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Saturday, December 29, 2007

बीएसपी, बीजेपी की सरकारें बनाने में मदद कर रही है!

राष्ट्रीय राजनीति में मायावती की बड़ा बनने की इच्छा बीजेपी के खूब काम आ रही है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बुरी तरह से पटखनी देने वाली मायावती देश के दूसरे राज्यों में बीजेपी के लिए सत्ता का रास्ता आसान कर रही हैं। जबकि, केंद्र में भले ही मायावती कांग्रेस से बेहतर रिश्ते रखना चाहती हो। राज्यों में बहनजी की बसपा कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रही है।

गुजरात के बाद हिमाचल की सत्ता भी सीधे-सीधे (पूर्ण बहुमत के साथ) भारतीय जनता पार्टी को मिल गई है। गुजरात में जहां मोदी सत्ता में थे लेकिन, मोदी के विकास कार्यों के साथ हिंदुत्व का एजेंडे की अच्छी पैकेजिंग असली वजह रही। वहीं, हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में थी और उसके कुशासन की वजह से देवभूमि की जनता ने दुबारा वीरभद्र पर भरोसा करना ठीक नहीं समझा। और, उन्हें पहाड़ की चोटी से उठाकर नीचे पटक दिया।

दोनों राज्यों में चुनाव परिणामों की ये तो सीधी और बड़ी वजहें थीं। लेकिन, एक दूसरी वजह भी थी जो, दायें-बायें से भाजपा के पक्ष में काम कर गई। वो, वजह थी मायावती का राष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडा। उत्तर प्रदेश में स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में आई मायावती को लगा कि जब वो राष्ट्रीय पार्टियों के आजमाए गणित से देश के सबसे बड़े राज्य में सत्ता में आ सकती हैं। तो, दूसरे राज्यों में इसका कुछ असर तो होगा ही। मायावती की सोच सही भी थी।

मायावती की बसपा ने पहली बार हिमाचल प्रदेश में अपना खाता खोला है। बसपा को सीट भले ही एक ही मिली हो। लेकिन, राज्य में उसे 7.3 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि, 2003 में उसे सिर्फ 0.7 प्रतिशत ही वोट मिले थे। यानी पिछले चुनाव से दस गुना से भी ज्यादा मतदाता बसपा के पक्ष में चले गए हैं। और, बसपा के वोटों में दस गुना से भी ज्यादा वोटों की बढ़त की वजह से भी भाजपा 41 सीटों और 43.8 प्रतिशत वोटों के साथ कांग्रेस से बहुत आगे निकल गई है। कांग्रेस को 38.9 प्रतिशत वोटों के साथ सिर्फ 23 सीटें ही मिली हैं।

गुजरात में भाजपा की जीत इतनी बड़ी थी कि उसमें मायावती की पार्टी को मिले वोट बहुत मायने नहीं रखते। लेकिन, मायावती को जो वोट मिले हैं वो, आगे की राजनीति की राह दिखा रहे हैं। गुजरात की अठारह विधानसभा ऐसी थीं जिसमें भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर चार हजार से कम था। इसमें से पांच विधानसभा ऐसी हैं जिसमें बसपा को मिले वोट अगर कांग्रेस के पास होते तो, वो जीत सकती थी। जबकि, चार और सीटों पर उसने कांग्रेस के वोटबैंक में अच्छी सेंध लगाई।

इस साल हुए छे राज्यों के चुनाव में भाजपा को चार राज्यों में सत्ता मिली है। हिमाचल प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड में भाजपा ने अकेले सरकार बनाई है जबकि, पंजाब में वो अकाली की साझीदार है। कांग्रेस सिर्फ गोवा की सत्ता हासिल कर पाई और बसपा को उत्तर प्रदेश में पहली बार पांच साल शासन करने का मौका मिला है।

2008 में होने वाले चुनावों को देखें तो, दिल्ली में कांग्रेस की सरकार दो बार से चुनकर आ रही है। सत्ता विरोधी वोट तो कांग्रेस के लिए मुश्किल बनेंगे ही। बसपा भी यहां कांग्रेस के लि मुश्किल खड़ी करेगी। दिल्ली नगर निगम में बसपा के 17 सभासद हैं। मध्य प्रदेश बसपा, भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। शिवराज के नेतृत्व से लोग खुश नहीं हैं और शिवराज सिंह चौहान, मोदी या फिर उमा भारती जैसे अपील वाले नेता भी नहीं हैं। वैसे, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव भी अगले साल ही होने हैं। और, दोनों ही राज्यों में भाजपा के लिए सरकार बनाना बड़ी चुनौती होगी।

गुजरात चुनावों में भारी जीत और हिमाचल में मिली सत्ता के बाद भले ही लाल कृष्ण आडवाणी और दूसरे भाजपा नेता दहाड़ने लगे हों कि ये दोनों जीत 2009 के लोकसभा के चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी के संकेत हैं। ये इतना आसान भी नहीं दिखता। क्योंकि, पंजाब और उत्तराखंड में मिली जीत के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा को मात खानी पड़ गई थी।

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