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Showing posts from April, 2010

और भी खेल हैं देश में क्रिकेट के सिवाय

फटाफट क्रिकेट का आधुनिकतम संस्करण इंडियन प्रीमियर लीग फटाफट घोटाले की सबसे आधुनिकतम मशीन बन गया है। वो, भी मशीन ऐसी कि समझ में नहीं आता कि आखिर कौन सा तरीका है जो, एक क्रिकेट टीम खरीदने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपए के निवेश पर मुनाफा कमाने की गारंटी दे रहा है। गारंटी ऐसी है कि इस इंडियन प्रीमियर लीग के मैदान पर एक मंत्री क्लीनबोल्ड हो गया। और, एक ताकतवर मंत्री अपने विभाग से ज्यादा तवज्जो क्रिकेट के इस खेल को दे रहा है। लेकिन, मैं फिलहाल इंडियन घोटाला लीग की चर्चा नहीं करना चाहता। मैं इस वक्त इस घोटाले की दुनिया के सामने आने के बहाने बात करना चाहता हूं देश के दूसरे खेलों की। भारत में क्रिकेट मंदिर और क्रिकेटर कुछ इस कदर भगवान माने जा रहे हैं कि देश के दूसरे खेलों को गुमनामी का राक्षस निगल गया है। यही वजह है कि छुटभैये क्रिकेटर को भी एक बार चाहे इंडियन टीम हो या फिर  IPL  में मौका मिल जाने के बाद उसी तारीफों के कसीदे पढ़े जाने शुरू हो जाते हैं लेकिन, विजेंदर और अखिल के मुक्के से निकला बॉक्सिंग चैंपियन का तमगा भी उन्हें दिल्ली की ऑटो की सवारी करने की मजबूरी से बचा नहीं पाता। अभी ताजा

प्रतिबद्ध कार्यकर्ता, भ्रमित नेता

भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को आज दिल्ली में जो रैली की वो, अपने आप में एतिहासिक कई मायनों में है। सबसे बड़ी बात तो ये कि भारतीय जनता पार्टी की इस 42 डिग्री की गर्मी में दिल्ली में हुई इस रैली ने साबित कर दिया कि घर बैठे कांग्रेस सरकार के राज में महंगाई की गर्मी की तपिश दिल्ली आकर 41 डिग्री के तापमान में झुलसने से कहीं ज्यादा भारी है। साबित ये भी हुआ कि नितिन गडकरी कैसे अध्यक्ष होंगे, उनका बीजेपी के इतिहास में नाम कैसे लिखाएगा ये तो, वक्त बताएगा लेकिन, संघ के इस लाडले अध्यक्ष की ताकत पूरे देश ने देख ली। साबित ये भी हुआ कि अटल-आडवाणी-जोशी और उस दौर के सारे नेताओं को भी नमस्ते किया जा चुका है। पार्टी कार्यकर्ता के सामने सिर्फ और सिर्फ सरकार से महंगाई पर कड़े सवाल पूछते गडकरी ही दिख रहे थे। लेकिन, इतना सबकुछ होने गडकरी के सबसे ताकतवर नेता के तौर पर प्रतिस्थापित होने के बावजूद गडकरी की बेहोशी ने मीडिया को विश्लेषण का वो बहाना दे दिया कि जब नेता खुद खड़ा नहीं हो पा रहा है तो, पार्टी क्या खड़ी करेगा। देश भर से आए बीजेपी कार्यकर्ताओं की जुबान में बोलते हुए बीजेपी के ताजा-ताजा प्रवक्ता बने त

इस अपराध बोध से मुक्ति कैसे मिले

  दरअसल मैं कुछ गलत नहीं कर रहा हूं लेकिन, फिर भी मुझे अपराध बोध हो रहा है। पानी पीते वक्त ले में अंटक जाता है। लगता है कि जितना पानी मैं पी रहा हूं उससे कई गुना ज्यादा पानी बर्बाद करने का दोषी भी मैं बन रहा हूं। मुंबई से जब दिल्ली आया था तो, महीने- दो महीने में ही नोएडा का पानी जहर लगने लगा था। पता चला कि हमारा एक्वागार्ड यहां के जहरीले पानी को साफ नहीं कर पा रहा है। हेमामालिनी और उनकी दो बेटियों के भरोसे मैंने केन्ट की RO (REVERSE OSMOSIS) मशीन लगवा ली। भरोसा काम आया और सचमुच एकदम बोतलबंद पानी जैसा बढ़िया पानी पीने को मिलने लगा। कुछ दिन तो अच्छा लगा लेकिन, बेहद संवेदनशील ये मशीन वैसे तो, हर दूसरे तीसरे महीने पानी के कम बहाव या फिर टंकी में पानी खत्म होने से कुछ न कुछ मुश्किल बढ़ाने लगी। उस पर एक बोतल पानी भरने पर RO सिस्टम बहुत देर तक पानी बहाता रहता। अभी एक दिन मैंने एक बोतल पानी निकालने के बाद बर्बाद होने वाले पानी को बोतल में नापा तो, पता लगा कि हर एक लीटर शुद्ध पानी के लिए हमारे घर में केन्ट मशीन की वजह से करीब 5 लीटर पानी बह जाता है। अब मजबूरी ये है कि नोएडा में रहते हुए परि