तुम लोगों के पास थोड़ी भी अकल है या नहीं। या पुराना फंसा हुआ रिकॉर्ड हो गए हो तुम मीडिया वाले। जहां अंटक गए उसके आगे बढ़ ही नहीं पाते। दरअसल तुम लोगों का दोष भी नहीं है। तुम लोग क्या जानो कानून के बारे में। लेकिन, मैं तो जानता हूं इसलिए मेरी बात सुनो।
और, अब तो मैं गृहमंत्री भी हूं। बड़ा वकील हूं बड़ा मंत्री हूं। अब दुबारा मत पूछना कि अफजल को फांसी देने में हमारी सरकार देर क्यों कर रही है। चलो तुम बेवकूफों को मैं समझा देता हूं। अफजल गुरु को जब फांसी की सजा सुनाई गई है। और, अभी तक कुल फांसी के 28 मामले हैं। उन 28 मामलों में अफजल का नंबर 22वां है। तो, जाहिर है हमारी सरकार कानून तोड़कर तो अफजल को फांसी देगी नहीं। पहले 21 लोगों को फांसी चढ़ने दीजिए फिर अफजल की बात करिएगा।
अब कसाब का भी ट्रायल चल ही रहा है। कसाब के कबूलनामे के बाद भी विशेष अदालत के न्यायाधीश महोदय पता नहीं क्यों कह रहे हैं कि फैसला अभी नहीं सुनाया जाएगा। फैसले के लिए कसाब का कबूलनामा रिकॉर्ड के तौर पर रखा जरूर जाएगा। बड़ा एहसान मुंबई हमले में कसाब और दूसरे उसके साथी आतंकवादियों की गोली से मारे गए लोगों के परिजनों पर। मारे गए लोगों की आत्मा को भी इतनी शांति तो मिल ही रही होगी तो, आज नहीं तो कल आंतकवादी अंजाम तक पहुंचेंगे।
अरे लेकिन, इसमें मुश्किल है। क्योंकि, कसाब का नंबर तो अगर तुरंत फांसी सुनाई जाए तो, 29वां हो जाएगा। तो, पहले 21 फिर, 22वां अफजल, फिर 29वां कसाब फांसी चढ़ेगा। और, अपने गृहमंत्रीजी तो बहुत दुखी हैं। कह रहे हैं कि तुम मीडिया के बेवकूफों को तो पता नहीं होता। फांसी चढ़ने से ज्यादा कष्ट वो झेल रहे होते हैं जो, फांसी दिए जाने का इंतजार कर रहे होते हैं। वाह रे समझदार सरकार और उसके समझदार गृहमंत्री ... लेकिन, हम तो भइया बेवकूफ ही भले
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Saturday, July 25, 2009
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
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