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Tuesday, June 08, 2010

बंधक है लोकतंत्र

अमेरिकी सरकार के उप सचिव ने लगभग डांटने के अंदाज में उम्मीद जताई है कि भारत सरकार भोपाल गैस त्रासदी पर सीजेएम कोर्ट के फैसले के आधार पर फिर से ये केस नहीं खोलेगी। मेरा ये बहुत साफ भरोसा है कि भारतीय संविधान बड़ा बदलाव मांगता है जो, भारतीय लोकतंत्र को सही मायने में मजबूत कर सके। क्योंकि, आज संविधान में ऐसे प्रावधान ही नहीं हैं जो, असाधारण परिस्थितियों से निपटने की ताकत देते हों। भारत में सीबीआई और दूसरे जांच आयोगों को ऐसी ताकत क्यों नहीं मिल पा रही कि वो, राजनीतिक दबाव को दरकिनार करके जनता के हित में सही फैसले ले सकें।

भोपाल गैस त्रासदी मामले में तब सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर रहे बीआर लाल ने आज बड़ा खुलासा किया कि उन्हें इस मामले में सरकार की तरफ से निर्देश दिए गए थे कि वॉरेन एंडरसन के प्रत्यर्पण की कोशिश न की जाए। विदेश मंत्रालय की तरफ से आई चिट्ठी में ये बात साफ-साफ कही गई थी। अब बीआर लाल साहब रिटायरमेंट के बाद ये बात कहने का साहस जुटा पा रहे हैं इतने के लिए भी उनको बधाई देनी चाहिए।

बीआर लाल ने वो खुलासे किए हैं जो, अब तक आरोप के तौर पर सरकारों पर लगते थे कि सीबीआई का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए किया जाता है। लाल ने कहा कि कोई भी मामला हो जो, सीबीआई को सौंपा जाता है उस पहले से ही निर्देश आ जाते हैं कि इस मामले में क्या और कितना करना है। लाल ने ये तक कहा कि क्वात्रोची का मामला तो, पैसे का था लेकिन, पंद्रह हजार से ज्यादा जानें जाने के मामले में भी सीबीआई पर जबाव नाजायज है।

अब वॉरेन एंडरसन का प्रत्यर्पण तो खैर संभव ही नहीं है। क्योंकि, भारत सरकार में इतनी ताकत तो आजादी के 63 सालों में पैदा हो नहीं पाई है कि वो, अमेरिका पर दबाव बना सके। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर किस दबाव में भोपाल गैस त्रासदी की ही रात वॉरेन एंडरसन को अर्जुन सिंह ने किस जबाव में विशेष विमान से दिल्ली पहुंचवा दिया। और, फिर उसे धीरे से भारत से ही बाहर करा दिया गया।

सरकारों के हाथ में लोकतंत्र किस तरह बंधक है ये अच्छे से समझा जा सकता है। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब बीजेपी और लेफ्ट का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था। वो, भी ऐसा प्रस्ताव जिस पर खुद मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी और लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल देश भर में चक्का जाम कर रही थी। महंगाई पर चिलचिलाती धूप में जनता को बेवकूफ बनाते इन दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ वोट करने से मना कर दिया। बहाना बना हम सांप्रदायिक बीजेपी के साथ नहीं जा सकते। लेकिन, लाल साहब के खुलासे के बाद बीजेपी के इस आरोप में दम लगता है कि सीबीआई के डर ने दोनों यादव क्षत्रपों के साथ मायावती को सरकार के साथ कर दिया।

अब सीबीआई के इस तरह से इस्तेमाल के खुलासे के बाद अब ये जरूरी हो गया है कि संविधान में आयोगों, सीबीआई जैसी संस्थाओं को स्वायत्तता दी जाए। जिससे राजनेता इनके जरिए लोकतंत्र को बंधक न बना सकें। वरना तो, कुछ दिनों के हो हल्ले के कुछ दिन बाद सब ये भूल जाएंगे कि पंद्रह हजार से ज्यादा मौतों के गुनहगार विदेशी को सीबीआई छोड़ दे इसका दबाव तब की सरकार ने बनाया था। देसी गुनहगार तो, खैर बरसों से इसके जरिए सत्ता चला ही रहे हैं।

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