थर्ड डिग्री की राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पढ़ाई की विवाद गजब चर्चा का विषय है। चर्चा का विषय बना भी इसीलिए है कि आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई करके भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी से मैगसायसाय सम्मान विजेता और फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री बने अरविंद केजरीवाल नरेंद्र मोदी की पढ़ाई पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। वो भी सवाल इस कदर खड़ा कर रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरे पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री की डिग्री की पड़ताल में ही जैसे लगे हुए हों। संयोगवश बहुधा पत्रकारिता से राजनीति में गए लोग अरविंद केजरीवाल के इर्द गिर्द पार्टी में प्रभावी भूमिका में हैं। इसलिए शायद कुछ ज्यादा खोजी अंदाज में पार्टी आ गई है। निजी हमले करने में न तो नरेंद्र मोदी ने कभी कोई कमी छोड़ी है और न ही अरविंद केजरीवाल ने। लेकिन, अब तक निजी हमलों में वजहें सार्वजनिक जैसी होती रही हैं। अगस्ता वेस्टलैंड मामले में रिश्वत ली गई। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर हो रहा हमला भले निजी लग रहा हो। लेकिन, उसकी भी वजह सार्वजनिक है। क्योंकि, देश का एक रक्षा सौदा होता है जिसमें रिश्वत लेने के आरोप लग रहे हैं। लेकिन, ये पहले बार है कि जब देश के प्रधानमंत्री पर निजी हमले में वजह भी निजी है। वो भी एक ऐसी वजह जिस पर जाने कितनी चर्चा हो चुकी है कि व्यक्ति की डिग्री नहीं उसका किया हुआ काम मायने रखता है। लेकिन, शायद हम लोग ज्यादा बौद्धिक धरातल पर इस तरह की बातें करते हैं। अरविंद केजरीवाल आम आदमी के नाम पर बनी राजनीति करते हैं। इसीलिए आम आदमी की तरह ज्यादा निजी हमले ही करना पसंद करते हैं। लेकिन, सवाल ये है कि क्या प्रधानमंत्री की डिग्री के मामले में अरविंद केजरीवाल राजनीति की थर्ड डिग्री तक चले गए हैं।

दरअसल नरेंद्र मोदी का जिस तरह से भारतीय राजनीति में उत्थान हुआ है। उसमें उनके ज्यादातक दुश्मन ही हैं। दोस्त नहीं हैं। या यूं कह लें कि दिल्ली की गद्दी तक पहुंचने के लिए दुश्मन बढ़ाने के सिवाय मोदी के पास कोई रास्ता ही नहीं था। यही वजह है कि आज जब अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी पार्टी सिर्फ नरेंद्र मोदी की डिग्री पर टूट पड़ी है, तो सबकुछ जानते हुए कांग्रेस की तरफ से भी सिर्फ उस मुद्दे को बनाए रखने की कोशिश हो रही है। इससे बेहतर समय भी क्यो होगा कि जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सपरिवार सहित लोकतंत्र बचाओ मार्च करने को मजबूर हो चली हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री पर ही दिल्ली का मुख्यमंत्री सवाल खड़ा कर दे रहा हो। और उस डिग्री पर एक टिप्पणी आती है कि फर्जी डिग्री भी थर्ड डिग्री की। अब प्रधानमंत्री की डिग्री के असल होने की बात तो दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय से सामने आ चुकी है। और कौन सा नेता किस डिग्री में पास हुआ है। ये चर्चा अगर हो रही है और इसे करने वाले मुख्यमंत्री या दूसरे बड़े नेता लोग हैं। तो इसका इतना मतलब जरूर निकलता है कि देश की राजनीति थर्ड डिग्री में चली गई है। अच्छी बात है कि लगातार अरविंद केजरीवाल की प्रोपोगैंडा पॉलिटिक्स को देश में बदलाव की निगाह से देखने वाले मीडिया अरविंद के समर्थन में होता है। लेकिन, इस बार मीडिया भी स्क्रूटनी कर रहा है। और साफ दिख रहा है कि आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में इस गैरजरूरी मुद्दे को लेकर राजनीतिक नंबर बढ़ाने में किस कदर लगी है। अरविंद पर भरोसा करने वाली जमात भी अंधभक्त जैसी ही है। इसलिए वो ये मानने को तैयार नहीं है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय की डिग्री असली है। डिग्री में नरेंद्र दामोदरदास मोदी के नाम और डिग्री मिलने की तिथि को लेकर संदेह खड़े किए जा रहे हैं। इस पर दोनों तरफ से काफी कुछ कहा, बताया जा चुका है। लेकिन, मुझे लगता है कि इन सारे तथ्यों से बड़ा तथ्य है कांग्रेस के अब के बड़े नेता और पूर्व में पत्रकार रहे राजीव शुक्ला का अपने कार्यक्रम रूबरू के लिए किया गया नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार। नरेंद्र मोदी उस समय अशोक रोड के भाजपा कार्यालय के बगल के अरुण जेटली के घर में रहते थे। नरेंद्र मोदी उस समय राष्ट्रीय महासचिव थे। नब्बे के आखिर में मई 1998 में नरेंद्र मोदी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए। महासचिव रहने के दौरान ही राजीव शुक्ला ने नरेंद्र मोदी का वो साक्षात्कार लिया। जिसमें उन्होंने ये साफ कहा था कि हाईस्कूल तक की ही पढ़ाई वो कर सके थे। उसके बाद उन्होंने एक्सटर्नल एग्जाम देकर अपनी एमए तक की पढ़ाई पूरी की। उस साक्षात्कार का जरूरी हिस्सा-

राजीव शुक्ला - मोदी जी कहा जाता है कि आप बड़ा कंप्यूटर सेवी है। आपको कंप्यूटर पर काम करना, इटरनेट पर काम करना, अपनी वेबसाइट बनाना इन सबका बड़ा शौक है और बीजेपी में बहुत कम लोग हैं जो इस तरह से टेक्नोलॉजी का शौक रखते हैं।

नरेंद्र मोदी - पहली बात तो मैं कोई पढ़ा लिखा व्यकित नहीं हूं लेकिन, परमात्मा की कृपा है कि और उशके कारण शायद मुझे नई-नई चीजें जानने का बड़ा शौक रहा है
राजीव शुक्ला - कितना पढ़े हैं आप
नरेंद्र मोदी - वैसे तो मैंने 17 साल की आयु में घर छोड़ दिया स्कूली शिक्षा के बाद मैं घर से निकल गया। तब से लेकर आजतक मैं भटक रहा हूं। नई चीजें पाने के लिए
राजीव शुक्ला - सिर्फ स्कूल तक पढ़े हैं आप मतलब प्राइमरी स्कूल तक
नरेंद्र मोदी - हाईस्कूल तक बाद में हमारे संघ के एक बड़े अधिकारी थे उनके बड़े आग्रह पर एक्सटर्नल एग्जाम देना शुरू किया। फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैंने बीए कर लिया एक्सटर्नल एग्जाम देकर। फिर भी उनका बहुत आग्रह रहा तो एमए कर लिया एक्सटर्नल एग्जाम देकर। मैंने कभी कॉलेज का दरवाजा देखा नहीं।
जब ये सॉफ्टवेयर मेरे सामने आया तो मैं उसका पोटेंशियल समझ गया। कंप्यूटर, इंटरनेट, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फिर तो मेरा मन उसमें इतना लग गया।
मैं हॉर्सराइडिंग करता हूं, ट्रैकिंग करता हूं
एवरेस्ट की हाइट है 29000 फीट तेईस हजार फीट तक मै हो आया हूं। मैं कैलाश मानसरोवर पैदल करके आया हूं
मैंने किताबें लिखी हैं। 6 किताबें मेरी प्रसिद्ध हो चुकी हैं। 3-4 किताबों का मैटेरियल वैसे का वैसा है।

राजीव शुक्ला - जितने भी बीजेपी के पदाधिकारी हैं। सबसे ज्यादा टिपटॉप, स्मार्ट, कपड़ों से, चश्मे से, पेन से, वेशभूषा से आप ही रहते हैं।

नरेंद्र मोदी - सबसे रहता हूं, ऐसी बात है तो मुझे अच्छा लगेगा लेकिन, मैं रहना चाहता जरूर हूं।


उस समय के ही साक्षात्कार में नरेंद्र मोदी ने बड़ी बेबाकी से अपनी शुरुआती कम शिक्षा को स्वीकार किया था। लेकिन, ये भी बताया कि कैसे उन्होंने अपने एमए तक की पढ़ाई पूरी की। ये दुर्भाग्य है कि थर्ड डिग्री की हो चली राजनीति के इस दौर में कोई भी न्यूज चैनल सीधे राजीव शुक्ला से ही ये सवाल क्यों नहीं पूछता है। या शायद अब राजीव शुक्ला भी क्यों सामने आना चाहेंगे। जब इस समय प्रधानमंत्री की डिग्री पर खड़े हो रहे सवालों के कोलाहल में अगस्ता वेस्टलैंड के घोटाले का शोर धीमा हो चला हो। प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवालों का जवाब भारतीय जनता पार्टी दे रही है और देगी। लेकिन, इतना तो तय है कि इस तरह के निजी सवालों के उलझन में फंसी भारतीय राजनीति बमुश्किल ही थर्ड डिग्री से पास होती दिख रही है।