जाति प्रथा सभ्यता बचाने में मदद कर रही है। ये सुनकर अटपटा लगता है। जाति प्रथा को ज्यादातर सामाजिक बुराइयों के लिए दोषी ठहरा दिया जाता है। लेकिन, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मानव शास्त्र विभाग के अध्यक्ष और प्रसिद्ध समाज मानवशास्त्री प्रोफेसर वीएस सहाय का एक शोध कह रहा है कि जाति प्रथा की वजह से ही भारतीय सभ्यता इतने समय तक बची रही है। वो कहते हैं कि भारत और चीन को छोड़कर दूसरी सारी सभ्यताएं इसीलिए नष्ट हो गईं। लेकिन, वो जिस जाति प्रथा की बात करते हैं वो, पिता से बेटे को तभी मिलती थी जब बेटा पिता के ही कर्म करता था। वो, पेशा आधारित जाति प्रथा की वजह से सभ्यता बचने की बात खोजकर लाए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Saturday, December 29, 2007
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...
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हमारे यहां बेटी-दामाद का पैर छुआ जाता है। और, उसके मुझे दुष्परिणाम ज्यादा दिख रहे थे। मुझे लगा था कि मैं बेहद परंपरागत ब्राह्मण परिवार से ह...
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आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं...
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पुरानी कहावतें यूं ही नहीं बनी होतीं। और, समय-समय पर इन कहावतों-मिथकों की प्रासंगिकता गजब साबित होती रहती है। कांग्रेस-यूपीए ने सबको साफ कर ...