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Saturday, February 14, 2015

जय हो भारतीय लोकतंत्र

कई बार मैं सोचता था कि एक साथ देश के सारे चुनाव हों। और 5 साल तक चुनावी चकल्लस से मुक्ति रहे। देश अच्छे से चले। लेकिन, अब मुझे ये लगता है कि देश अच्छे से चलने के लिए जरूरी है कि अलग-अलग समय पर अलग-अलग चुनाव होते ही रहें। अब मेरी ये धारणा धीरे-धीरे मजबूत हुई है कि लोकतंत्र की असल खूबसूरती ही यही है कि जनता को सबको ठीक रखने का अवसर मिलता रहे। और एक समय में जीते चुनाव की समीक्षा के लिए या फिर जीत हार के आनंद या दुःख के लिए 6 महीने का भी समय नहीं मिले। देखिए न भाजपाई बौराने लगे तो दिल्ली में साफ हो गए। लेकिन, जब दिल्ली के बहाने पूरे देश के सड़े-गले, राजनीति में अस्तित्व खोजने वाले भी मोदी लहर की समाप्ति का एलान कर बैठे तो असम के स्थानीय निकायों में कमल जबरदस्त तरीके से खिल गया। यही लोकतंत्र है। और खूबसूरत है। पूरे कार्यकाल के बीच में प्रतिनिधि वापस बुलाने के कानून की जरूरत ही नहीं। वैसे ही जनता सबका बल-मनोबल तोड़ती-जोड़ती रहती है और रहेगी। राजनीति में साबित करने का दबाव निरंतर बना रहना चाहिए।

 

Wednesday, August 06, 2014

दुखी राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आज लोकसभा में गजब किया। गजब इसलिए कि वो आज ऐसा जागे कि सीधे लोकसभा में अध्यक्ष के सामने की खाली जगह पर अपनी कुर्सी छोड़कर पहुंच गए। वो दुखी थे कि धर्म परिवर्तन पर बहस नहीं कराई जा रही है। इतने गुस्से और दुख में आम आदमी क्या करेगा। और आम आदमी क्या खास आदमी भी क्या करेगा। लोकतंत्र के चौथे खंभे की मदद लेगा। राहुल गांधी ने भी ली। और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर ढेर सारे आरोप लगा दिए। आरोप राहुल सुमित्रा महाजन पर लगा रहे थे लेकिन, उनके आरोप के निशाने पर नरेंद्र मोदी ही रहे।

राहुल गांधी आज दुखी हैं। गुस्से में हैं। कह रहे हैं कि इस देश में किसी की सुनी नहीं जा रही। सिर्फ एक आदमी की चल रही है। राहुल गांधी जब गुस्से में हैं, दुखी हैं तो मैं सुखी हूं, हंस रहा हूं। मजा आ रहा है कि लोकतंत्र को मजाक बना देने वाले परिवार का राजकुमार ऐसे दुखी है। दरअसल उसके मन की नहीं हो रही है। वरना तो वो प्रधानमंत्री के भी लिखे-पढ़े को फाड़ देता था। बेहूदा कह देता था। इस प्रधानमंत्री के सामने सचमुच कुछ चल नहीं रहा है। अब तो ये नौटंकी बंद करो राहुल गांधी। नरेंद्र मोदी तानाशाह होंगे तो देखा जाएगा। अभी तो एक परिवार की तानाशाही गई है। जनता उसके जश्न में हैं। हम भी।

Saturday, January 28, 2012

वाह रे भारतीय लोकतंत्र !

सर दर्द, बदन दर्द, सर्दी, जुकाम और ऐसे सारे दर्द के लिए क्रोसीन या ऐसी दूसरी टैबलेट (गोली) पर रोक लगाने की बातें हो रही हैं। देखिए कब तक 'वोट दर्द' के लिए राजनीतिक पार्टियों की ओर से दिए जा रहे टैबलेट (छोटा कंप्यूटर) पर प्रतिबंध लगता है। अन्ना बाबा देखो और समझो ! इस देश में चुनाव में भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है। न ही किसी पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट में, न किसी पार्टी के घोषणापत्र में और न ही वोटर के लिए वोट देते समय।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...