बालाजी भगवान के यहां पहुंचे बिगबी भगवान

बालाजी भगवान से मिलने खुद भगवान बिगबी आज तिरुपति गए। बालाजी भगवान का परिवार वहीं रहता है इसलिए बिगबी भगवान भी सपरिवार गए थे। बिगबी भगवान के घर एक नया सदस्य आया था। उन्हीं से मुलाकात कराने गए थे। ये भी वैसे देवी हैं बॉलीवुड की। इनको भी लोग पूजते हैं। और, बड़े भगवान के बेटे के साथ विवाह होने से बड़ी देवी भी बन गई हैं। लाल साड़ी में देवी बालाजी के दरबार से छोटे भगवान के साथ निकलीं तो, बाहर खड़े भक्त धन्य हो गए। ये उन भक्तों से खुशनसीब निकले जो पिछले एक हफ्ते से बड़े और छोटे भगवान के दोनों मंदिरों (प्रतीक्षा-जलसा) के सामने रात-रात, दिन-दिन भर लाइन लगाए खड़े थे। जब बड़े भगवान के मंदिर के सामने खड़े रहने पर भी भक्तों के लिए कपाट नहीं खुले( खुले भी तो, भगवान-भगवती काले शीशे की गाड़ी में थे) तो, ये भक्त देवी के मंदिर के सामने लग लिए। बांद्रा के उस मंदिर के सामने पहले भी भक्तों की भीड़ लगा करती थी। लेकिन, जब पता चला कि भगवती- बड़े भगवान की बहू बन गई हैं तो, ये कतार और लंबी हो गई । और, इसी के साथ बांद्रा में भगवती के मंदिर के अगल-बगल बने घरों के पहुंचने वाली गली और संकरी हो गई।

खैर हम ये कह रहे थे कि बिग बी भगवान , छोटी भगवती के आने के बाद भगवान बालाजी के दर्शन के लिए गए। बिगबी भगवान भगवती के आने के पहले न्यौता देने भी तिरुपति आए थे। तब 51 लाख रुपए का दक्षिणा भी बालाजी भगवान को दिया था। लेकिन, इस बार दक्षिणा नहीं दिया।बिगबी भगवान के साथ भगवती के आने के पहले बिगबी भगवान के मंदिर के सबसे बड़े पुजारी अमर सिंह के साथ छोटे पुजारी अनिल अंबानी भी थे। इस बार सिर्फ छोटे पुजारी अनिल अंबानी साथ थे।

खैर, बात हम कर रहे थे कि बिगबी भगवान के मंदिर (प्रतीक्षा) के बाहर भक्तों को दर्शन नहीं मिला। कुछ भक्त ऐसे भी थे जो, ये चाह रहे थे कि भगवान के कपाट खुलने के साथ पहली जो तस्वीर हो वो उन्हीं के द्वारा पूरे भक्त समाज को देखने को मिले। इसी चक्कर में जब छोटे भगवान , भगवती के साथ लौट रहे थे। तो, इन भक्तों ने अपने कैमरे में हिलोरें लेती आस्था के साथ भगवान और भगवती के दृश्य लेने की कोशिश की। और, जब ड्राइविंग सीट पर बड़े भगवान के साथ छोटे पुजारी को बैठे देखा तब तो , कपाट खुलने का इंतजार भी नहीं कर पाए। लेकिन, भगवान का घर था तो, पुजारियों के साथ कुछ मंदिर के रक्षक भी थे। और, बड़े भगवान तो रक्षक भी बलशाली। बस इन बलशाली रक्षकों ने उन अधमों को थोड़ा बहुत समझाने-बुझाने की कोशिश की। नहीं माने तो भगवान की मूक सहमति पर थोड़ा दंड दे दिया। ये वो अधम थे जो, कपाट खुलने के पहले ही भगवान की तस्वीरें भक्तों को बिना किसी प्रयास के पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। आखिर देवी-देवता के दर्शन के लिए भी तो पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है। लंबी-लंबी लाइन लगानी पड़ती है। फिर यहां बिना लाइन के टीवी पर तस्वीरें दिख जाएं ये शायद भगवान को भी मंजूर नहीं था।

खैर, भक्तों को भी भगवान से थोड़ा नाराज होने का हक तो होता ही है। टीवी वाले भक्त नाराज हुए और भगवान के मंदिर (प्रतीक्षा-जलसा) के बाहर की तस्वीरों के अलावा रक्षकों (ब्लैक कैट कमांडो) के द्वारा अधम (पत्रकार) खबरचियों के समझाने-बुझाने के दृश्य भी थोड़ी देर टीवी पर दिखाए। बिगबी भगवान के खिलाफ नारेबाजीऔर रक्षकों को किसी और मंदिर भेजने का दंड देने की मांग भी इसमें शामिल थी।
खैर, फिर से लौटते हैं वहीं जहां से शुरू हुए थे। बिगबी भगवान , भगवान बालाजी से मिलकर बाहर निकले और पूरे परिवार(बड़ी भगवती, छोटी भगवती, छोटे भगवान, छोटे पुजारी) के साथ भक्तों को आशीर्वाद दिया। और, उड़न खटोले में उड़कर मंदिर (प्रतीक्षा ) आ गए। शुक्र, इस बात का है कि थके भगवान को इस बार किसी नराधम भक्त ने परेशान करने की कोशिश नहीं की। और, बालाजी मंदिर के बाहर बिगबी भगवान के उदारमना व्यवहार से प्रसन्न (टीवी के नाराज पत्रकार) लोगों ने फिर से बिगबी भगवान के पुराने नए विजुअल मिलाकर देश भर के भक्तों को दर्शन के लिए लाइन में लगा दिया। ये पुराने-नए विजुअल बिगबी भगवान के परिवार के थे, बालाजी भगवान के परिवार के नहीं।