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Wednesday, September 14, 2016

हिन्दी दिवस पर चेन्नई की एक सड़क के बहाने

#हिन्दीदिवस
ये चेन्नई की एक सड़क का नाम भर नहीं है। ये पूरे दक्षिण भारत का मानस है। जो हिन्दी पर अंग्रेजी को वरीयता दे रहा है। दोष उनका नहीं है। क्योंकि, हम हिन्दी वाले भी तो अंग्रेजी को वरीयता देते हैं। और #EnglishElite तो उत्तर भारत और उनके नेताओं ने ही तैयार किया। कांग्रेस की इसमें बड़ी भूमिका है। वरना ऐसे क्यों होता कि इंदिरा इज इंडिया इंडिया इज इंदिरा का नारा देने वाले के कामराज के राज्य में हिन्दी इतनी अछूत हो जाती है। अपनी सहूलियत की राजनीति में कांग्रेस ने ऐसे छत्रपों को तैयार किया जो दूसरे राज्य में अछूत से हो जाते। हां, इंदिरा, राजीव हर जगह देश के बड़े नेता रहे। हिन्दी और दूसरी भारतीय भाषाओं की लड़ाई में शातिर अंग्रेजी ने ऐसे जगह बनाई है कि वही हिन्दुस्तानी भाषाओं के बीच संवाद की भाषा बन गई है। टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलकर हिन्दी वाले तमिल, तेलुगू, कन्नड़ वालों से और वो लोग हम हिन्दी वालों से बात करते हैं। अंग्रेजी न उनको स्वाभाविक तौर पर आती है, न हमको। मैं तमिल की पुस्तक देख रहा था तो कई शब्द हैं जो हिन्दी से मिलते-जुलते हैं। लेकिन, हमें एकदम भिन्न अंग्रेजी सीखने में अपने जीवन की महत्वपूर्ण ऊर्जा खपा देने में ज्यादा बेहतर लगता है।


Tuesday, September 13, 2016

हिन्दी दिवस पर तमिल, तेलुगू सीखने की किताब


हिन्दी दिवस पर मेरी वापसी दक्षिण भारत से हो रही है। यकीन मानिए पिछले 3 दिनों से हिन्दी पढ़ने, सुनने को तरस गया। लेकिन, ये एकतरफा विलाप होगा कि दक्षिण भारतीय हिन्दी को नापसंद करते हैं। दोतरफा संवाद बनाने का तरीका ये हम उत्तर भारतीय ये बता पाएं कि दक्षिण भारतीय भाषाओं के लिए हमारे मन में कितना सम्मान है। दूसरी भाषा/बोली सीख पाने की मेरी क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है। देहरादून रहकर गढ़वाली और मुंबई रहकर मराठी नहीं सीख सका। सामाजिक व्यवसायिक दबाव की वजह से अंग्रेजी समझता/जानता हूं। लेकिन, बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन, किसी भी दक्षिण भारतीय भाषा को जरा सा समझना भी कठिन है। इसीलिए हिन्दी दिवस पर 30 दिन में सीखें तमिल, तेलुगू अब मेरी दूसरी किताबों का हिस्सा हैं। कल #चेन्नई के मरीना बीच से ये दोनों किताबें खरीदी हैं। मैं इन भाषाओं को अच्छे से जान समझ सकूंगा, ये तो कह पाना मुश्किल है। लेकिन, कोशिश ये होगी कि खुद कुछ समझने लायक हो सकूं। और सबसे जरूरी दोनों बेटियों को तो तमिल, तेलुगू के जरूरी शब्दों से परिचित करा ही दूं। मेरे पिताजी ने भी इलाहाबाद में इसका एक प्रमाणपत्र हासिल किया था। लेकिन, बस अपना नाम लिखने भर का और 10 तक की गिनती ही याद रह पाई। इतना तो कम से कम मैं भी कर ही लूंगा। और बेटियां हो सकता है इससे काफी ज्यादा कर लें।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...