कमाल की बेहूदगी है!

इंडिया गेट पर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक तस्वीर
कुछ लोग बेहूदगी की हद तक चले जाते हैं। अभी तक ये फेसबुक और सोशल साइट्स पर ही था। अब टीवी पर भी दिखने लगा। कुछ लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के इस आंदोलन को लोग सवर्णों का आंदोलन कह रहे हैं। कमाल है देश के हर बदलाव वाले मौके को दलित विरोधी करार दे दो। और, आरोप लगाते घूमो कि दलितों को मुख्यधारा में आने नहीं दिया जा रहा। दरअसल ऐसा करने वाले वो, लोग हैं जिनकी दुकान इसी भर से चल रही है।

‎4 दिनों से मैं इस आंदोलन की कवरेज कर रहा हूं। और, मेरा ये आंकलन है कि ये जेपी से बड़ा आंदोलन है। क्योंकि, वो पूरी तरह से राजनीतिक आंदोलन था। ये सामाजिक, पूरी तरह से जनता का आंदोलन है। आप बताइए