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Showing posts from May, 2014

ये उत्तर प्रदेश का चरित्र है!

इतिहास उठाकर देख लीजिए। किसी भी समुदाय, समाज की व्याख्या उसके नायकों के आधार पर ही की गई है। पहले राजे-रजवाड़े, नवाब होते थे। अब लोकतंत्र है। इसलिए चुनकर जो आ जाए वो नायक होता है। चुनकर कैसे आया ये सब महत्वहीन हो जाता है। कितने लोगों ने उसे चुना ये भी महत्वहीन हो जाता है। लेकिन, चुनकर आया तो लोकतंत्र में वही पूरे समुदाय, समाज, राज्य और देश का नायक होता है। इसलिए उसी के चरित्र से पूरे समुदाय, समाज, राज्य और देश का चरित्र तय होता है। आज उत्तर प्रदेश का चरित्र तय हो रहा है। आजकल उत्तर प्रदेश के चरित्र तय होने का पैमाना बदायूं है। बदायूं में दो लड़कियों की पेड़ से लटकी तस्वीरें उत्तर प्रदेश का चरित्र दिखा रही है। पता नहीं उत्तर प्रदेश शर्मसार है या नहीं। क्योंकि, उत्तर प्रदेश को अब शायद इस तरह से अपने चरित्र की व्याख्या की आदत पड़ गई होगी। वरना पत्रकार पूछे और उसे मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव ये कहते क्या कि आप तो सुरक्षित हैं। अब ये सुरक्षित होने का आश्वासन था या फिर आप सुरक्षित हैं ये क्या कम है। और क्या आप चाहते हैं कि आप भी सुरक्षित न रहें, इस तरह की धमकी थी। उत्तर प्रदेश

मोदी के 10 का कितना दम?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की काम की शैली कुछ ऐसी है कि एक बात तो लगने लगी है कि इस सरकार में मंत्री हो या बाबू काम किए बिना काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेंद्र मोदी की अधिकारियों के साथ बात करती एक तस्वीर मीडिया और सोशल मीडिया में गजब छाई हुई है। नरेंद्र मोदी की ये एक ऐसी छवि है कि प्रधानमंत्री होने के बाद भी नरेंद्र मोदी ऑफिस की कुर्सी पर ही चिपके रहकर सिर्फ फैसले नहीं लेते हैं। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर नरेंद्र मोदी की सरकार के काम करने का तरीका क्या होगा। उसकी प्राथमिकता क्या होगी। और नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों को साफ-साफ निर्देश दे दिए हैं कि काम की प्राथमिकता क्या होगी। खबरें हैं कि नरेंद्र मोदी दस के दम के जरिये इस सरकार का प्रभाव आम लोगों के दिमाग में बसाने की योजना तैयार की है। नरेंद्र मोदी को पता है कि इस देश में लोग सबसे ज्यादा त्रस्त यूपीए के कार्यकाल में दो बातों से रहे। पहला उनकी तरक्की कम होती गई और उस पर कोढ़ में खाज ये कि महंगाई लगातार बढ़ती रही। इसलिए मोदी सरकार की दस प्राथमिकताओं में पहली प्राथमिकता भी यही है। सभी मंत्रियों को खासकर

नमो का ब्रांड स्वदेशी

आखिरकार प्रधानमंत्री पद की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए नरेंद्र मोदी की अधिकारिक सवारी बीएमडब्लू हो ही गई। लेकिन, इससे पहले नरेंद्र मोदी जिस तरह से अपने आचरण व्यवहार में स्वदेशी का इस्तेमाल करते रहे हैं या यूं कहें कि जिस तरह से राष्ट्र की भावना को आगे रखते हैं वो काबिलेतारीफ होता है। 200 8 में अहमदाबाद में लगातार हुए कई धमाकों की कवरेज के लिए मैं अहमदाबाद में था। अहमदाबाद एयरपोर्ट से शहर के लिए निकला ही था कि हम लोगों की कार रोक दी गई। पता चला गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला जा रहा है। आधा दर्जन से ज्यादा महिंद्रा स्कॉर्पियो का काफिले में गुजारत के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जा रहे थे। रात के ग्यारह बज रहे थे। मुख्यमंत्री काम पर थे। अहमदाबाद के लोग दहशत में न आ जाएं इस बात का भरोसा दिलाने के लिए वो दृढ़प्रतिज्ञ दिखे। महिंद्रा स्कॉर्पियो क्यों नरेंद्र मोदी की पसंद है वो बात उस समय मेरी समझ में नहीं आई थी। बाद में समझ में आया कि थिंक ग्लोबली, एक्ट लोकली के सिद्धांत को नरेंद्र मोदी ने अपने निजी जीवन में किस तरह उतारा हुआ है। शायद ही कभी नरेंद्र मोदी के किसी व्यवहार से

जाति की राजनीति के पैर जमाने की कोशिश फिर शुरू

इस लोकसभा चुनाव के परिणामों ने बहुत कुछ साबित किया है। और साबित ये भी हो गया है कि नरेंद्र मोदी की राजनीति ने देश में धर्म और जाति की राजनीति का शीर्षासन करा दिया है। एक पिछड़े व्यक्ति को संघ ने प्रचारक बनाया और संघ के प्रचारक के तौर पर नरेंद्र मोदी का कार्यकाल रहा हो या भारतीय जनता पार्टी में नेता के तौर पर। अगर ध्यान से देखें तो संघ में सारे ब्राह्णण से लेकर अगड़ी जातियों के प्रचारक रहे हों या फिर भारतीय जनता पार्टी। सभी जगह नरेंद्र मोदी ने पहले संघ और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में काम करते हुए अपने वरिष्ठों के सहयोग से और फिर अपनी खुद की रणनीतिक ताकत से जिस तरह तरक्की की है, वो भी समझनी जरूरी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लंबे अरसे से जिस तरह जाति की राजनीति की तोड़ने की कोशिश कर रहा था। उसमें गोविंदाचार्य की सोशल इंजीनियरिंग के बाद ये मास्टर स्ट्रोक था। जिस तरह से अपने उद्भव के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राजनीतिक तौर पर इतनी सक्रिययता दिखाई। उतनी सक्रियता न तो संघ ने जनसंघ के समय में सार्वजनिक तौर पर दिखाई थी और न ही पहले स्वयंसेवक जाति से ब्राह्मण अटल बिहारी