Thursday, August 26, 2021

राजनीतिक तौर पर ‘दलदल’ में फँस रहे हैं उद्धव ठाकरे

हर्ष वर्धन त्रिपाठी



देश के राजनीतिक तापमान के मुक़ाबले महाराष्ट्र का राजनीति तापमान हमेशा कुछ डिग्री ऊपर ही रहता है। और, इस समय तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसी सरकार चल रही है, जिसकी कल्पना भी कभी किसी ने नहीं की थी। शिवसेना के साथ एनसीपी और कांग्रेस पार्टी भी सरकार चला रही हैं। शिवसेना प्रमुख स्वर्गीय बालासाहब ठाकरे कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी के प्रति सार्वजनिक तौर पर जिस तरह का विचार रखते थे, उसमें यह गठजोड़ होना असंभव था, लेकिन यूँ ही नहीं कहा जाता कि राजनीति में कुछ भी संभव है और यहाँ तो बालासाहब ठाकरे अब जीवित भी नहीं है जो कांग्रेस का हाथ पकड़कर सत्ता हथियाने पर उद्धव ठाकरे अपराध बोध के शिकार होते। शिवसेना सत्ता में है और सत्ता में रहते हुए भी अपनी शैली में ही है। यह अलग बात है कि इस बार की महाराष्ट्र की लड़ाई में शिवसेना के निशाने पर भाजपा के ही नेता-कार्यकर्ता हैं और अभी ताज़ा मामला तो असली बनाम नकली शिवसैनिक का हो गया है। नारायण राणे भले भारतीय जनता पार्टी से केंद्रीय मंत्री हैं और नारायण राणे की रणनीतिक तौर पर कितनी महत्वपूर्ण हैसियत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि में है, इसका अनुमान सिर्फ़ इसी बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताज़ा मंत्रिमंडल विस्तार में शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में नारायण तातू राणे सिर्फ़ सबसे ऊपर थे बल्कि राणे को एमएसएमई जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय भी दिया है और इस मंत्रालय का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन गड़करी जैसे क़द्दावर नेता से यह मंत्रालय लेकर राणे को दिया है। 

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की नई राजनीति में महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी के लिए नारायण राणे अतिमहत्वपूर्ण हो जाते हैं। और, इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे सिर्फ़ शिवसेना की और उद्धव ठाकरे की हर कमजोरी बहुत अच्छे से जानते हैं बल्कि उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना को उसी की भाषा में जवाब भी दे सकते हैं। और, नारायण राणे भी इस बात को बहुत अच्छे से जानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी में उनका बढ़ा हुआ महत्व तभी तक बढ़ा रह सकता है जब तक महाराष्ट्र में राणे परिवार राजनीतिक तौर पर ठाकरे परिवार को परेशानी में डालता रह सकता है। नारायण राणे और उनके बेटे नीतेश राणे ही थे, जिन्होंने खुलकर सुशांत सिंह राजपूत दिशा सालियान मामले को आदित्य ठाकरे से जोड़ने की कोशिश की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझते हैं कि महाराष्ट्र में राजनीतिक तौर पर शिवसेना और एनसीपी के गठजोड़ से लड़ने के लिए नारायण राणे जैसा व्यक्ति आवश्यक है। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी का मूल कैडर भी इधर आक्रामक हुआ है। पहली बार ऐसा हुआ कि शिवसेना कार्यालय पर कोई राजनीतिक पार्टी चढ़ाई कर दे और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता दादर के शिवसेना कार्यालय पर चढ़ाई कर देंगे, यह तो हाल-फिलहाल तक किसी की कल्पना में भी नहीं था। वैसे भी मुम्बई-ठाणे और पुणे के अलावा कुछ क्षेत्रों को छोड़कर शिवसेना का प्रभाव बहुत ज़्यादा नहीं है जबकि, भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता पूरे महाराष्ट्र में है। सदन से लेकर सड़क तक भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन शिवसेना और एनसीपी की आक्रामकता के आगे पूरे देश में यह संदेश जाता है कि भाजपा शिवसेना और एनसीपी के आगे कमजोर है। सरकार बनाने के लोभ में देवेंद्र फडणवीस जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर शरद पवार के हाथों अपमानित हुए, उससे यह संदेश और मज़बूत हुआ है। इस सबके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी क़ीमत पर नहीं चाहते थे कि शिवसेना का साथ भाजपा ने छोड़ा, यह संदेश जाए, लेकिन जब उद्घव ठाकरे और शिवसेना ने सत्ता हासिल करने के बाद तय कर लिया कि भारतीय जनता पार्टी के  नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार अपमानित करके ख़त्म करना है, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र भाजपा में रणनीतिक बदलाव का निर्णय ले लिया और, इसी निर्णय के तहत विधानसभा के भीतर देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में भाजपा आक्रामक रही, यहाँ तक कि पहली बार एक साथ भाजपा के 12 विधायकों को एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया। इस निलंबन के विरुद्ध भाजपा विधायक सर्वोच्च न्यायालय गए हैं। सदन में आक्रामकता के साथ सड़क पर भी शिवसेना को उसी की भाषा में जवाब देने निर्णय भाजपा ने लिया और इसके लिए नारायण राणे को काम पर लगाया गया। 

अप्रत्याशित घटनाक्रम नहीं हुआ तो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के पहले बृहन्मुम्बई महानगरपालिका का चुनाव होना है। भाजपा ने बीएमसी चुनावों के लिए बनी कोर कमेटी में नारायण राणे के बेटे नीतेश राणे को शामिल करके शिवसेना को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि इस बार शिवसेना को हर तरह से कड़ा मुक़ाबला मिलेगा। नीतेश राणे ने देवेंद्र फडणवीस, राज्य नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद देते ट्वीट किया था कि भाजपा की जीत तय है। वैसे तो इस तरह के दावे नेता करते ही रहते हैं, लेकिन बीएमसी में शिवसेना 97 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है तो भाजपा 82 पार्षदों के साथ उसके पीछे-पीछे ही है। कांग्रेस के 31 और एनसीपी के 9 पार्षद हैं। कांग्रेस और एनसीपी दोनों ही पार्टियाँ कह चुकी हैं कि बीएमसी का चुनाव अलग-अलग लड़ेंगे। ऐसे में थोड़ा सा दम लगाकर भारतीय जनता पार्टी शिवसेना में सबसे बड़ी पार्टी भी बन सकती है और बरसों से क़ाबिज़ शिवसेना को कुबेर के ख़ज़ाने बीएमसी की कुर्सी से बेदख़ल भी कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी के लिए सोने पर सुहागा होगा अगर सत्ता में रहते भी शिवसैनिक सड़कों पर उत्पात मचाते रहें। और, शिवसैनिक वही कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के केंद्र सरकार में शामिल मंत्री अपने-अपने क्षेत्र में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं। नारायण राणे भी उसी यात्रा के दौरान उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारता, वाले बयान पर पकड़े गए और फिर ज़मानत पर छोड़े गए। अब बांबे हाईकोर्ट के आदेश के बाद 17 सितंबर तक स्वतंत्र हैं। उन्होंने सत्यमेव जयते ट्वीट किया और कहांकि शुक्रवार से जन आशीर्वाद यात्रा दोबारा शुरू करेंगे और महाराष्ट्र को पश्चिम बंगाल नहीं बनने देंगे। हिंदुत्व वाली छवि से सेक्युलर खाँचे में जगह बनाने के लिए कसमसा रही शिवसेना के लिए यह तगड़ा झटका है कि, महाराष्ट्र की तुलना पश्चिम बंगाल से की जाए। शिवसेना और कांग्रेस के गठजोड़ पर भाजपा की आईटी सेल अकसर शिवसेना को सोनिया सेना साबित करने का कोई अवसर जाने नहीं देती है और ऐसे में उद्धव ठाकरे को ममता बनर्जी जैसा भी बताया जाना शिवसेना के समर्पित हिंदू मतदाता समूह को दूर कर सकता है। उद्धव ठाकरे और शिवसेना भी यह बात अच्छे से समझ रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी का मोह उन्हें सेक्युलर ख़ेमे में बने रहे के लिए मजबूर कर रहा है और यह सब उस राजनीतिक दलदल जैसा हो गया है, जिसमें शिवसेना लगातार धंसती जा रही है। थप्पड़ मारता है वाले राणे के बयान के जवाब में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चप्पल से मारने वाले ठाकरे के बयान पर उनकी भी गिरफ़्तारी की माँग तेज़ हो चली है। नीतेश राणे ने राजनीति में फ़िल्म मनोज बाजपेयी के डायलॉग वाला वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें मनोज बाजपेयी कहते हैं कि, करारा जवाब मिलेगा। देखिए करारा जवाब किसे मिलता है। गिरफ़्तारी के तुरंत बाद ज़मानत और गिरफ़्तारी पर फ़िलहाल रोक से उद्धव ठाकरे बनाम नारायण राणे की लड़ाई में पहला दौर नारायण राणे ने जीत लिया है। बढ़ी दाढ़ी और मूँछों में मोदी मंद-मंद मुस्कुरा रहे हैं। 

(यह लेख https://hindi.moneycontrol.com/news/politics/uddhav-thackeray-caught-in-political-quagmire-by-showing-displeasure-over-narayan-ranes-statement_279591.html पर छपा है)

1 comment:

  1. Totally true , Uddhav a burden for Indian politicians , he should be punished , our commercial capital has become worst by his done 🙄🙄🤨🤨😏😏

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