Wednesday, September 07, 2011

भारत में ये रुटीन है!


एक और धमाका। जगह वही दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर जहां 25 मई को कोई नहीं मरा था। अब कितने मरे, किस तरह से धमाका हुआ। सरकार की आपात बैठक। इस संगठन की चिट्ठी। अगले धमाके का इंतजार। बस ना कि और कुछ।

हां, जब धमाके न हों तो, बहस ये कर लें कि आतंकवादियों को भी फांसी देना क्या ठीक है। अब पूरा हो गया।

2 comments:

भारत के नेतृत्व में ही पर्यावरण की चुनौती का समाधान खोजा जा सकता है

हर्ष   वर्धन   त्रिपाठी  @MediaHarshVT पर्यावरण की चुनौती से निपटने के लिए भारत को नेतृत्व देना होगा विकसित होने की क़ीमत सम्...