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Showing posts from April, 2020

ऐतिहासिक अवसर है, चूकिए मत मोदी जी !

चीन का डर, भारत का अवसर बनेगा ? चाइनीज वायरस को पूरी तरह से खत्म होने में वक्त लगेगा, लेकिन इस वायरस का प्रकोप खत्म होते पूरी विश्व संरचना बदल जाएगी। इसमें भारत की भूमिका भी बदल सकती है, बेहतर हो सकती है, लेकिन प्रश्न है कि क्या हमारी नीतियां और उन्हें लागू करने में तेजी भारत को पुन : विश्व गुरु का दर्जा दिला पाएंगी। 3 मई को जब देशबंदी का दूसरा चरण समाप्त होगा, उसके बाद भारत सरकार और राज्य सरकारें विश्व निवेशकों को क्या सकेंते देंगे, उसी से तय होगा कि भारत इस ऐतिहासिक अवसर का कितना लाभ उठा पाएगा। हालांकि, इस बात का अन्दाजा भारत सरकार को भी बहुत अच्छे से है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी कह रहे हैं कि वायरस के बाद चीन के प्रति दुनिया भर के अविश्वास का लाभ भारत को उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी भरोसा जताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत सरकार इस अवसर का लाभ उठाने में कामयाब होगी। भारत सरकार में मंत्री होने के नाते नितिन गडकरी की यह सदिच्छा स्वाभाविक दिखती है और देश भी इसी तरह से देख रहा है कि चीन से कंपनियां

चाइनीज वायरस के बाद के विश्व में भारत की भूमिका

चाइनीज वायरस का प्रकोप खत्म होने के बाद विश्वनेता कौन सा देश होगा। यह प्रश्न अब तर्कों, तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर दुनिया में पूछा जाने लगा है। इसके उत्तर में ढेर सारे विकल्प सामने आते हैं, लेकिन एक विकल्प पर आश्चर्यजनक रूप से दुनिया सहमत होती जा रही है कि अमेरिका अब पहले जैसा दुनिया के किसी संकट में प्रभावी भूमिका में नहीं रहा है। डोनाल्ड ट्रम्प बड़बोले बयानों की वजह से चर्चा में रहते हैं, लेकिन जब किसी बड़े फैसले को अमेरिका के लिहाज से अपने पक्ष में करने की बात आती है तो हमेशा एक कदम पीछे जाते हुए दिखते हैं। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का मसला हो, ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति में पहुंचने का या फिर हाल ही चीन के साथ कारोबारी युद्ध विराम का, हर मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड, व्हाइट हाउस में विराजने वाले दुनिया के सर्वशक्तिमान व्यक्ति की तरह प्रभावी नहीं दिखे। इसमें कोढ़ में खाज चाइनीज वायरस से लड़ाई में दुनिया की अगुआई नही कर पाना हो गया है। चाइनीज वायरस के बारे में खुलकर बोलने भर से अमेरिकी राष्ट्रपति को दुनिया पहले की तरह नहीं देख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने विश

ऱाज सत्ता में धर्म का श्रेष्ठ उदाहरण योगी आदित्यनाथ ने प्रस्तुत किया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है। योगी जी अपने पिता की अंत्येष्टि में शामिल नहीं हो रहे हैं, लेकिन इसकी वजह उनका योगी होना नहीं है। इसकी वजह है मुख्यमंत्री के तौर पर चाइनीज वायरस के समय लड़ाई को सेनापति के तौर पर लड़ना। योगी जी का यह शोक सन्देश उदाहरण के तौर पर पेश किया जाएगा। एक बार मैंने प्रशासनिक उलझनों में फंसे योगी आदित्यनाथ के लिए लिखा था कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ पर भारी पड़ रहे हैं योगी आदित्यनाथ। हाल में जिस तरह से देश के सबसे बड़े राज्य को उन्होंने चलाया है, उसने मेरे पुराने अन्देशे को खत्म कर दिया है। नागरिकता कानून विरोधी आन्दोलन का समय हो या फिर वैश्विक महामारी के समय, उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुत किया है और आज अपने पिता की अंत्येष्टि में न जाकर उन्होंने सेनापति की तरह आगे रहकर युद्ध में रहना प्रस्तुत किया है।