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Saturday, August 15, 2009

सारे जहां से अच्छा ... वंदेमातरम

वंदेमातरम खूब सर्च हो रहा है। मेरे ब्लॉग पर ही हर रोज 2-4 लोग तो वंदेमातरम सर्च करते आ ही जा रहे हैं। मेरी पिछले 15 अगस्त को लिखी पोस्ट गूगल अंकल की कृपा से फिर ताजा हो गई है। साल भर बाद ठीक वैसे ही जैसे अपन लोगों में स्वाधीनता-आजादी-देश का स्वाभिमान ये सब हिलोरे मारने लगता है कुछ खास मौकों पर।


लेकिन, ये कमाल नहीं है कि हम अपनी आजादी का जश्न उससे जुड़ी खास तरह की गदगद अनुभूति रोज नहीं कर पाते। अब मैं ये क्यों कह रहा हूं। मुझे लगातार ये सवाल परेशान करता है। चीन हमारे 20-30 टुकड़े करने के सपने देख रहा है। लेकिन, फिर भी हम जब एक देश बनने की सोचते हैं चीन या अमेरिका हमें सबसे पहले याद आते हैं। हम अब भी गुलाम हैं इसका प्रमाण हम गाहे बगाहे देते हैं रहते हैं।



नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक दिन याद आ गई तो, लेख में मैंने ये भी लिखा दिया कि क्या वजह है कि आज भी हम जॉर्ज पंचम की शान में गाए गए गाने को अपना राष्ट्रगान माने बैठे हैं। वैसे इस पर बहुत विवाद है। लेकिन, जब विवाद खड़ा ही हुआ था तो, ये आखिर क्यों नहीं हो सका कि एक बार इसे ठीक से समझा समझाया जाता कि रवींद्र नाथ टैगोर ने भारत भाग्य विधाता किसे कहा है।

Tarique Rahman को बांग्लादेश की जनता ने बड़ा अवसर दिया है

 Harsh Vardhan Tripathi हर्ष वर्धन त्रिपाठी #Bangladesh में @trahmanbnp प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। @PMOIndia @narendramodi ने उन्हें बध...