Saturday, September 05, 2026

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

 

सुप्रभात राम राम

भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्रेडमिल पर चलने और पार्क या बाहर टहलने में एक अंतर तो यही होता है कि, टहलते हुए आपको बाहर की प्राकृतिक हवा मिलती है, एसी वाली नहीं।दूसरा जिम में जो संगीत चल रहा होता है, जिम करने वालों की उत्तेजना भले बढ़ाता हो, मन स्वस्थ, शांत करने वाला तो नहीं ही होता है। सोचिए, जिम में सुबह-सुबह सुनने को मिले- चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज़ का ना मुझको कोई रोके, ना किसी ने रोका एक और बोल सुनने को मिला- है घर, है पैसा, है गाड़ी दो जोड़ों में लड़की भेजो, लडकी हुई हमारी इसी गाने के कुछ और बोल सुनिए हेलो, अंकल, नमस्ते, चलो काम की बात पे आते हैंअब आप ये पूछेंगे कि आप कितने पैसे कमाते हैं?बस जितना आपकी बेटी एक महीने में उड़ाती हैएक हफ़्ते में मेरी गाड़ी उतना तेल खाती है! अब यह सब सुनते सुबह मन शांत, स्वस्थ होगा या मन किसी और दिशा में जाएगा। आप तय करिए। जिम के बड़े लाभ भी हैं। बारिश, बहुत गर्मी और बहुत सर्दी में जिम आपका शरीर स्वस्थ, चैतन्य रखने में सहायता करता है। नियमित अभ्यास बना रहता है। कम समय में अधिक दूरी ट्रेडमिल पर तय हो जाती है और कैलोरी भी अधिक खर्च कर सकते हैं। यह विचार हमारे मन में बहुत पहले आया था, लेकिन आज सुबह नीचे उतरा तो सैर के लिए पार्क जाने के बजाय जिम में चला गया और वहीं से इस लंबी पोस्ट की नींव पड़ गई। जिम में पहले तो तेज रफ्तार वाले गाने बज रहे थे। फिर कृष्ण धुन बजने लगी और आधे घंटे का मेरा ट्रेडमिल पूरा होते रामधुन बजने लगी। इसी समय का वीडियो साझा कर रहा हूँ और इसीलिए कह रहा हूँ कि, भारत और हम भारत के लोग, अद्भुत हैं। जिम में भी रामधुन बजा लेते हैं और हमें राम-कृष्ण-शिव से अलग करने के लिए फर्जी सेक्युलर जब प्रयास करते हैं तो इनके ऊपर दया आती है। यह हजारों बरसों की संस्कृति से तैयार हुआ भारत है। यह किसी नियम-कानून से नहीं बना है। यह मानस तैयार होने में, हमारा अस्तित्व होने में इस भूमि का प्रभाव है। राम में रमे भारत को जब कोई यह कहकर नकारने की कोशिश करता है कि, राम मंदिर बनने से क्या हो जाएगा? राम मंदिर में चढ़ावा चोरी नीच कर्म हुआ। मनुष्य लोभी होता है, कर गुज़रता है। उसकी सजा उसे कानूनी और ईश्वरीय तौर पर भी मिलेगी, लेकिन इस बहाने राम और राष्ट्र पर हमला करने की कोशिश करने वाले भारत को समझ ही नहीं पा रहे हैं। आप भारत कहते हैं, भारत को पहचानते हैं तो उसकी वजह हिन्दू ही है। हिन्दू और सिर्फ हिन्दू, बाकी आयातित पंथों के मानने वालों की पहचान भी राम और राष्ट्र ही है। नकारने की कोशिश करते सैकड़ों बरस बीत गए। राम और राष्ट्र को नकारना काम नहीं आया। राम और राष्ट्र से हम भारतीयों का जुड़ना ईसाई, मुसलमान या किसी से भी टूटना नहीं है। हम राम के वंशज हैं। हमारा अस्तित्व राम से शुरू होता है और राम में ही विलीन होता है। सुबह-सुबह जिम में सुनी रामधुन अब पूरे दिन मेरे मस्तिष्क में बजती रहेगी। रामजी सबका भला करें। #harshvardhantripathi
https://x.com/MediaHarshVT/status/2096086785193566322?s=20

Friday, February 13, 2026

Tarique Rahman को बांग्लादेश की जनता ने बड़ा अवसर दिया है

 Harsh Vardhan Tripathi हर्ष वर्धन त्रिपाठी

#Bangladesh में
ने उन्हें बधाई दी है और अच्छे संबंधों की उम्मीद जताई है। भारत के लिए शेख हसीना सच्ची और अच्छी दोस्त थीं। खालिदा जिया को भारत के दोस्त के तौर पर नहीं देखा जाता रहा, लेकिन तारिक रहमान लगभग दो दशक निर्वासित जीवन लंदन में बिताकर लौटे हैं। भारत उनके साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहता है। शेख हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध की वजह से उनकी पार्टी के समर्थकों ने तारिक रहमान को मत दिया होगा, ऐसा माना जा सकता है। इतनी प्रचंड जीत का सीधा आशय है कि, कट्टर जमातियों को बांग्लादेश का बड़ा वर्ग सत्ता में आने से रोकना चाहता था और उसने कर दिखाया। इसमें बांग्ला
देश के युवाओं और विशेषकर महिलाओं की भूमिका बड़ी है। शेख हसीना को लेकर नौजवानों के एक बड़े वर्ग के मन में यह आ गया था कि, शेख हसीना तानाशाही कर रही हैं। हालांकि, तथ्यात्मक तौर पर शेख हसीना के शासन में रहते बांग्लादेश ने विकास की रफ्तार पकड़ी थी। इस सबके बावजूद बांग्लादेश के नौजवानों के मन में यह बात स्थापित हो गई थी कि, शेख हसीना तानाशाही कर रही हैं। इसमें अमेरिकी डीप स्टेट ने भी अपना खेल किया और मोहम्मद यूनुस को कठपुतली की तरह लाकर बैठा दिया। ISI और पाकिस्तानी सेना के साथ जमात के कट्टरपंथियों ने इसमें अपनी जगह देखी, लेकिन बांग्लादेश के नौजवानों और विशेषकर महिलाओं ने इसको समय से समझ लिया। अब जब बांग्लादेश के चुनाव परिणाम आ गए हैं तो यह स्पष्ट दिख रहा है कि, बांग्लादेश का बहुसंख्यक मुसलमान और पूर्ण रूप से अल्पसंख्यक समाज लोकतंत्र के पक्ष में मतदान करने निकला। जमातियों के पक्ष में धांधली की भी खबरें आईं। कई स्थानों पर जमातियों के पक्ष में पहले से ही मत दिए गए थे। इस सबके बावजूद तारिक रहमान की पार्टी ने शानदार जीत प्राप्त की है। भारत भी बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा है। तारिक रहमान को शेख हसीना को वापस बांग्लादेश लाने की जिद छोड़ना होगा। तारिक रहमान के लिए यह खतरनाक होगा कि, बांग्लादेश में ISI और पाकिस्तानी सेना का प्रभाव बढ़े। अगर ऐसा हुआ तो बीएनपी की संभावनाएं आगे कम होती जाएंगी। लगभग दो दशक लंदन में निर्वासित रहे तारिक रहमान को पश्चिमी देशों की साजिशों का भी अच्छे से अनुमान होगा। भारत कतई यह नहीं चाहता कि, दिल्ली से ढाका की राजनीति, नीत तय हो, लेकिन दिल्ली यह भी पसंद नहीं करेगा कि, बीजिंग और वाशिंगटन से ढाका की नीतियां भारत विरोधी हो जाएं या इस्लामाबाद और बांग्लादेश में कट्टर जमात बांग्लादेश को भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा बना दे। तारिक रहमान को लोकतंत्र बरकरार रखने के लिए शुभकामनाएं

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...