Skip to main content

Posts

Showing posts from April, 2009

बर्थ, तेरही, ट्रेडिंग टर्मिनल, एसी मंच, सानिया मिर्जा कट नथुनी

सोचा था कि किसी भी हाल में 7 बजे तक ऑफिस से निकल ही जाऊंगा। लेकिन, वोटिंग के दिन चुनाव पर आधे घंटे के स्पेशल बुलेटिन को छोड़कर निकलना थोड़ा मुश्किल था। खैर, 7.20 होते-होते लगाकि अब मामला बिगड़ जाएगा। फिर, झंझट ये कि नोएडा से दिल्ली के लिए ऑटो मिलना भी कम महाभारत तो थी नहीं। फिर एक साथी की मदद से बाल्को पहुंच तो गया। लेकिन, समझ में आया कि इलाहाबाद के लिए ट्रेन का टिकट तो प्रिंट निकालकर प्रिंटर पर ही भूल आया। खैर, फोन करके छोटे भाई से टिकट का PNR नंबर पूछा और मोबाइल से टिकट का स्टेटस पता किया तो, RB 2-47, 55 दिखा तो, लगा चलो टिकट तो कनफर्म हो गया। लेकिन, RB का रहस्य नहीं समझ में आ रहा था। सीधे गए तो, 47, 55 दोनों नीचे की किनारे वाली सीटें थीं। चलो एक उलझन तो दूर हुई। सामने दो सभ्य जन भिड़े हुए थे। दोनों लोगों के पास अपनी सीट भर से ज्यादा सामान था। और, दोनों ही अपने सामान को अपने ज्यादा से ज्यादा नजदीक चिपकाकर रखने की लड़ाई लड़ रहे थे। दूसरे को किसी और की सीट के नीचे सामान घुसाने की सलाह (धमकी के अंदाज में) दिए जा रहे थे। मेरे दोस्त GR पांडे और मैं इस झगड़े को देखकर मुस्कुरा रहे थे।

आडवाणी को बढ़ती मायावती का सहारा

राष्ट्रीय राजनीति में मायावती की बड़ा बनने की इच्छा बीजेपी के खूब काम आ रही है। ये नजर नहीं आता क्योंकि, देश की सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में उन्होंने कमाल के फॉर्मूले से बीजेपी का ही कचूमर निकाल दिया है। और, सांप्रदायिक बीजेपी को गाली देने का वो कोई मौका छोड़ती नहीं हैं। लेकिन, दरअसल ये मायावती देश भर में हाथी दौड़ाने की जो कोशिश कर रही हैं उसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल रहा है और उसके साइड इफेक्ट कांग्रेस पर पड़ते दिख रहे हैं। मायावती किस तरह से बीजेपी के काम आ रही हैं- इसकी बानगी देखिए। इलाहाबाद में अभी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार लालकृष्ण आडवाणी की रैली हुई। केपी कॉलेज मैदान में हुई इस रैली में अच्छी भीड़ उमड़ी। इलाहाबाद में हुई आडवाणी की सफल रैली के कई राष्ट्रीय संकेत साफ दिखते हैं। ये वो इलाहाबाद है जहां से एक जमाने में बीजेपी की तीन धरोहरों –अटल-आडवाणी-मुरली मनोहर- में से एक मुरली मनोहर जोशी तीन बार लगातार चुनाव जीते लेकिन, पिछला चुनाव हारे तो, गंगा के किनारे-किनारे इलाहाबाद से बनारस पहुंच गए। जोशी के सीट छोड़ने के बाद इलाहाबाद से बीजेपी को उ

जो भी हो ये खबर सबको पढ़नी जरूर चाहिए

ये दूसरी खबरों जैसी सिर्फ एक खबर ही थी। 4 अप्रैल को टाइम्स ऑफ इंडिया की इस बॉटम स्टोरी की असलियत क्या है और पता नहीं कभी वो सामने आ भी पाएगी या नहीं। लेकिन, मुझे लगा कि इस खबर को जितने लोगों को हो सके जानना जरूर चाहिए। क्योंकि, असलियत तो इसलिए भी दफन हो जाएगी कि तहकीकात तो इस मामले में होने से रही। सफेद कपड़ों में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के साथ काले सूट में सोनिया गांधी- शोक संतप्त गांधी परिवार की फोटो के साथ हेडलाइन थी- priyanka’s dad in law found dead. सामान्य सी ही खबर थी इतनी कि जब हमारे न्यूजरूम में फ्लैश आया तो, मुझे लगा कि ये कौन सी बात हुई। प्रियंका के ससुर का मरना खबर कैसे हो सकती है। लेकिन, जब दूसरे दिन टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार में थोड़े तफसील के साथ खबर दिखी तो, लगा कि ये तो बड़ी खबर थी, अच्छे से टीवी चैनलों पर चली क्यों नहीं। प्रियंका के ससुर राजेंद्र वाड्रा का निधन हुआ। लेकिन, अखबार में लिखा ये लाइन चौंकाने वाली बात है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में राजेंद्र वाड्रा के गले के पास जख्मों के निशान कुछ इस तरह के हैं जैसे किसी के आत्महत्या करने पर होते हैं। वैसे, इतना हाई

ये पिछले 62 सालों से अप्रैल फूल बन रहे हैं

बीजेपी का घोषणापत्र अब तक जारी नहीं हुआ है। लेकिन, ये कांग्रेस दो हाथ आगे दिखेगा। आखिर घोषणापत्र होता तो सिर्फ कहने के लिए ही होता है। इसलिए कांग्रेस ने पहले जो कहा उससे कुछ आगे तो बीजेपी वालों को कहना ही होगा। बानगी दिख गई है- गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी आडवाणी के लोकसभा क्षेत्र गांधीनगर में पहली चुनावी रैली में ही ये कह गए कि चावल 2 रुपए किलो मिलेगा। नरेंद्र मोदी का 2 रुपए किलो चावल/गेहूं का फॉर्मूला शायद ही गुजरात में ज्यादा असर करता हो। लेकिन, देश भर में तो जमकर असर करता ही है। गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान राजकोट से 22 किलोमीटर दूर एक गांव राजसमढियाला गया। इस गांव की सालाना कमाई है करीब पांच करोड़ रुपए। 350 परिवारों वाले इस गांव के ज्यादातर लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन खेती ही है। लेकिन, इस गांव की कई ऐसी खासियत हैं जिसके बाद शहर में रहने वाले भी इनके सामने पानी भरते नजर आएं। 2003 में ही इस गांव की सारी सड़कें कंक्रीट की बन गईं। 350 परिवारों के गांव में करीब 30 कारें हैं तो, 400 मोटरसाइकिल। इस गांव में कांग्रेस के 3 रुपए किलो और नरेंद्र मोदी के 2 रुपए किलो