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Monday, September 22, 2014

डॉक्टर हर्षवर्धन त्रिपाठी!

ये एतिहासिक शोध मैंने पूरा किया है। इसे मैं नए माध्यम यानी कि ब्लॉग पर पेश कर रहा हूं। मेरे शोध का विषय रहा- बीमारी की हद तक वामपंथ से ग्रसित व्यक्ति स्वस्थ होने की हद तक दक्षिणपंथी कैसे बन सकता है। इस शोध का परिणाम भी एक ही लाइन का है। परिणाम है देश में दक्षिणपंथी विचारधारा वाली सरकार का होना। अब इस शानदार शोध के लिए मुझे डॉक्टरेट मिले ना मिले। वैसे तो राह चलते कई विश्वविद्यालय बुलाकर बड़े लोगों को बिना शोध ही डॉक्टरेट की उपाधि दे देते हैं। बड़ा आदमी न होने से इतना महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत करने के बाद भी शायद ही कोई विश्वविद्यालय अदालतों की तरह स्वत: संज्ञान ले। बीमारी से ग्रसित ढेर सारे वामपंथियों के स्वस्थ दक्षिणपंथी में बदलने की कुछ कहानियां भी मैं यहां लिख सकता हूं। लेकिन, इसकी कोई जरूरत नहीं है। अपने आसपास के बीमारी की हद तक वाले वामपंथी पर नजर रखिए। खुद सब साफ हो जाएगा।

(नोट- मैं तो आलसी, अगंभीर किस्म का शोधार्थी हूं। इसलिए ऐसे ही इतना महत्वपूर्ण शोध कर लिया। लेकिन, कोई गंभीर, सक्रिय, कामकाजी शोधार्थी चाहें तो सचमुच इस विषय पर शोध कर सकते हैं। और पक्का उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल सकती है।)

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