Friday, February 13, 2026

Tarique Rahman को बांग्लादेश की जनता ने बड़ा अवसर दिया है

 Harsh Vardhan Tripathi हर्ष वर्धन त्रिपाठी

#Bangladesh में
ने उन्हें बधाई दी है और अच्छे संबंधों की उम्मीद जताई है। भारत के लिए शेख हसीना सच्ची और अच्छी दोस्त थीं। खालिदा जिया को भारत के दोस्त के तौर पर नहीं देखा जाता रहा, लेकिन तारिक रहमान लगभग दो दशक निर्वासित जीवन लंदन में बिताकर लौटे हैं। भारत उनके साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहता है। शेख हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध की वजह से उनकी पार्टी के समर्थकों ने तारिक रहमान को मत दिया होगा, ऐसा माना जा सकता है। इतनी प्रचंड जीत का सीधा आशय है कि, कट्टर जमातियों को बांग्लादेश का बड़ा वर्ग सत्ता में आने से रोकना चाहता था और उसने कर दिखाया। इसमें बांग्ला
देश के युवाओं और विशेषकर महिलाओं की भूमिका बड़ी है। शेख हसीना को लेकर नौजवानों के एक बड़े वर्ग के मन में यह आ गया था कि, शेख हसीना तानाशाही कर रही हैं। हालांकि, तथ्यात्मक तौर पर शेख हसीना के शासन में रहते बांग्लादेश ने विकास की रफ्तार पकड़ी थी। इस सबके बावजूद बांग्लादेश के नौजवानों के मन में यह बात स्थापित हो गई थी कि, शेख हसीना तानाशाही कर रही हैं। इसमें अमेरिकी डीप स्टेट ने भी अपना खेल किया और मोहम्मद यूनुस को कठपुतली की तरह लाकर बैठा दिया। ISI और पाकिस्तानी सेना के साथ जमात के कट्टरपंथियों ने इसमें अपनी जगह देखी, लेकिन बांग्लादेश के नौजवानों और विशेषकर महिलाओं ने इसको समय से समझ लिया। अब जब बांग्लादेश के चुनाव परिणाम आ गए हैं तो यह स्पष्ट दिख रहा है कि, बांग्लादेश का बहुसंख्यक मुसलमान और पूर्ण रूप से अल्पसंख्यक समाज लोकतंत्र के पक्ष में मतदान करने निकला। जमातियों के पक्ष में धांधली की भी खबरें आईं। कई स्थानों पर जमातियों के पक्ष में पहले से ही मत दिए गए थे। इस सबके बावजूद तारिक रहमान की पार्टी ने शानदार जीत प्राप्त की है। भारत भी बांग्लादेश की जनता के साथ खड़ा है। तारिक रहमान को शेख हसीना को वापस बांग्लादेश लाने की जिद छोड़ना होगा। तारिक रहमान के लिए यह खतरनाक होगा कि, बांग्लादेश में ISI और पाकिस्तानी सेना का प्रभाव बढ़े। अगर ऐसा हुआ तो बीएनपी की संभावनाएं आगे कम होती जाएंगी। लगभग दो दशक लंदन में निर्वासित रहे तारिक रहमान को पश्चिमी देशों की साजिशों का भी अच्छे से अनुमान होगा। भारत कतई यह नहीं चाहता कि, दिल्ली से ढाका की राजनीति, नीत तय हो, लेकिन दिल्ली यह भी पसंद नहीं करेगा कि, बीजिंग और वाशिंगटन से ढाका की नीतियां भारत विरोधी हो जाएं या इस्लामाबाद और बांग्लादेश में कट्टर जमात बांग्लादेश को भारत विरोधी गतिविधियों का अड्डा बना दे। तारिक रहमान को लोकतंत्र बरकरार रखने के लिए शुभकामनाएं

Tarique Rahman को बांग्लादेश की जनता ने बड़ा अवसर दिया है

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