Tuesday, February 04, 2020

किसानों की आमदनी बढ़ाने की पक्की बुनियाद वाला बजट



खेती-किसानी को लेकर ज्यादातर चिन्ता करने वाले यह बात बड़ी आसानी से कह देते हैं कि खेती अब करने लायक रही नहीं, लेकिन कम ही लोग यह बता पाते हैं कि खेती-किसानी की तरफ लोग आकर्षित हों, इसके लिए करना क्या चाहिए। इस अबूझ प्रश्न का उत्तर प्रोफेसर स्वामीनाथन की अगुआई वाले राष्ट्रीय कृषि आयोग ने दिया था, लेकिन दुर्भाग्य से उस पर अमल बहुत देर से शुरू हुआ है। मई 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और उन्होंने किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुना करने का लक्ष्य तय किया तो इसे भी उसी तरह से देखा गया जैसे, किसान, गरीब, नौजवान, महिलाएं, वंचित को अधिकार देने की बात हर सरकार और उसका मुखिया करता रहता है। किसान से लेकर आम आदमी के मन में यही प्रश्न था कि आखिर मोदी सरकार ऐसा क्या कर देगी, जिससे किसानों की आमदनी दोगुना हो जाएगी। ज्यादातर जानकार इस लक्ष्य को आत्मघाती मान रहे थे या कह लें कि मान रहे हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी ने वहीं से शुरू किया, जहां अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री के तौर पर शुरू किया था। उसे यूपीए सरकार ने आगे तो बढ़ाया, लेकिन लागू नहीं किया। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फरवरी 2004 में राष्ट्रीय किसान आयोग बनाया और सोमपाल उसके अध्यक्ष बनाए गये, लेकिन मई 2004 में एनडीए चुनाव हार गया और यूपीए ने राष्ट्रीय कृषि आयोग का अगुआ प्रोफेसर एमएस स्वामीनाथन को बना गिया। प्रोफेसर स्वामीनाथन की अगुआई वाले आयोग ने दिसम्बर 2004, अगस्त 2005, दिसम्बर 2005 और अप्रैल 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। अक्टूबर 2006 में स्वामीनाथन आयोग ने पांचवीं और आखिरी रिपोर्ट सौंप दी थी। जिसमें भले ही नरेंद्र मोदी की सरकार की तरह किसानों की आमदनी दोगुना करने का कोई तय लक्ष्य नहीं था, लेकिन उसकी भी मंशा वही थी कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य कैसे मिले।
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोफेसर स्वामीनाथन सिफारिशों को लागू नहीं किया। प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय कृषि आयोग पहले ही बना दिया था इसीलिए देश को प्रोफेसर स्वामीनाथन की रिपोर्ट मिल सकी। जिसे पूरे करीब एक दशक बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने लागू करने का साहस दिखाया है और इस दशक के पहले बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों की आमदनी दोगुना करने के लिए 16 सूत्रीय एजेण्डा प्रस्तुत किया है। प्रोफेसर स्वामीनाथन ने 2017 में एक लेख के जरिये इस बात की प्रशंसा की थी कि मोदी सरकार राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिशों को लागू कर रही हैं। इसमें गुणवत्ता वाले बीज, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, फसल बीमा, सिंचाई और किसानों के भले के लिए चलायी जा रही दूसरी योजनाओं का जिक्र था और 2020 के बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 16 बिन्दुओं में उन्हीं सिफारिशों को क्रमवार तरीके से लागू करने के सरकार की इच्छाशक्ति को सामने रखा है। प्रोफेसर स्वामीनाथन ने भूमि सुधार को किसान समस्या के समाधान के लिए सबसे जरूरी बताया था औऱ वित्तमंत्री का सबसे पहला बिन्दु जमीन से जुड़ा मॉडल कानूनों का ही है। मॉडल एग्रीकल्चर लैंड लीजिंग एक्ट 2016, मॉडल एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग एक्ट 2017 और मॉडल एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एंड सर्विसेज एक्ट 2018 को राज्यों से लागू करने पर अपील की गयी है। सिंचाई की समस्या के समाधान के लिए सरकार भूजल स्तर की भयावह समस्या से जूझ रहे 100 जिलों के लिए एक समग्र योजना तैयार की है। किसान के खेत का प्रयोग सौर ऊर्जा के तौर पर हो सके, इसके लिए सरकार ने अन्नदाता से ऊर्जादाता योजना के तहत 20 लाख किसानों को सौर पम्प लगाने में मदद करने की योजना बनाई है। साथ ही 15 लाख किसानों को ग्रिड से जुड़े पम्प लगाने में मदद की जाएगी। जमीन की ऊर्वरता भी बरकरार रहे और पैदावार में कमी न आए, इसके लिए खाद का उचित प्रयोग बेहद आवश्यक है और सरकार ने बजट में जैविक और प्राकृतिक खाद को प्रोत्साहित करने के साथ ही खाद के संतुलित इस्तेमाल पर बल दिया है।
कृषि उपज का भंडारण देश की बड़ी समस्या है। इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने 2015-16 से 31 अक्टूबर 2019 तक 1303 नये गोदाम बनाये हैं। इससे 45,62,860 टन भंडारण क्षमता बढ़ गयी है। अब देश में 162 मिलियन टन की भंडारण क्षमता हो गयी है। बजट में वित्तमंत्री ने बताया कि नाबार्ड सभी वेयरहाउस की मैपिंग करके जियो टैगिंग करेगा। साथ ही वेयरहाउस डेवलपमेंट रेगुलेटरी अथॉरिटी पंजीकृत वेयरहाउस ब्लॉक-तालुका स्तर तक बनाने के लिए सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग का प्रयोग करेगी। राज्य सरकारें जमीन देकर पीपीपी मॉडल से वेयरहाउस बनाने में मदद कर सकती हैं। इसके अलावा फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कमीशन अपनी जमीन पर भी ऐसे वेयरहाउस बना सकते हैं। प्रतिवर्ष खराब होने वाले प्याज और आलू जैसी महंगाई को रोकने में इससे काफी राहत हो सकती है। खेत से इन वेयरहाउस के बीच बैंकवर्ड लिंकेज बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह की तरफ से चलाई जाने वाली ग्रामीण स्तर पर भंडारण योजना आगे बढ़ाया जाएगा। महिला स्वयं सहायता समूहों को धान्यलक्ष्मी के नाम से जाना जाएगा। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों जैसे दूध, मांस और मछली को किसान रेल के जरिये बाजार तक पहुंचाने और कृषि उड़ान के तहत राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने में किसानों को मदद मिल सकेगी। इससे पूर्वोत्तर और आदिवासी क्षेत्रों को खासतौर पर मदद मिल सकेगी। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जरूरी है कि किसान गेहूं, धान और दूसरे अनाज के अलावा बागवानी की तरफ जाएं और इसमें सरकार को सफलता मिलती दिख रही है। बागवानी क्षेत्र 31 मिलियन टन पैदावार के साथ अनाज क्षेत्र से बड़ा हो गया है। इसे बढ़ाने के लिए वन प्रोडक्ट वन डिस्ट्रिक्ट की शुरुआत की है। बहुस्तरीय खेती, मधुमक्खी पालन, सौर पम्प, सौर ऊर्जा, जीरो बजट प्राकृतिक खेती से किसान को अपनी लागत पर कमाई का जरिया तैयार करने में सरकार मदद कर रही है।
इस बजट में किसान की आमदनी बढ़ाने के लिए वित्तमंत्री जी जो 116 सूत्र दिए हैं, उसमें दसवां सूत्र अतिमहत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के जरिये अब 91 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री इलेक्ट्रॉनिक मंडियों के जरिये हो चुकी है। लम्बे समय से आधुनिक कृषि के पैरोकार विशेषज्ञ यह मांग कर रहे थे कि राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना के तहत वेयरहाउस डेवलपमेंट रेगुलेटरी अथॉरिटी से पंजीकृत वेयरहाउस को भी मंडी का दर्जा दिया जाए। पंजीकृत वेयरहाउस में रखी उपज पर इलेक्ट्रॉनिक निगोशिएबल वेयरहाउस रसीद से किसान वेयरहाउस में रखी उपज पर बैंक से कर्ज भी ले सकता है और इसे पूरी तरह से या किस्तों में बेच भी सकता है। इस बजट में मोदी सरकार eNAM के साथ eNWR को जोड़ने का एलान किया। अभी eNWR के जरिये 6000 करोड़ रुपये का कर्ज किसानों को दिया जा चुका है। मुझे लगता है कि किसानों की आमदनी दोगुना करने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में इस बजट में यह सबसे बड़ा एलान है। सरकार का 2020-21 में 15 लाख करोड़ रुपये का कर्ज किसानों को देने का प्रस्ताव और पीएम किसान को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने का एलान भी इसी को आगे बढ़ा रहा है। यहां इस बात को ध्यान में रखना जरूरी है कि किसान क्रेडिट कार्ड की शुरुआत अटल बिहारी वाजपेयी ने ही प्रधानमंत्री रहते की थी।
खेत में पैदावार बढ़ाने, आधुनिक खरीद-बिक्री के तरीकों का प्रयोग बढ़ाने के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जरूरी है कि किसान दुग्ध प्रसंस्करण, मछलीपालन जैसे सहयोगी साधनों पर भी ध्यान दे। इसीलिएइस बजट में दुग्ध प्रसंस्करण दोगुना करने और ब्लू इकोनॉमी बढ़ाने के लिए तटीय क्षेत्रों में रहने वाले नौजवानों को मछली पालन और प्रसंस्करण के जरिये रोजगार देना। 3477 सागरमित्र और 500 मछलीपालक उत्पादक संगठन इसी को आगे बढ़ाने वाले हैं। बजट में 58 लाख स्वयं सहायता समूह के जरिये दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश की गयी है। बजट में खेती के लिए किया गया 2 लाख 83 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान बहुत बड़ा एलान नहीं है, लेकिन देश के इतिहास में पहली बार है कि किसी सरकार ने किसानों की बेहतरी का एक पक्का खाका न सिर्फ तैयार किया है बल्कि उसे मूर्त रूप देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से लागू किया है। अब देश की सभी राज्य सरकारों को, फिर वो भाजपा की हों या दूसरे राजनीतिक दलों की, और किसान नेताओं को किसानों के जीवन की बेहतरी के इस बजट में बताये गये 16 सूत्रों को लागू करने में राजनीति नहीं करना चाहिये और किसानों के भले के इस ऐतिहासिक अवसर को किसानी को चमकदार बनाने के लिए साथ आना चाहिए। यह लागू हो गया तो किसान का बेटा खेत छोड़कर नहीं जाएगा और कारोबारी का बेटा भी खेत की ओर रुख करेगा।

आधुनिक समाज में क्रिया-प्रतिक्रिया की बात करने से बड़ी बेअदबी क्या होगी ?

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