C-SAT पर क्या जबर्दस्त राजनीति हो रही है। देखिए इसे। दिल्ली में इसके विरोध की तस्वीरें तो सब देख ही रहे हैं। इलाहाबाद में भी जमकर इसका विरोध हो रहा है। सिर्फ आईएएस नहीं पीसीएस की परीक्षा में भी उसी पैटर्न को हटाने के लिए ये विरोध हो रहा है। केंद्र में बीजेपी की सरकार है। उसी विचारधारा वाले छात्र संगठन ABVP के छात्रों ने इसके विरोध में आमरण अनशन शुरू कर दिया है। समाजवादी छात्रसभा के कुछ बच्चे सड़क पर इसके विरोध में झाड़ू लगा रहे हैं जबकि, प्रदेश में इन्हीं की पार्टी की सरकार है। वामपंथी आइसा भी इसके विरोध में जुलूस निकाल रहा है। प्रतियोगी छात्र प्रवेश पत्र जला रहे हैं। कुल मिलाकर कहें तो दक्षिणपंथी, वामपंथी, समाजवादी सबको इस पर एतराज है। फिर वो कौन लोग हैं जो इतने ताकतवर हैं कि इन सब पर हावी हैं। कौन हैं जो पूर्ण बहुमत वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ऊपर फैसले ले रहे हैं। दरअसल ये गुलाम परस्त मानसिकता से लड़ाई है। ये मामला सिर्फ सीसैट का नहीं है। देखिए प्री परीक्षा के बाद ये लड़ाई चलती है। या फिर छात्रों के अपना भविष्य सुरक्षित रखने तक ही ये हिन्दी वाली चिंता चलती है। अंग्रेजी वाले नियमित और योजनाबद्ध तरीके से खुद को स्थापित करने का और दसरों पर राज करने की योजना बनाते, चलाते रहते हैं। जबकि, हिन्दी वाले जब उनके स्वार्थ पूरे नहीं होते दिखते हैं। तब मैदान में उतरते हैं। तो, जाहिर है अंग्रेजी वाले फिर हिन्दी वालों को मैदान से मकान तक पहुंचाने वाला लॉलीपॉप फैसला दिलाकर चुप करा देते हैं। लड़ाई गुलामी वाले पूरे तंत्र से है। सिर् आईएएस या पीसीएस बनने तक ये लड़ाई नहीं है। लेकिन, इतना तो जरूर है कि अगर आईएएस और पीसीएस तक भी हिन्दी वाले पहुंचने बंद हो गए तो शायद इस तंत्र से लड़ना नामुमकिन हो जाएगा। हिन्दी के नाम पर गर्व आने वाली पीढ़ी कैसे कर पाएगी। कोई रमारमण किसी अंग्रेजी माध्यम स्कूल में मुख्य अतिथि नहीं बनेगा। और बना भी तो बच्चों को हिन्दी के लिए प्रेरित नहीं कर पाएगा।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Saturday, August 02, 2014
Friday, August 01, 2014
हिन्दी की राजनीति और राजनीति की हिन्दी
समाजवादी पार्टी और उसकी उत्तर प्रदेश सरकार कुछ इस तरह से खुद
को पेश कर रही है जैसे हिन्दी वाले छात्रों के लिए वो बड़ी चिंतित है। मुख्यमंत्री
ने प्रधानमंत्री को यूपीएससी के सीसैट पर चिट्ठी लिखी। उधर, बीजेपी के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यूपीपीसीएस के पैटर्न पर चिट्ठी लिखकर यूपीपीसीएस की
परीक्षा रोकने को कहा है। यूपीएससी ने 2010 में
आईएएस के लिए सीसैट लागू किया। वही पैटर्न उत्तर प्रदेश ने पीसीएस के लिए लागू कर
दिया। छात्रों को ये भी समझना होगा कि कौन कहां राजनीतिक रोटी सेंक रहा है। दिल्ली
में उत्तर प्रदेश-बिहार का हर पार्टी का सांसद हिन्दी के पक्ष में बात कर रहा है।
राजनीतिक भविष्य के लिहाज से भी और सचमुच भी दुखी है छात्रों के उत्पीड़न से फिर
भी कौन लोग हैं जो इतने ताकतवर है जो 120 सांसदों
की इच्छा के ऊपर हावी हो जा रहे हैं।
और सिर्फ यूपी-बिहार ही क्यों? दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र
के भी सांसद क्या हिन्दी या भारतीय भाषाओं के विरोधी हो सकते हैं। जवाब कड़ाई से
नहीं में है। फिर @narendramodi को ये
फैसला लेने में किसी समिति की रिपोर्ट का इतने लंबे समय से इंतजार क्यों है। बीजेपी
के एक सांसद ने कल मुझसे फिर कहाकि सीसैट पर अगले एक दो दिन में सुखद फैसला आ
जाएगा। इससे पहले भी कुछेक सांसद मुझे ये भरोसा पंद्रह दिन पहले ही दे रहे थे।
सवाल ये है कि जब सबकुछ इतना साफ है और हिन्दी या दूसरी भारतीय भाषाओं के छात्रों
के साथ अन्याय हो रहा है ये सब जानते हैं तो, उसे
सुधारने में इतना समय क्यों लग रहा है। हिन्दी में दुनिया को समझाने वाले @narendramodi अपने अधिकारियों की अंग्रेजी पर
प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ये बता चुके हैं कि रिपोर्ट भी आ चुकी है। हम जल्द ही इस पर फैसला लेंगे। सचमुच हिन्दी के लिए हिंदुस्तान में फैसला लेना बड़ा कठिन है। #UPSC #CSAT
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