पुरस्कारों की दौड़ में दरअसल मैं सीधे तौर पर कभी रहा नहीं। लेकिन, पुरस्कार अच्छा तो सबको लगता है। क्योंकि, वो आपको काम को प्रतिष्ठित करता है। ब्लॉगिंग की ढेर सारी संगोष्ठियों, बहसों में शामिल रहा। लेकिन, कभी किसी पुरस्कार के लिए अपने ब्लॉग को नामांकित करने की नहीं सोचा। इस बार ऐसे ही फरवरी महीने में डॉयचे वेले की द बॉब्स के अवॉर्ड में बतंगड़ ब्लॉग को भी नामांकित कर दिया। उसके बाद भूल गया। फिर एक दिन 14-15 अप्रैल के बाद मैंने देखा तो पीपुल्स च्वॉइस फॉर हिंदी श्रेणी में मेरा बतंगड़ भी नामांकित था। बतंगड़ के अलावा चार और ब्लॉग इस श्रेणी में दिखे। उसमें एक खबर लहरिया को छोड़कर सबको जानता ही थी। उसमें ब्लॉग को वोट करना था। रवीश का कस्बा, इंडिया वॉटर पोर्टल, रचनाकार भी इसी श्रेणी में थे। मुझे लगा कि रवीश का कस्बा और मेरा बतंगड़ छोड़ तीनों ब्लॉग सामूहिक ब्लॉग हैं और अच्छा काम कर रहे हैं। इसलिए लगा कि जनता की पसंद तो वही बनेंगे और उनसे बचे तो रवीश कुमार की लोकप्रियता भारी पड़ जाएगी। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं और आखिरकार विजेताओं की सूची में जनता की पसंद हिंदी श्रेणी में बतंगड़ सबसे ऊपर रहा। सभी का धन्यवाद मतदान और समर्थन के लिए।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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