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ये पूरा बेड़ा गर्क करके ही मानेंगे

इलाहाबाद से बदलाव के संकेत

इलाहाबाद में हिंदी ब्लॉगिंग और पत्रकारिता पर चर्चा

ठीक-ठीक सोच तो लो कि क्या करना है

दौड़ादौड़ी की झमाझम चर्चा

ई बतकही के बड़ मनई हैं

करीब 3 घंटे तो ‘अमितमय’ ही रह गए

आडवाणी जी, आपके पास एक बड़ा मौका और है

बच्चे-बच्चे को जो बात पता है वो, सीएम साहब को नहीं पता!

बस इत्ते के ही गांधी जी

टीवी के तिलिस्म को समझना होगा, भागने से नुकसान ही होगा