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Sunday, April 15, 2007

कब सिखाया जाए बच्चों के सेक्स के बारे में

1- सेक्स एजुकेशन से समाज में लोकतंत्र स्थापित होगा।
2- सेक्स एजुकेशन से एड्स जैसी यौन संबंधों से होने वाली बीमारियां कम होंगी।
3- सेक्स एजुकेशनछोटे बच्चों को मिलने से वो चाइल्ड अब्यूज से बच सकेंगे।

ऐसे ही कई और अच्छे लगने वाले तर्क हैं जो, सेक्स एजुकेशन की वकालत करने वाले आजकल थैली में लिए घूम रहे हैं कि कहीं कोई विरोधी मिले तो, उसके ऊपर उड़ेल दें। लेकिन, महाराष्ट्र की सरकार और विपक्ष के नेताओं के ऊपर इन तर्कों की कोई असर ही नहीं हुआ। और, वहां सेक्स एजुकेशन पर रोक लग गई। महाराष्ट्र के पीछे-पीछे कई और राज्य लग लिए और ‘एजुकेशन में सेक्स का डोज मिलाना’ इन राज्यों में बंद हो गया। इस पर रोक की शुरुआत मध्य प्रदेश सरकार ने की थी लेकिन, उस समय ये बड़ी बहस का मुद्दा नहीं बन पाया। बहसबाजों ने ये कहकर इसे एक झटके में खारिज कर दिया कि ये तो पुरातनपंथी सोच वाली बीजेपी सरकार की कारस्तानी है। लेकिन, जब देश के अकेले कॉस्मोपॉलिटन शहर मुंबई वाले राज्य महाराष्ट्र में इस पर रोक लगी तो, फिर कान खड़े होना स्वाभाविक था। सेक्स एजुकेशन के पक्ष में जो तर्क हैं वो मैंने शुरू में ही लिख दिया।

अब बात ये कि क्या ऊपर लिखी तीनों बातें सेक्स एजुकेशन से ठीक की जा सकती हैं। मुझे लगता है शायद थोड़ा बहुत। लेकिन, इसका बुरा असर (इस शब्द पर भी लोगों को ऐतराज हो सकता है) ज्यादा होता दिखता है।
सेक्स एजुकेशन से किस तरह लोकतंत्र स्थापित होगा ये बात तो किसी भी तरह से दिमाग की छन्नी के पार नहीं जाती। दूसरे तर्क में कुछ दम लगता है कि अगर बच्चों को सेक्स का पूरा ज्ञाम समय से मिल गया तो, वो यौन संबंध स्थापित करते समय अपनी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले से रखेंगे जिससे उन्हें एड्स या कोई यौन रोग न हो। लेकिन, ये बात कुछ अजीब नहीं लगती है कि यौन संबंधों के बारे में बच्चों को बताने की उम्र हमारे इन समझदार लोगों को पहली क्लास से ही लगने लगती है।

दलील ये भी दी जा रही है कि टीवी-मीडिया के दूसरे माध्यमों से बच्चों को इतना कुछ देखने को मिल रहा है कि सेक्स एजुकेशन से बच्चों को दूर रखना गलत होगा। तर्क य़े भी है कि पोर्न फिल्में - बाजार में-- खुलेआम इंटरनेट पर उपलब्ध हैं फिर बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने में हर्ज क्या है। इसी तर्क के बाद मेरा कड़ा एतराज शुरू होता है - क्या सेक्स एजुकेशन के नाम पर बच्चों को सेक्स परोसने- सेक्स करने की कला सिखाने की तैयारी हो रही है। क्या तैयारी इस बात की हो रही है कि पांच-छे साल के बच्चों को सेक्स एजुकेशन इस तरह दिया जाएगा कि दस-बारह साल का होते-होते उन्हें सेक्स कला की जरूरत पड़ जाए। और, वो यौन रोगों से सुरक्षित रहने के जरिए के बारे में बेहतर जान पाएं।

सेक्स एजुकेशन की वकालत करने वाले तर्क ये भी देते हैं कि समाज में जितना खुलापन होगा वो बेहतर है। क्या खुलापन सेक्स एजुकेशन से ही हो सकता है। लड़का-लड़की शारीरिक संरचना में अलग होते हैं इसलिए जरूरी है कि उन्हें एक दूसरे से व्यवहार के तरीके बताए जाएं। क्या अब तक बच्चों को इस बात का अहसास नहीं होता था। क्या वो परिवार के बीच बड़े होते-होते ये सब नहीं जान जाते थे। फिरउन्हें बचपन में ही बड़ा कर देने की क्या जरूरत है।

तथाकथित प्रगतिशील लोगों के पास एक और बड़ा तर्क ये आ गया है कि बच्चों को सेक्स एजुकेशन देने से उन्हें अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान हो सकेगी जिससे चाइल्ड अब्यूज के मामले रोके जा सकेंगे। अब इन नामसझ लोगों को कौन समझाए कि जिस उम्र के बच्चों के साथ कोई बड़ा गंदा व्यवहार करता है उस समय वो ऐसे स्पर्श को समझकर भी क्या कर पाएगा। और, मुझे लगता है कि यहां तो, सीखने की जरूरत बड़ों को है।

कुल मिलाकर सेक्स एजुकेशन पर हो रहे हो हल्ले की असली वजह में अगर जाएं तो, वो है सेक्स एजुकेशन को सेक्स आर्ट बनाने की कोशिश। मुझे नहीं लगता कि किसी को इस बात पर एतराज होगा कि बच्चों को ये सिखाया जाए कि सलीके से कैसे कपड़े पहनें कि शरीर को कोई अंग भद्दा न दिखे । शरीर विज्ञान की पूरी जानकारी तो हर किसी के लिए जरूरी है। बस उम्र के साथ जरूरी सेक्स ज्ञान हो तो ठीक। और, बच्चों को अभी भी बॉयोलॉजी विषय के जरिए नौवीं-दसवीं क्लास में सब कुछ समझाने की कोशिश बहुत पहले से ही है।

इसलिए, पहली क्लास से ही बच्चों को सेक्स की कला सिखाने की कोशिश करने वालों से मेरी गुजारिश है कि बच्चों को बचपन का पूरा मजा लेने के बाद ही बड़ा होने दीजिए। उन्हें सेक्स का विज्ञान सही उम्र के साथ ही सीखने दीजिए। इसके कुछ कुछ बेहतर तरीके हों तो वो सुझाएं। लेकिन, कृपा करके प्रगतिशील होने के चक्कर में बच्चों का बचपन बरबाद न करें। जानकारी के लिए ये भी बता दूं कि बच्चों को सेक्स सिखाने के इस अभियान का विरोध सिर्फ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकारें ही नहीं कर रहीं। केरल की वामपंथी सरकार को भी सेक्स एजुकेशान का ये तरीका समझ नहीं आ रहा।

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