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Monday, January 14, 2013

महिला सशक्तिकरण, मकर संक्रांति, नौकरी


मां-बाप के साथ वो मजबूत लड़की
महिलाओं को घर के अंदर रहना चाहिए। लक्ष्मण रेखा नहीं लांघनी चाहिए। खाप जैसे तय करे वैसे चलें, तभी वो सुरक्षित हैं। मजबूत हैं। लेकिन, असल मजबूती महिलाओं की चाहिए तो, क्या करना चाहिए। वही महमूद ने जो, 70 के दशक में गा के कहा था। ना बीवी ना बच्चा ना बाप बड़ा ना भैया द होल थिंग इज दैट की भैया सबसे बड़ा रुपैया। ये था पुरुष सशक्तिकरण का फॉर्मूला। महिला सशक्तिकरण के लिए इस गाने में ना पति ना बच्चा ना बाप बड़ा ना भैया द होल थिंग इज दैट की भैया सबसे बड़ा रुपैया।

आज सुबह मकर संक्रांति पर घर से खिचड़ी खाकर निकला। पत्नी ने परंपरा के लिहाज से काली उड़द की दाल, चावल, घी और दक्षिणा के साथ निर्देश दिया कि इसे मंदिर में जाकर पंडितजी को दे दीजिए। अच्छा हुआ मैं चला गया। मंदिर में पंडित जी को खिचड़ी, दक्षिणा पकड़ाकर निकल रहा था कि एक लड़की व्हीलचेयर पर मंदिर की सीढ़ियों से भगवान को प्रणाम कर रही थी। लड़की के साथ उसके मां-बाप भी थे। एक दूसरी महिला आई। संवेदना जताते हुए कहा लड़की को काफी तकलीफ है और उसकी वजह से आप लोगों को भी। पोलियोग्रस्त लड़की की मां ने तुरंत पलटकर कड़ाई से जवाब देते हुए एक लाइन में कहा- कोई तकलीफ नहीं है, मेरी लड़की नौकरी करती है।

दरअसल यही है महिला सशक्तिकरण का एकमात्र फॉर्मूला। और, महिला क्या किसी को भी मजबूत बनाने का बस यही फॉर्मूला है।

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