ये दिल्ली के एक बड़े होटल की तस्वीर है। महिला, पुरुष के लिए प्रसाधन के दरवाजे पर HE या SHE की बजाए M और W लिखा है। लिखावट ऐसी है कि अलग-अलग दोनों एक दूसरे के एकदम उलट दिखते हैं। और थोड़ा समझ लें तो दोनों एक दूसरे के साथ ऐसे फिट हो जाते हैं कि लगता है एकाकार हो गए हैं। बस यही समझ का फर्क है स्त्री-पुरुष के रिश्ते के किसी भी हाल में पहुंचने का। देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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Sunday, May 03, 2015
एकाकार!
ये दिल्ली के एक बड़े होटल की तस्वीर है। महिला, पुरुष के लिए प्रसाधन के दरवाजे पर HE या SHE की बजाए M और W लिखा है। लिखावट ऐसी है कि अलग-अलग दोनों एक दूसरे के एकदम उलट दिखते हैं। और थोड़ा समझ लें तो दोनों एक दूसरे के साथ ऐसे फिट हो जाते हैं कि लगता है एकाकार हो गए हैं। बस यही समझ का फर्क है स्त्री-पुरुष के रिश्ते के किसी भी हाल में पहुंचने का। Wednesday, August 27, 2014
स्त्री-पुरुष!
स्त्री, पुरुष बराबरी की बात करते हम कितने आगे चले आए हैं। और हुआ क्या है। अंदाजा लगाइए #KBC में @SrBachchan ने सवाल पूछा कि अर्जुन पुरस्कार पाने वाली पहली महिला क्रिकेटर कौन है। मिताली राज और अंजलि जैन का नाम मैं जानता था लेकिन, मेरी पैदाइश के साल में ही अर्जुन पुरस्कार पा चुकी महिला क्रिकेटर को इस देश में कितने लोग जानते होंगे। इसी से अंदाजा लग जाता है कि महिलाओं का अच्छा क्रिकेटर होना भी उस देश में किसी को याद नहीं जिस देश में चिरकुट पुरुष क्रिकेटर करो़ड़ो के विज्ञापन लूट लेता है। कमाल ये है कि 1976 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली शांता रंगास्वामी के बारे में गूगल अंकल भी बमुश्किल बता पाते हैं।
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जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
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