#Mumbai में कल यह साहब मुझे बीकेसी से जुहू ले जाने के लिए आए। उबर से टैक्सी बुक की थी। चमचमाती कार, अभी तक सीट की पन्नी भी नहीं उतरी थी। उन्होंने बताया कि, कवर लगवा लेंगे, तब उतारेंगे। मैंने कहा- लगवा लो भाई, गर्मी है और सीट पर पन्नी से पृष्ठ भाग पसीने से तरबतर हो रहा है। यह दूसरी गाड़ी इन साहब ने खरीदी है। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात एक सहकारी बैंक में अनुकंपा नियुक्ति से क्लर्क बने। कहते हैं, उतने से काम नहीं चलता, इसलिए टैक्सी भी चलाते हैं। यह सब सहज भाव में बताते जा रहे थे, रंचमात्र भी तनाव नहीं। जब छुट्टी होती है तो चलाते हैं और उनके ऑफिस में भी लोग जानते हैं तो उनकी टैक्सी मँगाते हैं। एकदम मस्त दिख रहे थे। बढ़िया चश्मा, टी-शर्ट में जम रहे थे। यही मुम्बईकर स्पिरिट है। मुम्बई मायानगरी है। अब माया के चक्कर में हर कोई फँसा है, लेकिन मायानगरी में रहकर भी मस्त एकदम मस्त रहने का है, विनायक साहब ने समझाया। #MumbaiDiaries
देश की दशा-दिशा को समझाने वाला हिंदी ब्लॉग। जवान देश के लोगों के भारत और इंडिया से तालमेल बिठाने की कोशिश पर मेरे निजी विचार
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