Friday, May 28, 2021

जवाहर लाल नेहरू, वीर सावरकर, प्रयागराज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अंग्रेजों की दलाली

हर्ष वर्धन त्रिपाठी

प्रयगारज के नये यमुना पुल पर जिसे डॉ मुरली मनोहर जोशी के प्रयासों से बनवाया गया


देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी के पिता मोतीलाल नेहरू जी का घर था आनंद भवन और 1975 में उसी के बग़ल में बना नेहरू तारामंडल, ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली में NMML (N जहां लिखा नेहरू समझें) के ठीक बगल में है और 1964 में बना नेहरू मेमोरियल फंड। 1970 में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने Anand Bhawan को सँभालने का ज़िम्मा जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड को दे दिया था। जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड, आनंद भवन और स्वराज भवन का भी रखरखाव करता है। राजनीतिक पर्यटन पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा यहाँ कभी-कभी जाते हैं।

स्वराज भवन के एक हिस्से में बाल भवन है। ज़्यादातर लोग इसे बाल भवन के नाम से ही जानते हैं, लेकिन यह भी जवाहर बाल भवन है। स्वराज भवन जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू का बंगला था, जिसे 1920 में उन्होंने कांग्रेस को दे दिया और कांग्रेस मुख्यालय बन गया। और जवाहर लाल नेहरू जी के पिता मोतीलाल नेहरू जी जिस समय यह सब बनाने में कामयाब हो गए थे, उस समय वीर सावरकर काला पानी से लेकर अलग-अलग जेलों में सज़ा भुगत रहे थे, ऐसे स्वातंत्र्य वीर सावरकर को नमन करता हूँ, हर भारतवासी को नमन करना चाहिए, बिना किसी किन्तु-परन्तु के। 


प्रयागराज (इलाहाबाद) की पहचान है संगम और Allahabad University 1876 में म्योर सेंट्रल कॉलेज और बाद में यही इलाहाबाद विश्वविद्यालय बना। नेहरू-इंदिरा-राजीव के कार्यकाल में लाख कोशिशों के बावजूद केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं बना। डॉ मुरली मनोहर जोशी ने यह चिर प्रतीक्षित कार्य किया। डॉ मुरली मनोहर जोशी इलाहाबाद से लगातार तीन बार सांसद बनने वाले अकेले नेता हैं। डॉ जोशी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने के साथ ही 1999 में IIIT लाए। अभी इसका शानदार परिसर शहर के बाहर झलवा में है, लेकिन शुरू में विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में था। प्रयागराज तीन तरफ़ से नदियों से घिरा है। प्रयाग से यमुना पार जाने के लिए अंग्रेजों का बनाया लोहे का पुल है। महानायक  अमिताभ बच्चन यहाँ से सांसद बने तो राजीव गांधी से कहा पुल बनवाए देओ, जनता की बहुत पुरानी माँग है। नेहरु-गांधी परिवार बनवा पाया। राज नहीं फ़क़ीर है, भारत की तक़दीर वाले, वीपी सिंह भी नहीं बनवा पाए। फिर डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी ही तारनहार बने और शानदार 4 लेन का केबल ब्रिज बनवाया। और, एक तथ्य जान लीजिए कि नेहरू-गांधी के शहर में सीवर लाइन भी नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंगा मइया का जल निर्मल करने वाली पहल नमामि गंगे के तहत अर्धकुम्भ से पहले  ही इस शहर में सीवरलाइन बिछाई गई। 


नेहरू-गांधी परिवार की कर्मभूमि अमेठी-रायबरेली का हाल तो स्मृति ईरानी की वजह से अब सब जानने लगे हैं। कैसे अमेठी-रायबरेली को इस परिवार ने बंधक बनाकर रखा और वहाँ के लोगों को न्यूनतम सुविधाएँ भी नहीं दीं, लेकिन प्रयागराज की चर्चा कम होती है क्योंकि शहर बड़ा है, अलग-अलग वजहों से इस शहर में बहुत कुछ होता रहता है और माघ मेले के बहाने प्रतिवर्ष रंग रोगन हो जाता है, लेकिन बड़ा काम इस शहर में तब हुआ, जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार 2017 में आई। बरसों से इंतज़ार करते पुल, अंडरपास, चौड़ी सड़कें, चौराहे, सब बन गए। प्रयागराज फिर से धर्मवीर भारती के गुनाहों का देवता वाले ग्राम्य या नगर देवता की कल्पना से तैयार शहर लगने लगा। जितनी ज़मीन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की है, क़रीब उतनी ही ज़मीन पर स्वराज भवन, आनंद भवन है। अपनी इस संपत्ति को इस-उस जुगत से निजी बनाए रखने के अलावा शायद ही नेहरू-गांधी परिवार ने प्रयाग के लिए कुछ किया हो। जितनी ज़मीन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की है, क़रीब उतनी ही ज़मीन पर स्वराज भवन, आनंद भवन है। अपनी इस संपत्ति को उस-उस जुगत से निजी बनाए रखने के अलावा शायद ही नेहरू-गांधी परिवार ने प्रयाग के लिए कुछ किया हो। जितनी ज़मीन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर की है, क़रीब उतनी ही ज़मीन पर स्वराज भवन, आनंद भवन है। अपनी इस संपत्ति को उस-उस जुगत से निजी बनाए रखने के अलावा शायद ही नेहरू-गांधी परिवार ने प्रयाग के लिए कुछ किया हो।

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