मैंने काफी समय पहले एक बार सोचा था कि अपना नाम हर्षवर्धन त्रिपाठी की जगह हर्षवर्धन शांडिल्य लिखना शुरू कर दूं। लेकिन, फिर नाम बदलने की नाना प्रकार की झंझटों से वो विचार त्याग दिया। वैसे इस विचार के पीछे मंशा यही थी कि जाति की बजाय गोत्र लिखूंगा तो जातिवाद को शायद एक धक्का दे सकूं। क्योंकि, गोत्र तो सभी जातियों में लगभग एक जैसे ही होते हैं। किसी न किसी ऋषि के नाम पर ही जातियों में गोत्र तय होते हैं। इसका ज्यादा विद्वान नहीं हूं। इसलिए ये चर्चा खत्म। लेकिन, अब लगता है कि अच्छा ही किया कि जातिनाम ही लिख रहा हूं। क्योंकि, अब तो गोत्र नाम से राजनीति हो रही है। और, गोत्र से जाति जोड़ देने से पूरी जाति का अपमान हो रहा है। और 'आप' कह रहे थे कि राजनीति बदलने आए हैं। बदलकर रहेंगे। लेओ, देखो कैसे बदल रही है राजनीति।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
Showing posts with label Upadravi Gotra. Show all posts
Showing posts with label Upadravi Gotra. Show all posts
Monday, February 02, 2015
Subscribe to:
Posts (Atom)
जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...
-
हमारे यहां बेटी-दामाद का पैर छुआ जाता है। और, उसके मुझे दुष्परिणाम ज्यादा दिख रहे थे। मुझे लगा था कि मैं बेहद परंपरागत ब्राह्मण परिवार से ह...
-
आप लोगों में से कितने लोगों के यहां बेटियों का पैर छुआ जाता है। यानी, मां-बाप अपनी बेटी से पैर छुआते नहीं हैं। बल्कि, खुद उनका पैर छूते हैं...
-
पुरानी कहावतें यूं ही नहीं बनी होतीं। और, समय-समय पर इन कहावतों-मिथकों की प्रासंगिकता गजब साबित होती रहती है। कांग्रेस-यूपीए ने सबको साफ कर ...