशता थी की ऐसे संवेदनशील समय में जब
    की कुम्भ आयोजन में करोड़ों का जन समूह एकत्रित है गुरु को लटकाए
    जाने का समाचार प्रसारित किया, समय आगे-पीछे भी हो सकता था
    इस स्थिति में यदि कुम्भ मेले में कोई आतंकी घटना हो जाए तो मानव
    क्षति का आकलन सहज ही किया जा सकता है,
    सरकार अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं हेतु देश की
    जनता के जीवन से खेल रही है.....


    ReplyDelete
  2. सच लिखा है आपने,कल से मैं इस घटना को सुनकर बहुत ही दुखी हूँ.

    ReplyDelete

भारत के नेतृत्व में ही पर्यावरण की चुनौती का समाधान खोजा जा सकता है

हर्ष   वर्धन   त्रिपाठी  @MediaHarshVT पर्यावरण की चुनौती से निपटने के लिए भारत को नेतृत्व देना होगा विकसित होने की क़ीमत सम्...