मैकाले को गाली देते देते हम कब मन के काले हो गए पता ही नहीं लगा। लड़ाई ही गलत हो रही है। IAS में C-SAT रहे या खत्म हो। क्या यही लड़ाई है। ये लड़ाई आगे बढ़े। @narendramodi की सरकार पर ये दबाव बने कि हर बात हिंदी में करने का अधिकार भारत में नहीं मिलेगा तो कहां मिलेगा। अच्छा है मौके से बात शुरू हो गई है। अदालत से अधिकारी क्लर्क बनने तक हिन्दी, भारतीय भाषाओं को मौका मिले। बताइए क्या अंग्रेजी वालों का डर है कि शरद यादव जैसे लोग भी कह रहे हैं कोई अंग्रेजी के खिलाफ नहीं है। कमाल है बरसों से अंग्रेजी ने हिन्दी को खिलाफ खड़े होने लायक नहीं छोड़ा और अवसर आया लड़ाई का तो बात ये कि हिन्दी या भारतीय भाषाएं अंग्रेजी के खिलाफ नहीं हैं। बिल्कुल खिलाफ हैं। कम से कम कम वहां तक तो पक्का ही जहां तक हिन्दी या दूसरी भारतीय भाषाओं का हक अंग्रेजी मार रही है। जोर से बोलो हम हिंदुस्तान में अंग्रेजी के सरकारी उपयोग के खिलाफ हैं। निजी जीवन में मैं भी चाहता हूं ज्यादा से ज्यादा भाषा सीख सकूं। सब सीखें। सब अपना भाषा ज्ञान बघारें। कौन मना करता है।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Tuesday, August 05, 2014
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...
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हमारे यहां बेटी-दामाद का पैर छुआ जाता है। और, उसके मुझे दुष्परिणाम ज्यादा दिख रहे थे। मुझे लगा था कि मैं बेहद परंपरागत ब्राह्मण परिवार से ह...
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आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं...
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पुरानी कहावतें यूं ही नहीं बनी होतीं। और, समय-समय पर इन कहावतों-मिथकों की प्रासंगिकता गजब साबित होती रहती है। कांग्रेस-यूपीए ने सबको साफ कर ...