Friday, June 24, 2022

गियर बदलने के साथ बजता घुंघरू और उससे मिलता सुख

हर्ष वर्धन त्रिपाठी 



जीवन के सूत्र आपको यात्रा में आसानी से प्राप्त हो जाते हैं। विशेष प्रयत्न भी नहीं करना पड़ता है। ऐसे ही आज सुबह हमारे साथ हुआ। जाने कितनी पुस्तकें पढ़कर भी इसका सम्पूर्ण अनुभव मिलना मुश्किल ही है। आप क्या करते हैं, इससे नहीं, इससे तय होता है कि, आप कैसे करते हैं। सुबह-सुबह इन साहब ने हमें स्टेशन से घर छोड़ा।  टैक्सी चलते ही उन्होंने गाना लगा दिया, मैंने कहा- गाना अभी मत लगाइए। थोड़ी शांति ही ठीक है। उन्होंने बंद कर दिया, लेकिन बताया कि, सुबह-सुबह भजन लगा लेते हैं।फिर उन्होंने अपना मोबाइल हमें देकर कहाकि, आपको जहां जाना है, इसमें डाल दीजिए। OLA का मैप कई बार घुमा देता है। गूगल के नक्शे में मैंने अपनी सोसायटी का पता डालकर Mobile उन्हें पकड़ा दिया। अतिप्रसन्न होकर बोले, आपको सेक्टर 119 जाना है, मुझे भी वहीं जाना है। आपने टैक्सी नहीं बुक की होती तो मुझे ख़ाली ही जाना होता। बगल के गाँव पर्थला के रहने वाले थे। सुबह-सुबह उनके लिए इतना सुंदर संयोग बना था कि, घर लौटते उसी रास्ते के यात्री मिल गए तो हमारे लिए भी अद्भुत संयोग था कि, तुरंत टैक्सी मिल गई। इन सुंदर संयोगों के बीच हमारी दृष्टि में टैक्सी के भीतर का सुंदर वातावरण ध्यान में आया। टैक्सी भीतर से चमक रही थी। भगवान शंकर डैशबोर्ड पर विराजमान थे। उनका भगवा आसन चमक रहा था। टैक्सी गजब सुंदर सजा रखी थी। भोले के बड़े भक्त हैं। मस्त मगन हैं। जितनी बार गियर बदलते हैं, घुँघरू छनकता है क्योंकि उन्होंने गियर में घुँघरू बांध रखा है। सुख यही है। धन संपदा से #सुख नहीं मिलता। #Happiness #खुशी

1 comment:

  1. धन संपदा से भौतिक सुख तो मिल सकता है, परांतु आत्म सुख परमात्मा की शरण में ही संभव हे।

    ReplyDelete

वर्धा, नागपुर यात्रा और शोधार्थियों से भेंट

हर्ष वर्धन त्रिपाठी Harsh Vardhan Tripathi लंबे अंतराल के बाद इस बार की वर्धा यात्रा का सबसे बड़ा हासिल रहा , महात्मा गांधी अ...