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Monday, September 22, 2014

डॉक्टर हर्षवर्धन त्रिपाठी!

ये एतिहासिक शोध मैंने पूरा किया है। इसे मैं नए माध्यम यानी कि ब्लॉग पर पेश कर रहा हूं। मेरे शोध का विषय रहा- बीमारी की हद तक वामपंथ से ग्रसित व्यक्ति स्वस्थ होने की हद तक दक्षिणपंथी कैसे बन सकता है। इस शोध का परिणाम भी एक ही लाइन का है। परिणाम है देश में दक्षिणपंथी विचारधारा वाली सरकार का होना। अब इस शानदार शोध के लिए मुझे डॉक्टरेट मिले ना मिले। वैसे तो राह चलते कई विश्वविद्यालय बुलाकर बड़े लोगों को बिना शोध ही डॉक्टरेट की उपाधि दे देते हैं। बड़ा आदमी न होने से इतना महत्वपूर्ण शोधपत्र प्रस्तुत करने के बाद भी शायद ही कोई विश्वविद्यालय अदालतों की तरह स्वत: संज्ञान ले। बीमारी से ग्रसित ढेर सारे वामपंथियों के स्वस्थ दक्षिणपंथी में बदलने की कुछ कहानियां भी मैं यहां लिख सकता हूं। लेकिन, इसकी कोई जरूरत नहीं है। अपने आसपास के बीमारी की हद तक वाले वामपंथी पर नजर रखिए। खुद सब साफ हो जाएगा।

(नोट- मैं तो आलसी, अगंभीर किस्म का शोधार्थी हूं। इसलिए ऐसे ही इतना महत्वपूर्ण शोध कर लिया। लेकिन, कोई गंभीर, सक्रिय, कामकाजी शोधार्थी चाहें तो सचमुच इस विषय पर शोध कर सकते हैं। और पक्का उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल सकती है।)

Wednesday, November 14, 2007

बौराए बुद्धदेव से कौन बचाएगा बंगाल को

नंदीग्राम में हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि सरकारी स्कूलों में चल रहे इन राहत शिविरों में ज्यादातर वो मुसलमान हैं जो, अब तक सीपीएम का वोटबैंक माने जाते रहे हैं। महीने भर से करीब 5,000 से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में डरे सहमे पड़े हुए हैं।

5-7 साल के बच्चों को सीपीएम कार्यकर्ता उनकी रैलियों में शामिल न होने पर पीट रहे हैं। 7 साल की अमीना खातून को 20 दिन पहले उस समय घर छोड़ना पड़ा जब उसके गांव पर सीपीएम कैडर ने गोली, बमों के साथ हमला कर दिया। इस गांव में तृणमूल कांग्रेस समर्थित भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी का दबदबा था। इसे हटाने के लिए सीपीएम कैडर ने गांव को बरबाद कर दिया। लोग जान बचाकर राहत शिविरों में भाग गए।

बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और प्रकाश करात तो बेशर्मी की सारी हदें पार कर गए हैं। वो कह रहे हैं सीपीएम कार्यकर्ताओं को उनके घर नहीं जाने दिया जा रहा था। इसलिए सीपीएम कैडर को हथियार उठाना पड़ा। बुद्धदेव इतने पर ही नहीं माने। वो कह रहे हैं कि यहां हुई हिंसा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है। केंद्र से बार-बार सीआरपीएफ मांगने के बाद भी समय से सुरक्षा बल के जवान नहीं पहुंचे। इसीलिए नंदीग्राम में इतनी हिंसा हुई।

बुद्धदेव को शर्म नहीं आती जब पूरा देश ये देख रहा है कि नंदीग्राम और आसपास के गांवों में सीआरपीएफ के जवानों को हथियारबंद सीपीएम कैडर और बंगाल की पुलिस घुसने ही नहीं दे रही है। और, अगर बुद्धदेव के बयान पर भरोसा करें तो, क्या वो ये मान रहे हैं कि बंगाल में सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। फिर ऐसी सरकार के बने रहने का क्या तुक है। चुनी हुई राज्य सरकारों के तख्तापलट के लिए छोटी-छोटी बातों पर राष्ट्रपति शासन का इस्तेमाल करने वाली कांग्रेसी सरकार क्यों कान में तेल डालकर बैठी हुई है।

साफ है कांग्रेस और लेफ्ट के बीच तू मेरी गलती को छिपा मैं तेरी गलती को अच्छाई में बदलता हूं, वाला फॉर्मूला चल रहा है। यानी दलालों की सरकार हमारे ऊपर राज कर रही है।

जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव

  सुप्रभात राम राम भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्र...