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Monday, September 19, 2016

हिन्दी दिवस के बाद हिन्दी की बात

मेरी आदत है कि मैं हर वक्त समाज समझने की कोशिश करता रहता हूं। और ये अनायास है। इसके लिए मुझे कोई प्रयत्न नहीं करना पड़ता। एक दशक पहले शुरू हुई ब्लॉगिंग ने मुझे मंच भी दे दिया। अभी मैं तिरुपति दर्शन के लिए गया था, चेन्नई होकर। संयोग से वो समय सरकारी हिन्दी पखवाड़े के समय का था। हिन्दी दिवस के पहले नोएडा वापस आ गया। छोटी-छोटी कई बातें मेरे ध्यान में आईं। कुछ टुकड़ों में फेसबुक, ट्विटर पर लिखा। अब उसे समेटकर ब्लॉग पर डाल रहा हूं। जिससे ये आसानी से सब पढ़ सकें।

भीमराव अंबेडकर की दक्षिण भारत की बड़ी प्रतिष्ठा है। चेन्नई शहर से लेकर ग्रामीण इलाके तक में चमकीले, पीले रंग के बाबा साहेब नजर आ जाएंगे। अंबेडकर भी हिन्दुस्तान जोड़ सकते हैं। हालांकि, एक गड़बड़ हो गई है। अंबेडकर ने दलितों को उस समय के #EliteClassके बराबर लाने के लिए जो अंग्रेजी सीखने की सलाह दी थी। दक्षिण भारत ने उसे हिन्दी विरोध के तौर पर शायद ले लिया।

ये चेन्नई में स्कूलों से पढ़कर लौट रहे बच्चे हैं। लेकिन, ये इतना पढ़े-लिखे नहीं हैं कि मेरा लिखा, समझ सकें। ये अच्छा पढ़ रहे हैं। लेकिन, जैसे हम हिन्दीभाषी अपने बच्चों को हिन्दी के साथ स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाते हैं। वैसे ही ये भी तमिल के साथ अंग्रेजी पढ़ाते हैं। इसलिए हम उत्तर भारतीयों के पढ़े-लिखे बच्चे और दक्षिण भारतीयों के पढ़े-लिखे बच्चे जब खूब पढ़-लिख जाएंगे, तो एक दूसरे से अंग्रेजी में बात करेंगे। किसी भारतीय भाषा में नहीं। इतनी छोटी सी बात समझने के लिए नासा का वैज्ञानिक होने की जरूरत थोड़े ना है। हो सकता है दिल्ली के हमारे नेता ये समझते हों। और इसलिए चाहते हों कि उत्तर भारत का हर नेता दक्षिण भारत के हर नेता से अच्छे से बात न कर सके।


Dr MGR के नाम से प्रसिद्ध मरुधर गोपालन रामचंद्रन 3 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। 1988 में भारत रत्न की उपाधि दी गई। लेकिन, भारत रत्न MGR की मरीना बीच पर बनी समाधि में हिन्दी में कुछ नहीं लिखा है। वो उत्तर भारतीय जो अंग्रेजी नहीं जानते, उन्हें नहीं समझ आएगा कि ये रामचंद्रन की समाधि है। ऐसे ही चेन्नई के कई चौराहों पर वहां के बड़े नेताओं की मूर्तियां लगी हैं, जिनके बारे में हर भारतीय को जानना चाहिए। लेकिन, कई चौराहों पर तो सिर्फ तमिल में लिखा है। कम से कम हिन्दी में नाम और थोड़ी जानकारी लिखी रहे, तो हिन्दीभाषी भी ऐसे महान लोगों के बारे में जान समझ सकेंगे। और ये वकालत हिन्दी की नहीं है। ये वकालत देश के हर हिस्से के लोगों के बारे में एक दूसरे को जानने की है। और इसमें कोई संदेह नहीं है कि हिन्दी देश की सभी भाषाओं के बीच संवाद की भाषा बन सकती है। वैसे एमजीआर के बारे में एक और जानने वाली बात, उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था।

Tuesday, September 13, 2016

हिन्दी दिवस पर तमिल, तेलुगू सीखने की किताब


हिन्दी दिवस पर मेरी वापसी दक्षिण भारत से हो रही है। यकीन मानिए पिछले 3 दिनों से हिन्दी पढ़ने, सुनने को तरस गया। लेकिन, ये एकतरफा विलाप होगा कि दक्षिण भारतीय हिन्दी को नापसंद करते हैं। दोतरफा संवाद बनाने का तरीका ये हम उत्तर भारतीय ये बता पाएं कि दक्षिण भारतीय भाषाओं के लिए हमारे मन में कितना सम्मान है। दूसरी भाषा/बोली सीख पाने की मेरी क्षमता बहुत ज्यादा नहीं है। देहरादून रहकर गढ़वाली और मुंबई रहकर मराठी नहीं सीख सका। सामाजिक व्यवसायिक दबाव की वजह से अंग्रेजी समझता/जानता हूं। लेकिन, बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन, किसी भी दक्षिण भारतीय भाषा को जरा सा समझना भी कठिन है। इसीलिए हिन्दी दिवस पर 30 दिन में सीखें तमिल, तेलुगू अब मेरी दूसरी किताबों का हिस्सा हैं। कल #चेन्नई के मरीना बीच से ये दोनों किताबें खरीदी हैं। मैं इन भाषाओं को अच्छे से जान समझ सकूंगा, ये तो कह पाना मुश्किल है। लेकिन, कोशिश ये होगी कि खुद कुछ समझने लायक हो सकूं। और सबसे जरूरी दोनों बेटियों को तो तमिल, तेलुगू के जरूरी शब्दों से परिचित करा ही दूं। मेरे पिताजी ने भी इलाहाबाद में इसका एक प्रमाणपत्र हासिल किया था। लेकिन, बस अपना नाम लिखने भर का और 10 तक की गिनती ही याद रह पाई। इतना तो कम से कम मैं भी कर ही लूंगा। और बेटियां हो सकता है इससे काफी ज्यादा कर लें।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...