भारत एक कृषि प्रधान देश है। तो, इसमें नया क्या है। नया ये है कि देश में पहली बार किसी किसान को भी पद्मश्री के लायक समझा गया है। उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद के हाजी कलीमउल्ला को ये सम्मान मिला है। बड़े-बड़े नेता, पत्रकारों, व्यापारियों के बीच में पद्मश्री पाने वालों की लंबी सूची में कलीमउल्ला कहीं बहुत नीचे दब गए। लेकिन, सुखद ये रहा कि कई अखबारों में कलीम उल्ला को खासी तवज्जो मिली। कलीम आम के सिर्फ एक पेड़ पर आम की 300 किस्में उगा चुके हैं। बरसों का कलीम का खुद का ही शोध है। अमर उजाला के संपादकीय पृष्ठ पर अमर उजाला कानपुर के स्थानीय संपादक प्रताप सोमवंशी ने कलीम उल्ला की काबिलियत को जगजाहिर करने वाला एक लेख लिखा है। प्रतापजी के साथ मैंने इलाहाबाद से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। काम करना सीखा था। मैं उस संपादकीय का लिंक दे रहा हूं। कलीम की काबिलियत की पूरी जानकारी के लिए ये लेख पढ़ें
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Thursday, February 07, 2008
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