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Monday, October 05, 2009

करीब 3 घंटे तो ‘अमितमय’ ही रह गए

बिग बॉस फिर आ गए हैं। और, इस बार तो सचमुच के बिग बॉस, बिग बॉस के शो में आए हैं। इसीलिए बिग बॉस, अरे वही जिनके घर में 13 लोग 84 दिन रुकेंगे, के पुराने सारे नियम कायदे-कानून टूट रहे हैं। 84 दिन पूरा होते-होते समझ में आएगा कि बिग बॉस सीजन 3 नहीं ... नहीं असली वाले बिग बॉस ने इसे बिग बॉस तृतीय कर दिया है।


बिग बॉस का कॉन्सेप्ट ही ऐसा है कि TRP तो, मिलेगी ही मिलेगी। लेकिन, बच्चन साहब ही इस बार शो की असली जान होंगे। एक राजू श्रीवास्तव को छोड़ दें तो, कोई भी बिग बॉस के घर का मेहमान नहीं है जो, TRP रखता हो। हॉ, ये जरूर है पिछली बार बिग बॉस का घर लोगों के पाप धुलने का जरिया बना था तो, इस बार वो, भूली दास्तां लो फिर याद आ गई वाले अंदाज के लोग बिग बॉस के घर में हैं।


घर के अंदर जाने वाले लोगों की बात फिर कभी। आज तो, बात सिर्फ बच्चन यानी असली बिग बॉस की। जो, भी शो में आ रहा था लटपटाकर बच्चन साहब के चरणों में गिरा पड़ रहा था किसी को उनकी गाड़ी का नंबर याद था तो, कोई दुनिया के सामने बच्चन साहब को टेनिस के मैच की याद दिला रहा था। अब ये जरा कम समझ में आया कि राखी सावंत की मां को उनकी मां के इलाज के लिए बच्चन साहब ने किस आधार पर और कैसे 2 लाख रुपए दे दिए थे।


वैसे तो, मैं खुद भी बच्चन साहब का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। जीती-जागती पूरी इंडस्ट्री हैं वो, अपने आप में। लेकिन, जिस तरह से जितने प्रतिभागी आए सबके पास अमिताभ बच्चन से जुड़े किस्से सुनाने को थे लगा, सबकुछ स्क्रिप्टेड है। देखिए इस बार का बिग बॉस क्या-क्या दिखाता है। वैसे आपको पायल रोहतगी और संभावना शेठ की कमी ज्यादा खलनी नहीं चाहिए पहले ही दिन जिस तरह से शर्लिन चोपड़ा ने प्रदर्शन किया उससे तय है कि TRP का सारा मसाला इस बार के बिग बॉस में भी है। वो, भी इंडस्ट्री के बिग बॉस बच्चन की मौजूदगी में। हर शुक्रवार वो घर के अंदर भी जाएंगे।

Sunday, August 24, 2008

गुंडे चढ़ गए हाथी पे, पत्थर रख लो छाती पे

सब अलटा-पलटी हो गया है। एक अमेरिका के साथ परमाणु करार की बात ने देश के सारे राजनैतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। दुनिया के दादा अमेरिका की खिलाफत के मुद्दे पर देश में कुछ लोगों को ये भ्रम हुआ कि इस मुद्दे से देश का दादा बना जा सकता है। उसमें बीजेपी के लौह पुरुष लालकृष्ण आडवाणी, अमर सिंह जैसे दलाल ! (ये अमर सिंह खुद स्वीकारते हैं कि ये काम वो सबसे बेहतर करते हैं और अब तो, बाकायदा सुर्खियां इसी से बनती हैं) से पटकनी खाए गुस्से से लाल करात और दलितों की मसीहा बहन मायावती सबसे आगे चल रहे थे।

देश का संवैधानिक दादा यानी प्रधानमंत्री बनने की इस इच्छा ने और कुछ किया हो या न किया हो। अलग-अलग राज्यों में बाहुबली सांसदों (असंवैधानिक दादाओं) का बड़ा भला कर दिया। और, इसमें मदद मिली अदालतों से। आप में से कितने लोगों को याद होगा कि अदालत से दोषी करार दिए गए लोगों को संसद-विधानसभा का चुनाव लड़ने से रोकने के लिए बात चल रही थी। लेकिन, जब देश में दादागिरी का मुकाबला चल रहा हो तो, भला छोटे-मोटे दादाओं के दुष्कर्म रोकने की चिंता भला किसे होती। बस यूपी-बिहार के दादा लोगों को जेल से सम्माननीय सांसद (लोकसभा में चुने जाने के बाद तो सम्माननीय ही हुए ना) की हैसियत से लोकसभा लाया गया।

और, इस अप्रत्याशित सम्मान से सबसे ज्यादा पलटी हुई है उत्तर प्रदेश में। मायावती जिन्हें मरवाना चाहती थीं (ऐसा भगोड़े अतीक अहमद ने पहली बार टीवी आने के बाद बोला था) अब वही अतीक अहमद हाथी पर सवार होकर लोकसभा में पिर पहुंचना चाहते हैं। जिससे कम से कम लोकतंत्र को बंधुआ बनाए रखकर उसके जरिए अपने दुष्कर्मों को जनता की इच्छा कहने का माद्दा बना रहे। मायावती के खासमखास मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दिकी इलाहाबाद की नैनी जेल में मिलकर अतीक के साथ इलाहाबाद और आसपास की लोकसभा सीटों को जीतने की योजना बना रहे हैं। यूपीए सरकार के खिलाफ वोट करने के बाद अतीक के सारे करीबीयों (इलाहाबाद के छंटे बदमाशों) पर मामले हल्के किए जा रहे हैं। मायावती जब सत्ता में आई तो, चिल्ला-चिल्लाकर सपा के जंगलराज और जंगलराज चलाने वाले बदमाशों के सफाए की बात कह रही थीं।

वैसे अब माहौल जरा बदल गया है। इसका अंदाजा सिर्फ दो नारों से लग जाता है--
यूपी विधानसभा चुनाव के समय बसपा कार्यकर्ता नारा लगाते थे---
चढ़कर गुंडों की छाती पे, मोहर लगेगी हाथी पे
जो, बसपा को नहीं चाहते थे वो, भी सपा को हराने के लिेए नारा लगाते थे ---
पत्थर रख लो छाती पे, मोहर लगाओ हाथी पे

और, उत्तर प्रदेश का नया नारा है ---
गुंडे चढ़ गए हाथी पे, पत्थर रख लो छाती पे


चलिए एक बार फिर से पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बदमाशों की एक लिस्ट देखते हैं-
अतीक अहमद (फूलपुर, इलाहाबाद), मुख्तार अंसारी (गाजीपुर अब मऊ से विधायक), रघुराज प्रताप सिंह (विधायक, कुंडा, प्रतापगढ़), धनंजय सिंह (विधायक, रारी, जौनपुर), हरिशंकर तिवारी (हारे विधायक, चिल्लूपार, गोरखपुर)। इन पांचों की हैसियत ये है कि निर्दल चुनाव जीतते हैं या जीतने का माद्दा रखते हैं। उत्तर प्रदेश में मायावती की सरकार आने से पहले ये मुलायम के खासमखास थे। मुख्तार पर भाजपा विधायक कृष्णानंद राय और अतीक अहमद पर बसपा विधायक राजू पाल की हत्या का आरोप है। मायावती ने सत्ता में आते ही सबसे पहले इन्हीं लोगों की नकेल कसी। लेकिन, अब ये दोनों हाथी की सवारी की तैयारी में हैं। मुख्तार को मऊ से बसपा टिकट मिल रहा है।

कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह अपने प्रताप से प्रतापगढ़ की सीट भी समाजवादी पार्टी को जिता चुके हैं। अब राजा के भी कस-बल ढीले पड़ रहे हैं। सुनते हैं कि वो, भी मायाजाल में फंसना चाहते हैं। तो, मऊ से विधायक मुख्तार अंसारी के भाई गाजीपुर से सपा सांसद हैं। मायाजाल में फंसने वालों की लिस्ट में नया नाम है जौनपुर की रारी विधानसभा से विधायक धनंजय सिंह का। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान धनंजय गुंडई में पारंगत हुए। अब संसद में पहुंचना चाहते हैं जो, अकेले के बूते का नहीं लगता। इसलिए मायावती से हाथी (चुनाव चिन्ह) मांग रहे हैं। जौनपुर, लोकसभा सीट के लिए हाथी मिलना पक्का भी हो गया है। धनंजय को बहनजी की ही सरकार ने 50 हजार रुपए का इनामी बदमाश बनाया था।

एक जमाने में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े बदमाश हरिशंकर तिवारी भी किनारे-किनारे से हाथी की सवारी कर रहे हैं। छोटा बेटा विनय शंकर भले ही पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे के हाथों हार गया। बड़ा बेटा भीष्म शंकर खलीलाबाद से, बसपा सांसद बन चुका है। अब बताइए मायावती गुंडों की बिग बॉस हुई या नहीं (दुर्भाग्य ये कि वो, देश के प्रधानमंत्री बनने की जबरदस्त दावेदार हैं)। दरअसल यही वो दीमक है जो, इस देश के लोकतंत्र को अंदर से काफी हद तक खोखला कर चुका है। देश का संवैधानिक दादा (प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री) बनने के लिए बड़े नेता जिस तरह के कुकर्म (जाने-अनजाने) कर गुजरते हैं। उसी पर खुद बाद में रोते भी रहते हैं। इन बदमाशों के पुनर्जीवन के लिए आखिर मायावती, लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी कितने जिम्मेदार हैं। क्या इसका जवाब कभी खोजा जाएगा। और, ये कहानी सिर्फ उत्तर प्रदेश की नहीं है, पूरे देश की है।

Saturday, August 23, 2008

बिग बॉस के घर में सबके पाप धुल जाएंगे

आखिरकार बिग बॉस के घर में देश के छंटे हुए लोगों का पहला हफ्ता बीत गया। बिग बॉस की नजर सब पर थी। इसलिए संजय निरुपम को ही जाना था और वो, बिग बॉस के घर से बाहर गए। मुझको तो वजह भी साफ दिखती है। बिग बॉस के घर में रहकर जितनी नौटंकी-कमीनापन और नंगई करनी है वो, संजय कर नहीं पा रहे थे। कम से कम परदे पर बिग बॉस की नजरों के सामने तो नहीं ही कर पा रहे थे (परदे के पीछे तो नेता सब करते ही हैं ये, तो जनता जानती है और मानती भी है)। और, संजय का काम भी हो चुका था-बिग बॉस का भी।

पहले बिग बॉस के काम की बात करें तो, वो ये कि देश में छोटे परदे पर सबसे ज्यादा लोग नई बिग बॉस (शिल्पा शेट्टी) को जानें। और, इससे परदे के पीछे के बॉसेज (प्रोडक्शन हाउस और कलर्स चैनल) को सबसे ज्यादा कमाई हो। वो, दोनों काम तो होने शुरू हो गए हैं। और, बिग बॉस के घर के बादशाह (कमीनतम व्यक्ति) का नाम सबके सामने आते-आते ये काम काफी हद तक पूरा हो चुका होगा।

अब बात संजय निरुपम के काम की। तो, दरअसल ये सिर्फ संजय निरुपम का ही काम नहीं है। बिग बॉस के घर पहुंचे सभी मेहमानों की आखिरी ख्वाहिश (जैसी फांसी पर लटकने से पहले किसी मुजरिम की होती है) पूरी होने जैसा है। बिग बॉस के चरित्रों को अगर ध्यान से देखिए तो, ये ज्यादातर लोग अपना कोई न कोई पाप धुलने के लिए बिग बॉस का चरण-चांपन करने पहुंचे हैं। जिनके पाप नहीं हैं वो, पापियों की जमात में बहती गंगा में हाथ धोने जैसा पहुंचे हैं।

कैसे, देखिए- चलिए संजय निरुपम से ही शुरू करते हैं। संजय पता नहीं कब से मुंबई में हैं (उनसे पूछना पड़ेगा) लेकिन, अभी भी बिहारी हैं (शिवसेना भी उनका इस्तेमाल मारपीट में ही करती रही, अब कांग्रेस में रहकर भी बस राज ठाकरे के खिलाफ मोर्चा निकालने का काम करके मीडिया में दिखते हैं)। तो, उनको अपनी इमेज इस मायानगरी मुंबई के लिहाज से कुछ फिच करवानी थी। उनको बाहर करने की वोटिंग में केतकी ने सबसे बड़ी वजह भी यही बताई कि वो, हम कलाकारों (मायावी) के बीच कंफ्यूज थे।

नेता के बाद बात नेतापुत्र की। बिग बॉस शुरू होने के पहले एक खबर मुंबई मिरर में छपी थी जिसकी शुरुआत कुछ इस तरह से थी कि अपने समय में प्रमोद महाजन भले ही किसी को भी बॉलीवुड स्टार या पॉलिटिक्स स्टार बनाने की हैसियत रखते हों। उनके बेटे राहुल महाजन को बिग बॉस अपने घर का मेहमान बनाने को तैयार नहीं हैं। बाद में राहुल के एक दोस्त के हवाले से ये खबर साफ हुई कि बड़ी मुश्किल से उन्हें बिग बॉस के घर में एंट्री मिली। पिता की दर्दनाक मौत के बाद गम भुलाने के लिए थोड़ा नशा पत्ती (हां, पांच सौ की पत्ती पर रखकर) ही तो किया था, पत्नी को इतना प्यार किया था तो, थोड़ा दो-चार हाथ नसे में जड़ दिए तो, जमाने ने बेचारे की पूरी इमेज ही बिगाड़ दी। अब इस सब पर सच्चाई जमाने को बताने के लिए और सब भुलाकर छवि साफ करने के लिए बिग बॉस के घर से बेहतर जगह कौन हो सकती थी। शिल्पा को राहुल cute लगता है।

एक और पापी (राम-राम बेचारी पाक साफ बच्ची के ऊपर किस-किस तरह के आरोप लगे)। देश के मोस्ट वॉन्टेड डॉन्स में से एक अबू सलेम से बेचारी ने प्रेम क्या किया। पूरे मीडिया समाज ने उसे और उसके मां-बाप को जिल्लत भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर कर दिया (ये सब मोनिका बेबी ने रो-रोकर खुद बिग बॉस के घर में बताया)। दिल की साफ-सच्चा मोनिका बेबी ने तो परदे पर ही लगे हाथ छवि सुधारने में मदद के लिए बिग बॉस का शुक्रिया भी अदा कर दिया। छत न होने का हवाला (हवाले से कुछ पैसे तो मिले ही होंगे) देकर संजय निरुपम से एक घर की हामी भी भरवा ली।

संजय निरुपम को पानी पी-पीकर गाली देने वाली संभावना शेठ। संजय निरुपम के करीब-करीब बेशर्म कह देने से नाराज संभावना ने बिग बॉस के घर के हर कैमरे पर एंगल से कहा- मैं नंगी होकर तो नहीं घूमती। भोजपुरी फिल्मों की ये आइटम गर्ल हर दूसरे मिनट परदे पर ठक ठिका ठक ठिका ठक ठिका ठा... की धुन पर भौंडे तरीके से कूल्हे और बदन मटकाने लगती है। इच्छा ये कि ये ठक ठिका उसे भोजपुरी से उठाकर हिंदी फिल्मों की आइटम गर्ल बना दे।

और, संभावना जिसके कंधे पर सर रखकर रो पाती है वो, राजा। वैसे, संभावना ने राजा चौधरी के कंधे पर रोते-रोते वो बता दिया जो, पेज 3 पत्रकारों के लिए आगे बड़ी चटपटी ब्रेकिंग न्यूज होने वाली है। राहुल महाजन अपनी प्रेमिका पायल के साथ शो में है। लेकिन, वो डॉन की माशूका का हाथ थामने का कोई मौका छोड़ नहीं रहा है। अरे, राजा चौधरी को भूल गए आप लोग। जिसने अपनी पत्नी श्वेता तिवारी को जमकर पीटा था- फिर जब पूरी मीडिया इकट्ठा हो गया तो, उसने कहाकि उसने पब्लिसिटी के लिए ये सब नौटंकी की थी। अब जब राजा चौधरी मीडिया का इतनी आसानी से इस्तेमाल करने में माहिर हैं तो, फिर बिग बॉस के घर में वो क्या-क्या गुल खिलाएंगे देखते रहिए।

एहसा...............न कुरैशी हर शब्द को लंबा खींच-खींचकर लोगों को हंसाते-हंसाते थक गए थे और शायद खुद भी पक गए थे। उनका दर्द ये कि किराने की दुकान वाला भी उनको सामान देने से पहले कहता है हंसाके दिखाओ तब राशन दूंगा।

MTV ROADIES जीतकर सहारनपुर का देसी-भदेस छोरा आशुतोष भी चर्चित हो गया है। MTV ROADIES वही- कमीनेपन में अपने साथ के लोगों को पीछे छोड़ने वाला मुकाबला। अब वो, बिग बॉस जीतकर शहरी लोगों पर देहाती कमीनेपन को साबित करने की होड़ मे जुट गया है। वैसे, राहुल महाजन और आशुतोष को ही बिग बॉस के घर के कमीनेपन के मुकाबले का बादशाह माना जा रहा है।

केतकी माताजी टाइप इमेज से बाहर निकलना चाहती हैं तो, देबोजीत के पास फिलहाल कोई दूसरा रियलिटी शो नहीं है और न ही कोई म्यूजिक टूर। तो, सोचा चलो बिग बॉस के घर में ही तानपूरे पर रियाज करेंगे। अकेला गायक होने से कोई मुकाबला भी नहीं है। और, लोगों को कोई जानता ही नहीं। इसलिए वो, परदे पर दिख रहे हैं यही बहुत है।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...