" राजनीति की समस्या यही है वोट बटोरने के लिए मायावती की मूर्तियां तोड़वाने और पार्क में अस्पताल खुलवाने का बयान जरूरी था। अब यही चुनाव के समय वोट बैंक की जरूरत सत्ता में आने के बाद अखिलेश की मुसीबत बन रही है। चलिए बनवाइए मूर्ति। देखिए कितने दिन संभाल पाते हैं। "
अखिलेश यादव से मिलकर लगा कि वो, सुलझे हुए नेता हैं। यूपी के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं। लेकिन, मुश्किल ये है कि समाजवादी पार्टी का नौजवान कार्यकर्ता जो, अखिलेश को नेता मानता है। वो, अखिलेश की अगुवाई तो, चाहता है लेकिन, राजनीति मुलायम की पहलवानी दिनों वाले अंदाज की पसंद कर रहा है। ऐसे ही एक नौजवान सपा कार्यकर्ता ने यूपी की नवनिर्माण सेना बना ली। मायावती की मूर्ति का सर, धड़ से अलग कर दिया। उस पर दुस्साहस देखिए कि वो, प्रेस कांफ्रेंस करके सारी मायावती की मूर्तियों को तोड़ने की अपील भी अखिलेश से कर रहा है। भला बस इतना हुआ कि अखिलेश का बयान मूर्ति तोड़ने की निंदा के साथ मायावती की उस मूर्ति को फिर से बनवाने का भी आया है। लेकिन, अखिलेश जी बड़ी कठिन है डगर यूपी की ...
अगर पिता की ही लकीर पर चलते रहे अखिलेश तो कैसे कुछ कर पायेंगे ?
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