Sunday, September 18, 2016

मम्मी-पापा, उसकी गाड़ी हमारी गाड़ी से बड़ी क्यों है?

तस्वीर-JEEP
कार, एसयूवी खरीदने की इच्छा रखने वाले भारतीयों के लिए अगले दस हफ्ते बेहद रोमांचित करने वाले हैं। भारतीयों के लिए दो दर्जन से ज्यादा नई कारें, एसयूवी आ रही हैं। दरअसल नए वाले भारत में कारों की बिक्री के लिहाज से तो लगातार अच्छे दिन दिख रहे हैं। और उसमें भी बड़ी कार कंपनियों के अच्छे दिन तो और भी अच्छे हुए हैं। निसान, ह्युंदई, होंडा, टोयोटा, टाटा, फॉक्सवैगन, जैगुआर और दूसरी ढेर सारी कंपनियां 10 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक की गाड़ियां भारतीय बाजार में लाने के लिए तैयार हैं। इससे पहले मशहूर अमेरिकी जीप भारत में आ गई। ये असली जीप है। अभी तक आम भारतीय की नजर में जीप का मतलब महिंद्रा की जीप होती थी। लेकिन, ये जो नया भारत तैयार हुआ है। आई लव माई इंडिया वाला। इस इंडिया को असली जीप का बेसब्री से इंतजार था। आखिरकार वो इंतजार खत्म हुआ। लेकिन, जीप अभी जिस कीमत के साथ आई है। उसकी वजह से असली जीप का इंतजार करने वाले भारतीयों का उत्साह थोड़ा को हुआ है। 75 लाख की शुरुआती कीमत के साथ जीप खरीदने के दीवाने कम ही है। लेकिन, कंपनी को भारत में बड़ा बाजार नजर आ रहा है। और इस बाजार को पकड़ने के लिए अहमदाबाद में पहले शोरूम के साथ देश में 10 शोरूम खोलने पर कंपनी काम कर रही है। नए लॉन्च के भरोसे की सबसे बड़ी वजह ये है कि दरअसल इस नए वाले भारत को बड़ी गाड़ी पसंद है। समझते हैं कि वो और कौन सी वजहें हैं जिससे इंडिया बड़ी गाड़ी पर चढ़ने को बेताब है।

कॉम्पैक्ट एसयूवी मतलब शान का सवारी
इस समय अगर आप मारुति की विटारा ब्रीजा लेने का मन बना रहे हों, तो पहले शोरूम पर जाकर पता कर लीजिए। क्योंकि, 3 महीने से पहले आपको ये सस्ती वाली एसयूवी नहीं मिलने वाली। इसकी एक वजह ये है कि मारुति के उत्पादन पर असर पड़ा है। लेकिन, ज्यादा बड़ी वजह ये है कि इसे खरीदने वालों की कतार बहुत लंबी है। और ये कतार सिर्फ ब्रीजा पर नहीं है। इस सबसे ज्यादा बिकने वाली कॉम्पैक्ट एसयूवी ह्युंदई क्रेटा लॉन्च के बाद से 1 लाख से ज्यादा बिक चुकी है। सितंबर 2015 से जुलाई 2016 के आंकड़े बता रहे हैं कि औसत 7000 क्रेटा हर महीने बिक रही है। क्रेटा की कीमत दस लाख के ऊपर शुरू होती है। सिर्फ क्रेटा ही नहीं, ज्यादातर कॉम्पैक्ट एसयूवी ही बिक रही है। रेनो कंपनी की पूरी साख ही डस्टर ने बचा रखी है।


भारतीयों की जेब में पैसा बोल रहा है
हर भारतीय की औसत आमदनी पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब 7.5% बढ़ गई है। 2014-15 में 86,879 से 2015-16 में 93,293 रुपये हो गई है। ये हर भारतीय की औसत आमदनी के बढ़ने का आंकड़ा है। लेकिन, वो मध्यम वर्ग को जो बड़ी कारों और एसयूवी का दीवाना हुआ जाता है, उसकी आदमनी बढ़ने की रफ्तार बहुत तेज रही है।

सस्ती ब्याज दरें
पिछले दो साल में घर कर्ज और कार कर्ज पर ब्याज दरें 1.5-2% तक घटी हैं। और इसका सीधा फायदा कार कंपनियों को हो रहा है।

देश में अच्छी सड़कों का जाल
नरेंद्र मोदी की सरकार के सबसे बेहतर काम करने वाले मंत्रियों का जिक्र होता है, तो नितिन गडकरी का चुनौती देने वाला अंदाज सबसे पहले दिख जाता है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अपने लगभग हर कार्यक्रम में ये बताना नहीं भूलते कि कैसे उन्होंने प्रतिदिन सड़कों का निर्माण यूपीए के आखिरी साल के 4-5 किलोमीटर से बढ़ाकर 22 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंचा दिया है। इसकी वजह से सड़क परिवहन कई गुना बढ़ा है।

घुमंतू होता भारतीय
रेलवे ने अभी अपनी प्रीमियम ट्रेनों में किराया फ्लेक्सी सर्ज प्राइसिंग के आधार पर तय कर दिया है। और खबरें ये हैं कि इसके बाद भी आरक्षण कराने वाले बढ़े ही हैं। इसके बाद भी तय समय पर टिकट मिलना मुश्किल होता है। यही वजह है कि नया मध्यवर्ग अपनी गाड़ी उठाकर घूमने निकल लेने के अंदाज में आ गया है। इसीलिए छोटी गाड़ियों की बजाय ज्यादा जगह वाली बड़ी कार या एसयूवी शहरी भारतीय को ज्यादा पसंद आ रही है।

टीवी से बच्चों के दिमाग में घुसी CAAAAAR
टेलीविजन ने जैसे हम भारतीयों के रहने-खाने-कपड़े पहनने का तरीका बदल दिया है। वैसे ही अब हमारी कार प्रैक्टिस को भी वो बदल रहा है। और गाड़ी खरीदने के फैसले में बच्चों का मासूम सवाल, मम्मी-पापा, हमारी कार उसकी कार से बड़ी क्यों नहीं है?, काफी अहम भूमिका निभा रहा है।

अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन

कुल मिलाकर मोदी सरकार के राज में धीरे-धीरे ही सही लेकिन, अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन आते दिख रहे हैं। दुनिया भर की एजेंसियां भारत को दुनिया के अंधेरे में रोशनी की किरण बता रही हैं। इसी भरोसे भारतीय बचाए पैसे को खर्च करने का साहस जुटा पा रहा है। दरअसल ये भरोसा जगा है कि बचाया खर्च करने से मुश्किल नहीं होगी। क्योंकि, आगे इससे भी ज्यादा कमाने की उम्मीद बनी हुई है।  
(ये लेख QUINTHINDI पर छपा है।)

Thursday, September 15, 2016

छोटे किसानों का बड़ा भला कर सकता है GST

GST को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है। करों में पारदर्शिता से कर घटने और ज्यादा कर वसूली का भी अनुमान है। लेकिन, एक बड़ा खतरा बार-बार बताया जा रहा है कि इससे महंगाई शुरुआती दौर में बढ़ सकती है और उससे भी बड़ी खतरनाक स्थिति ये बताई जा रही है कि इससे किसानों की मुश्किल बढ़ सकती है। उसके पीछे भारतीय किसान संघ तर्क दे रहा है कि किसान को हर तरफ से घाटा होगा। क्योंकि, किसान अपनी उपज के लिए कम कीमत हासिल कर पाएगा। जबकि, उसे बाजार में जरूरी चीजों के लिए ज्यादा कीमत देनी होगी। भारतीय किसान संघ के इस तर्क के पीछे तथ्य ये है कि अभी कृषि जिंस से बने खाद्य उत्पादों पर कम कर है। लेकिन, जीएसटी के बाद लगभग एक जैसा कर ही लगेगा और इसकी वजह से किसानों की मुश्किल बढ़ सकती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुषांगिक संगठन होने के नाते कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह भी भारतीय किसान संघ की बात को गंभीरता से ले रहे हैं। लेकिन, कृषि मंत्री का ये मानना है कि जीएसटी सभी के भले के लिए है। भारतीय किसान संघ ये भी चाहता है कि संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर चर्चा हो और अगर सरकार ये कर सके तो सरकार एक पंथ दो काज कर सकती है। इस चर्चा से सरकार राज्यों को और देश के लोगों को दरअसल जीएसटी के बहाने होने वाली सहूलियत से राष्ट्रीय कृषि बाजार की बात भी ठीक से कर सकती है। राष्ट्रीय कृषि बाजार ही वो योजना है, जिसके भरोसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा करते दिखते हैं। लेकिन, ये भी एक कड़वी सच्चाई है कि राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के राह की सबसे बड़ी बाधा दो राज्यों के बीच करों को लेकर होने वाली उलझन है। इसीलिए अगर सरकार जल्दी से जल्दी जीएसटी लागू कर सके, तो इसी बहाने राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना भी उतनी ही तेजी से लागू कर सकेगी।


गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के लागू होने से किसी भी तरह के उत्पाद पर कर के ऊपर कर लगने की अभी तक चली आ रही परंपरा खत्म होगी। इससे कर लगने में होने वाली पारदर्शिता से खेती-किसानी का बड़ा भला हो सकता है। खासकर अगर जीएसटी के साथ-साथ राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना भी लागू हो सके। दोनों को लागू करने में सबसे बड़ी मुश्किल राज्यों के बीच के सम्बंध, केंद्र और राज्य के सम्बंध और उससे भी आगे आसानी शब्दों में कहें, तो सम्वैधानिक संघीय ढांचे की उलझन है। अब अच्छी बात ये है कि सैद्धांतिक तौर पर संसद ने इसे कानून बनाने के लिए आगे बढ़ा दिया है। अब राज्यों में इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अच्छी बात ये है कि असम ने इसकी शुरुआत कर दी है और तेजी से दूसरे राज्य भी इसे अपनी विधानसभा में मंजूर करते दिख रहे हैं। यहीं से किसानों के भले वाली राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना का भी आसानी से लागू होना दिखने लगेगा। दरअसल जब केंद्र सरकार बार-बार ये कह रही है कि राष्ट्रीय कृषि बाजार का सीधा सा उद्देश्य देश के हर किसान को देशभर का बाजार एक साथ देना है। इसमें भी समझने की बात ये है कि छोटे किसान को राष्ट्रीय कृषि बाजार की ज्यादा जरूरत है। क्योंकि, बड़ा किसान तो पहले से ही देश के हर बाजार तक पारंपरिक तरीकों से पहुंच बनाए हुए है। लेकिन, छोटे किसान की पहुंच अपनी नजदीकी मंडी तक भी बमुश्किल हो पाती है। इसीलिए राष्ट्रीय कृषि बाजार के जीएसटी के साथ-साथ लागू होने से छोटे किसान का बड़ा होता दिख रहा है। किसानों को या खती से जुड़े उत्पादों का कारोबार करने वालों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल चुंगी, एंट्री-एग्जिट टैक्स, मंडी टैक्स हैं। और, जीएसटी इन सभी करों को खत्म करेगा। खेती के उत्पाद के खेती उद्योग में पहुंचने तक चूंकि वैल्यू एडेड टैक्स ही देना होगा। इससे कर के ऊपर कर वाली स्थिति भी नहीं बनेगी। और, खाद्य उत्पादों के मामले में ये बहुत जरूरी है। इसके लाभ लंबे समय में महंगाई की असल स्थिति पता लगाने में दिखेंगे। किसी भी अनाज, खाद्य सामग्री के किसान के खेत से मंडी तक पहुंचने तक किस तरह का कितना कर लगा और उससे उस अनाज या खाद्य सामग्री का भाव कितना हुआ, ये भी पारदर्शी तरीके से पता चलेगा। खेत से मंडी तक की मुनाफाखोरी का पता भी सरकार ज्यादा आसानी से कर सकेगी। इससे किसान से सही कीमत पर खरीदने और ग्राहक को भी सही कीमत पर बेचने की व्यवस्था भी बनाई जा सकेगी। जीएसटी लागू होने से कृषि क्षेत्र को कई फायदे होंगे और उसमें सबसे बड़ा फायदा यही है कि देश भर में अलग-अलग करों का एक हो जाना देश में एक राष्ट्रीय कृषि बाजार का निर्माण करेगा। इससे देश भर में एक राज्य से दूसरे राज्य में कृषि उत्पाद आसानी से आ जा सकेंगे। चेक पोस्ट, बैरियर जैसी व्यवस्था खत्म होगी। राज्यों के बिना किसी बाधा के कृषि उत्पादों के परिवहन से कृषि बाजार में निजी क्षेत्रों की रुचि बढ़ेगी। इससे आधुनिक गोदाम सुविधा से लेकर आधुनिक बाजार के लागू होने में तेजी आएगी। जीएसटी और राष्ट्रीय कृषि बाजार का साझा मंच किसानों के लिए गजब फायदे का साबित हो सकता है। उसकी वजह है कि कृषि और उससे सम्बंधित उत्पादों के ही सबसे तेजी से खराब होने का खतरा होता है और अभी तक का अनुभव, शोध ये साफ बताता है कि भारत में तरह-तरह के करों और एक मंडी से दूसरी मंडी के बीच की बाधाओं की वजह से फल, सब्जियां और दूसरे अनाज खराब होकर देश के सकल घरेलू उत्पाद का सीधे तौर पर नुकसान करते हैं। इससे राज्यों के बीच खेती के उत्पादों का कारोबार भी बेहतर होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर राष्ट्रीय कृषि बाजार के साथ जीएसटी का मंजूर होना देश के किसानों की आमदनी दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने का साधन बनता दिख रहा है।  

Wednesday, September 14, 2016

हिन्दी दिवस पर चेन्नई की एक सड़क के बहाने

#हिन्दीदिवस
ये चेन्नई की एक सड़क का नाम भर नहीं है। ये पूरे दक्षिण भारत का मानस है। जो हिन्दी पर अंग्रेजी को वरीयता दे रहा है। दोष उनका नहीं है। क्योंकि, हम हिन्दी वाले भी तो अंग्रेजी को वरीयता देते हैं। और #EnglishElite तो उत्तर भारत और उनके नेताओं ने ही तैयार किया। कांग्रेस की इसमें बड़ी भूमिका है। वरना ऐसे क्यों होता कि इंदिरा इज इंडिया इंडिया इज इंदिरा का नारा देने वाले के कामराज के राज्य में हिन्दी इतनी अछूत हो जाती है। अपनी सहूलियत की राजनीति में कांग्रेस ने ऐसे छत्रपों को तैयार किया जो दूसरे राज्य में अछूत से हो जाते। हां, इंदिरा, राजीव हर जगह देश के बड़े नेता रहे। हिन्दी और दूसरी भारतीय भाषाओं की लड़ाई में शातिर अंग्रेजी ने ऐसे जगह बनाई है कि वही हिन्दुस्तानी भाषाओं के बीच संवाद की भाषा बन गई है। टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलकर हिन्दी वाले तमिल, तेलुगू, कन्नड़ वालों से और वो लोग हम हिन्दी वालों से बात करते हैं। अंग्रेजी न उनको स्वाभाविक तौर पर आती है, न हमको। मैं तमिल की पुस्तक देख रहा था तो कई शब्द हैं जो हिन्दी से मिलते-जुलते हैं। लेकिन, हमें एकदम भिन्न अंग्रेजी सीखने में अपने जीवन की महत्वपूर्ण ऊर्जा खपा देने में ज्यादा बेहतर लगता है।


मेरे नए फेसबुक तमिल दोस्त तिरुनावकर

ये Thiru Thirunavukkarsau हैं। मेरे नए फेसबुक दोस्त हैं। फेसबुक दोस्ती से पहले ये मेरी टैक्सी के ड्राइवर हैं, जिसने मुझे 3 दिनों तक चेन्नई एयरपोर्ट से तिरुपति-तिरुमला, महाबलीपुरम की शानदार यात्रा कराकर फिर से चेन्नई एयरपोर्ट पर छोड़ा। तिरुनावकर संभवत: मैं सही नाम का उच्चारण कर रहा हूं। 3 दिनों तक जमकर तमिल संगीत सुनाया। सिवाय एकाध घंटे के हिंदी गानों के विविध भारती पर कार्यक्रम को छोड़कर। तिरू ने बताया वो 12वीं तक पढ़े हैं लेकिन, हिन्दी उन्होंने तब सीखा जब एक हिन्दी वाली कम्पनी में काम किया। शानदार यात्रा कराने के लिए धन्यवाद। उम्मीद करता हूं अब आप थोड़ी और हिन्दी सीख लेंगे। और अगली बार उत्तर भारतीय पर्यटकों के लिए एकाध अच्छी हिन्दी गानों की सीडी या पेन ड्राइव रखेंगे। एयरपोर्ट पर साथ ली ये तस्वीर। तिरू ने बताया कि वो फेसबुक पर हैं। मैंने कहा मैं भी। अब हम दोनों दोस्त हैं। अगली बार जब भी चेन्नई जाना हुआ, तिरू को ही पहले खोजूंगा। #हिन्दी_दिवस

Tuesday, September 13, 2016

हिन्दी दिवस पर तमिल, तेलुगू सीखने की किताब


हिन्दी दिवस पर मेरी वापसी दक्षिण भारत से हो रही है। यकीन मानिए पिछले 3 दिनों से हिन्दी पढ़ने, सुनने को तरस गया। लेकिन, ये एकतरफा विलाप होगा कि दक्षिण भारतीय हिन्दी को नापसंद करते हैं। दोतरफा संवाद बनाने का तरीका ये हम उत्तर भारतीय ये बता पाएं कि दक्षिण भारतीय भाषाओं के लिए हमारे मन में कितना सम्मान है। दूसरी भाषा/बोली सीख पाने की मेरी क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है। देहरादून रहकर गढ़वाली और मुंबई रहकर मराठी नहीं सीख सका। सामाजिक व्यवसायिक दबाव की वजह से अंग्रेजी समझता/जानता हूं। लेकिन, बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन, किसी भी दक्षिण भारतीय भाषा को जरा सा समझना भी कठिन है। इसीलिए हिन्दी दिवस पर 30 दिन में सीखें तमिल, तेलुगू अब मेरी दूसरी किताबों का हिस्सा हैं। कल #चेन्नई के मरीना बीच से ये दोनों किताबें खरीदी हैं। मैं इन भाषाओं को अच्छे से जान समझ सकूंगा, ये तो कह पाना मुश्किल है। लेकिन, कोशिश ये होगी कि खुद कुछ समझने लायक हो सकूं। और सबसे जरूरी दोनों बेटियों को तो तमिल, तेलुगू के जरूरी शब्दों से परिचित करा ही दूं। मेरे पिताजी ने भी इलाहाबाद में इसका एक प्रमाणपत्र हासिल किया था। लेकिन, बस अपना नाम लिखने भर का और 10 तक की गिनती ही याद रह पाई। इतना तो कम से कम मैं भी कर ही लूंगा। और बेटियां हो सकता है इससे काफी ज्यादा कर लें।

Saturday, September 10, 2016

शहाबुद्दीन से नीतीश कुमार डरे तो होंगे ही?

@narendramodi से अहं की लड़ाई में @laluprasadrjd से हर लड़ाई खत्म करके @NitishKumar ने दोस्ती पक्की कर ली है। आप क्या सोच रहे हैं, सिर्फ बिहार के आम लोग, बीजेपी कार्यकर्ता डर रहे हैं। #Shahabuddin के जेल से छूटने के बाद नीतीश भी डर रहे हैं। मेरी बात मत मानिए। शहाबुद्दीन ने कहा है कि नीतीश परिस्थितियों के मुख्यमंत्री हैं। इसका मतलब जो भी समझेगा, वो ये भी समझ रहा होगा कि नीतीश डर तो बहुतै रहे होंगे। मुख्यमंत्री हैं, कैसे और किससे कहें। अब तो बीजेपी भी साथ नहीं है। और बड़े भाई लालू से क्या कहेंगे। लालू से फिर राजनीति में मार खा गए, नीतीश कुमार। अब बिहार पर बड़ी मार पड़ेगी।

टीवी चैनलों पर जेल से छूटे #Shahabuddin का 1500 बड़ी-बड़ी गाड़ियों का काफिला देखकर लग रहा है कि #Bihar बहुत गरीब है। #दुर्भाग्य_देश_का #दुर्भाग्य_बिहार_का


#Shahabuddin के जेल से बाहर आने के बाद क्या होगा? ये सवाल सब पूछ रहे थे। जवाब मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जेल से बाहर निकलते ही दे दिया है। शहाबुद्दीन ने कहा लोगों ने 26 सालों से इसी छवि के साथ स्वीकारा है। अब इसका मतलब बिहार के लोगों को समझाने की जरूरत है क्या? एक मत कितना महत्वपूर्ण हो सकता है, इसका अंदाजा उन सभी लोगों को लग जाएगा कि "बिहार में बहार हो नीतीशे कुमार हो" नारे का असल मतलब क्या है। इतनी खराब सुबह हाल के समय में कभी नहीं हुई।

Wednesday, September 07, 2016

सरपट भागते सेंसेक्स की बुनियाद

भारतीय शेयर बाजार को जैसे अचानक कोई संजीवनी सी मिल गई हो। इस साल अब तक सेंसेक्स 10.5% से ज्यादा चढ़ चुका है। 29000 को छूने के बाद सेंसेक्स थोड़ा सुस्ताता नजर आ रहा है। सेंसेक्स को 29000 छूने में करीब डेढ़ साल लग गए। दरअसल ये पिछले डेढ़ साल सरकार के लिए भी ढेर सारी मुश्किलों वाले रहे हैं। लेकिन, अब सरकार भी मजबूतत नजर आ रही है और शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा भी पक्का नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अर्थव्यवस्था को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रहे हैं। इसकी ढेर सारी वजहें हैं और शेयर बाजार की मजबूती में दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। मौसम से लेकर महंगाई ने बाजार को मारक रफ्तार दे दी है। उन ढेर सारी वजहों में से सबसे अहम 5 वजहें ये रहीं।

GST कानून बनने की ओर
भारत में कर सुधारों का सबसे बड़ा कानून बनने जा रहा है। मोदी सरकार के दो साल होने के बाद संसद ने GST बिल को पास कर दिया। संसद से मंजूर होने के बाद तेजी से GST कानून बनने की तरफ बढ़ रहा है। 17 राज्यों की विधानसभा ने GST को मंजूर कर लिया है। जिस तेजी से राज्यों ने इसे मंजूर किया है। उससे सरकार के 1 अप्रैल 2017 से इसे कानून बनाने की राह आसान होती दिख रही है। सरकार ने GST काउंसिल की मदद के लिए GST सचिवालय बनाने पर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, अभी भी कानून बनाने के लिए इसे लंबा सफर तय करना है।

काबू में आती महंगाई
इस साल रिकॉर्ड दाल की पैदावार का अनुमान है। अच्छे मॉनसून की वजह से कुल अनाज भी बेहतर होने का अनुमान है। इसकी वजह से भी महंगाई काबू में आती दिख रही है। इसका असर भी दिखने लगा है। 140 रुपये किलो बिक रही अरहर दाल 100 रुपये किलो के आसपास बिकने लगी है। हालांकि, महंगाई दर 6% प्रतिशत के ऊपर है जो, रिजर्व बैंक के 5% के लक्ष्य से ऊपर है। लेकिन, बेहतर मॉनसून से कम से कम खाने-पीने के सामानों की महंगाई और कम होने की उम्मीद दिख रही है। ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी मांग होने से कंपनियों – खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल, मशीनरी- की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है। इससे कंपनियों की बैलेंसशीट बेहतर होने के आसार हैं।  

उर्जित पटेल से मिली ऊर्जा
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को हटाने को लेकर दुनिया भर की एजेंसियां और आर्थिक विश्लेषक भारतीय मौद्रिक नीति को लेकर आशंका में थे। लेकिन, उर्जित पटेल का रिजर्व बैंक का गवर्नर बनना सभी आशंकाओं को खारिज करता है। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल का अभी तक का रिकॉर्ड आश्वस्त करता है कि भारत की मौद्रिक नीति बदलने वाली नहीं हैं। साथ ही ये भी पटेल और मोदी सरकार के बीच विवाद भी नहीं होने वाला। शेयर बाजार का नए गवर्नर में भरोसा इसी बात से समझा जा सकता है कि उदारीकरण के बाद शेयर बाजार ने रघुराम राजन के बाद अब उर्जित पटेल का भी स्वागत इतने शानदार तरीके से किया है। 4 सितंबर को सेंसेक्स 1.6% चढ़ा है।

मैन्युफैक्चरिंग में जबर्दस्त तेजी
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त तेजी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री क मेक इन इंडिया का असर साफ नजर आ रहा है। ढेर सारी कंपनियां जो अभी तक असेंबलिंग करती थीं। अब भारत में ही मैन्युफैक्चरिंग कर रही है। मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर इंडेक्स 13 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर है। मैन्युफैक्चरिंग की जीडीपी में हिस्सेदारी 25% है।

अमेरिका से मिले संकेत
अमेरिकी रिजर्व बैंक इस महीने के आखिर में ब्याज दरें नहीं बढ़ाएगा। रोजगार के ताजा आंकड़े आने के बाद ज्यादातर विश्लेषकों का ये मानना है। इसकी वजह से दुनिया भर के निवेशक विकासशील बाजारों में निवेश करने को लेकर उत्साहित हैं और भारत उसमें सबसे ऊपर है।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...