मैंने अपनी पिछली दो पोस्टों में बेटियों का पैर छूने की परंपरा के गलत असर का उदाहरण देकर इसकी खिलाफत की थी। जिसके बाद इसके समर्थन में ज्यादातर लोग आए। लेकिन, कुछ लोगों ने इससे ये मतलब भी निकाल लिया कि मैं एकदम से ही पैर छूने के खिलाफ हूं।
मैं एकदम साफ कर दूं कि मुझे नहीं लगता कि अपने से बड़े को सम्मान देने के लिए उसका पैर छूने में कोई बुराई है। चाहे वो फिर मां-बाप हों, दूसरे रिश्तेदार या फिर कोई भी भले ही वो, ऐसे किसी रिश्ते में न आते हों जो, स्वाभाविक-सामाजिक तौर पर पैर छूने की जगह पाते हैं। और, मुझे संजय शर्माजी की एक बात तो एकदम सही लगती है कि आखिर छोटे-बड़े का कोई पैमाना तो होगा ही। और, ऐसे में छोटे, बड़े का पैर छुए, इसमें गलत क्या है। हां, कोई छोटा भी अगर ये समझता है कि किसी बड़े के लिए उसके मन में सम्मान नहीं है तो, फिर उसे अपने बड़े का भी पैर नहीं छूना चाहिए। भले ही उस पर दबाव पड़े।
और, टिप्पणियों में ही ये भी आया था कि अगर, बेटी का पैर छूना गलत है तो, कन्यादान भी। निश्चित तौर पर कन्यादान भी गलत है। पहले के जमाने की परिस्थितियों के लिहाज से बेहतर था कि बेटी जो, पति के घर जाने के बाद दरवाजे से भी बाहर नहीं निकलती थी। और, उसके पिता के घर से कभी-कभी ही उसकी हाल-खबर ली जाती थी। उस समय बेटी को सुरक्षा के लिहाज से शायद उसके पति के परिवार को ज्यादा सम्मान दिए जाने की परंपरा रही होगी। वो, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा दोनों ही रही होगी। लेकिन, आज के संदर्भ में तो ये बिल्कुल ही फिट नहीं बैठती। लेकिन, अब ये भी ठीक नहीं होगा कि इसे आधार बनाकर रिश्तों को सम्मान देना भी बंद कर दिया जाए।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Wednesday, August 13, 2008
Sunday, August 10, 2008
क्या आपके यहां बेटी का पैर छुआ जाता है
आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं। सामान्य तौर पर हो सकता है कि मां-बाप बेटी के पैर न छूते हों। लेकिन, याद करके बताइए शादी के समय जब पिता लड़की का कन्यादान करता है तो, क्या उसके बाद पिता, बेटी और दामाद का पांव पूजता है।
और, कितने लोगों के यहां ये और आगे जाता है। यानी शादी के बाद भी लड़की-दामाद का पैर छूते हैं। आप सभी लोगों से मैं जानना चाहता हूं कि आपके ये रस्म किस तरह से है। शादी की सबसे जरूरी रस्म कन्यादान के बाद पांव पूजने की रस्म होती है या नहीं। बताइएगा जरूर। क्योंकि, उसके बाद मैं अपनी अगली पोस्ट में इस पर और विस्तार से चर्चा करने वाला हूं।
और, कितने लोगों के यहां ये और आगे जाता है। यानी शादी के बाद भी लड़की-दामाद का पैर छूते हैं। आप सभी लोगों से मैं जानना चाहता हूं कि आपके ये रस्म किस तरह से है। शादी की सबसे जरूरी रस्म कन्यादान के बाद पांव पूजने की रस्म होती है या नहीं। बताइएगा जरूर। क्योंकि, उसके बाद मैं अपनी अगली पोस्ट में इस पर और विस्तार से चर्चा करने वाला हूं।
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