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| मां-बाप के साथ वो मजबूत लड़की |
आज सुबह मकर संक्रांति पर घर से खिचड़ी खाकर निकला। पत्नी ने परंपरा के लिहाज से काली उड़द की दाल, चावल, घी और दक्षिणा के साथ निर्देश दिया कि इसे मंदिर में जाकर पंडितजी को दे दीजिए। अच्छा हुआ मैं चला गया। मंदिर में पंडित जी को खिचड़ी, दक्षिणा पकड़ाकर निकल रहा था कि एक लड़की व्हीलचेयर पर मंदिर की सीढ़ियों से भगवान को प्रणाम कर रही थी। लड़की के साथ उसके मां-बाप भी थे। एक दूसरी महिला आई। संवेदना जताते हुए कहा लड़की को काफी तकलीफ है और उसकी वजह से आप लोगों को भी। पोलियोग्रस्त लड़की की मां ने तुरंत पलटकर कड़ाई से जवाब देते हुए एक लाइन में कहा- कोई तकलीफ नहीं है, मेरी लड़की नौकरी करती है।
दरअसल यही है महिला सशक्तिकरण का एकमात्र फॉर्मूला। और, महिला क्या किसी को भी मजबूत बनाने का बस यही फॉर्मूला है।
