ये बड़े काबिल अधिकारी हैं। नाम है Srivats Krishna ये कर्नाटक कैडर के IAS अधिकारी हैं। 1995 बैच के टॉपर हैं। इनका मत है कि अंग्रेजी न जानने वाले को देश में आईएएस बनना ही नहीं चाहिए। अंग्रेजी का देश का सबसे बड़ा अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया इनकी इस सोच को संपादकीय में जगह देता है। ये हिन्दी वाले आईएएस जो जाने कितने सालों तक टॉपर रहे होंगे, काबिल भी होंगे। कहां मरे बैठे हैं। या फिर हिन्दी, अंग्रेजी का कोई अखबार हिन्दी के काबिल आईएएस अधिकारी का मत अपने संपादकीय पन्ने पर छापने से बचते हैं। श्रीवत्स कृष्ण अकसर टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए संपादकीय लिखते हैं। इनकी काबिलियत पर अखबार ने इन्हें दूसरे अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया था। पूरी खबर इनके ऊपर थी। इनकी उपलब्धियों पर। इस तरह से सोचने समझने वाले देश, समाज, मीडिया के लिए अपने देश, अपनी भाषा, अपना समाज बचाना कहीं प्राथमिकता में होता ही नहीं है। ऐसे में कहां यूपीएससी में हिन्दी या दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ हो रहे अन्याय कोई सरकार हरकत में आएगी। सचमुच हिन्दी के लिए फैसला लेना हिंदुस्तान में बड़ा कठिन है।
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
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